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अब 10 साल में पूरा करना होगा एमबीबीएस कोर्स, बदले कई और नियम, यहां लें पूरी जानकारी

Sat, 23 Nov 2019 11:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो संजय कुमार/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
संजय कुमार/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Sat, 23 Nov 2019 11:24 AM IST
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Compulsory completion of MBBS course in ten years
फाइल फोटो

देश भर में एमबीबीएस कोर्स को दस साल में पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा भी कई नियम बदल दिए गए हैं, जिन्हें जानना बेहद जरूरी है। एमबीबीएस विद्यार्थी के लिए थ्योरी में 75 तो प्रेक्टिकल में 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी। थ्योरी में 40 प्रतिशत व प्रेक्टिकल में 40 और कुल मिला कर 50 प्रतिशत अंक लेना भी हर विद्यार्थी के लिए अनिवार्य होगा।

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वहीं, प्रथम प्रोब पास करने के लिए हर एमबीबीएम विद्यार्थी को चार साल का वक्त दिया गया है। अब तक एमबीबीएस विद्यार्थी के लिए प्रथम प्रोब पास करना अनिवार्य होता था, इसके बाद वह कभी भी अपनी डिग्री पूरी कर सकता था। लेकिन नये नियम के लागू होने से हर एक मेडिकल विद्यार्थी को नियमानुसार चलना होगा।
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प्रेक्टिकल व एथिकल एजूकेशन साथ-साथ
मेडिकल एजूकेशन से जुडे़ एक्सपर्ट बताते हैं कि पहले एमबीबीएस के विद्यार्थियों को सेकेंड प्रोब में वार्ड में मरीजों से मिलाया जाता था। लेकिन नई शिक्षा पद्धति में शुरू से ही मेडिकल विद्यार्थियों को मरीजों व उनके रिश्तेदारों से मिलाया जाता है। इससे उनका प्रेक्टिकल व इथिकल ज्ञान बढ़ता है।
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इसी नियमावली के तहत कोर्स की शुरुआत में एक माह का देश भर में ओरियंटेशन प्रोग्राम कराया गया था। नये नियमों के अनुसार कोर्स के शुरू होते ही हर विषय की पढ़ाई करवाई जाएगी। गौरतलब है कि एमबीबीएस में कुल 21 विषय होते हैं।

एक जैसा पाठ्यक्रम होगा, समयानुसार पढ़ाया जाएगा

अमर उजाला से बातचीत में पीजीआईएमएस के कार्यकारी कुलपति एवं निदेशक डॉ. रोहतास कंवर यादव ने बताया कि मेडिकल एजूकेशन को देश भर में एक समान कर दिया गया है। हर जगह एमबीबीएस का एक जैसा पाठ्यक्रम होगा और तय समय के अनुसार यह पढ़ाया जाएगा। 2019 से एमबीबीएस कोर्स को पंजीकरण के दस साल में पूरा करना हर विद्यार्थी के लिए अनिवार्य होगा।

यदि ऐसा नहीं होता तो संबंधित विद्यार्थी का पंजीकरण रद्द हो जाएगा। देश में योग्य डॉक्टर बनें इसके लिए थ्योरी व प्रेक्टिकल में उपस्थिति व पास अंक तय कर दिए गए हैं। सबसे अहम है कि अब नया नियम सभी 21 विषयों पर लागू होगा। इसलिए जरूरी है कि हर विद्यार्थी अपनी थ्योरी व प्रेक्टिकल को ध्यान से करें।

प्रथम प्रोब एक, सेकेंड प्रोब एक व थर्ड प्रोब में दो भाग होंगे, जिसमें पहला एक व दूसरा डेढ़ साल का होगा। इसके अलावा एक साल की एमबीबीएस विद्यार्थी को इंटर्नशिप करनी होगी। गौरतलब है कि प्रदेश में 800 के करीब सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीट हैं। इसके अलावा शाहबाद व इसराना के निजी मेडिकल कॉलेजों में 150-150 एमबीबीएस की सीटें हैं।

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