कांग्रेस का प्रदर्शन: दीपेंद्र बोले- 50 रुपये पर पेट्रोल होने पर हल्ला करने वाली भाजपा आज 80 रुपये पर शांत है
पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस सिलिंडर की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के विरोध में राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने सोमवार को प्रदर्शन किया। कोरोना के संक्रमणकाल में एहतियातन लघु सचिवालय में सोशल डिस्टेंसिंग के लिए उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने के लिए 21 लोगों के प्रवेश की अनुमति थी लेकिन सांसद के साथ भीड़ उमड़ पड़ी। इसके बाद उपायुक्त आरएस वर्मा को कार्यालय से बाहर आकर सरकार के नाम ज्ञापन लिया।
राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में तेल की कीमत 50 रुपये होने पर हल्ला करने वाली भाजपा आज 80 रुपये कीमत पहुंचने पर भी शांत बैठी है। कोरोना महामारी के दौर में सरकार की ओर से राहत मिलना तो दूर, महंगाई की मार से आम आदमी की कमर तोड़ दी है। डीजल के बढ़ते दामों से किसान की स्थिति बद से बदतर हो गई है। भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों का असर है कि आज रोजगार नहीं हैं।
उन्होंने जनता से अपील की है कि वह स्वयं को कोरोना के संक्रमण से बचा कर रखे और आवश्यकता होने पर ही घर से बाहर निकले। इस मौके पर विधायक रघबीर कादियान, भारत भूषण बतरा, शकुंतला खटक, पूर्व विधायक आनंद सिंह दांगी, प्रोफेसर वीरेंद्र, पूर्व मंत्री कृष्ण हुड्डा, संत कुंवार धनखड़, पूर्व पार्षद सूरजमल रोज, सूर्यदेव दहिया, वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनमोहन आजाद, वीरेंद्र हुड्डा, उमेद हुड्डा, ओमप्रकाश खत्री, महेंद्र सिंह दहिया, पंकज सचदेवा आदि मौजूद रहे।
मदद के नाम पर किया ढोंग, न पैसा पहुंचा न ही रोटी
दीपेंद्र हुड्डा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महामारी के कारण गरीब-मजदूर और मध्यवर्ग के सामने आज रोजी-रोटी का संकट आ गया है। भाजपा सरकार ने राहत देने के नाम पर सिर्फ ढोंग किया है। जरूरतमंद तक न तो पैसा पहुंचा न ही रोटी। रोजगार की तलाश में आए लोगों को पलायन करना पड़ा। समय आने पर जनता भाजपा को सत्ता से बेदखल कर हिसाब चुकता करेगी।
पीटीआई के संघर्ष में कांग्रेस रहेगी हमेशा साथ: दीपेंद्र
नौकरी बहाली की मांग को लेकर पिछले पंद्रह दिन से लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे पीटीआई के बीच राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा पहुंचे और उनके संघर्ष को पूर्ण समर्थन दिया। हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस कार्यकाल में भर्ती हुए पीटीआई को दस साल की सेवा के बाद हटाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस फैसले में स्पष्ट तौर पर भाजपा-जजपा सरकार की राजनीतिक दुर्भावना की बू आ रही है।
किसी की रोजी-रोटी छीनना निहायत घिनौना कृत्य है। सुप्रीम कोर्ट ने लॉकडाउन की अवधि को देखते हुए दोबारा पेपर कराने की प्रक्रिया से पूर्व नौकरी से हटाने का फैसला नहीं सुनाया था। दीपेंद्र हुड्डा ने पीटीआई को आश्वस्त किया कि वह और कांग्रेस उनकी लड़ाई में उनके साथ हैं।