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Rohtak News: जनता दरबार में शिकायतों का लगता जा रहा अंबार

Sat, 17 Jun 2023 03:05 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 17 Jun 2023 03:05 AM IST
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Complaints are piling up in Janata Darbar
रोहतक। नगर निगम में मेयर का जनता दरबार कारगर साबित नहीं हो रहा है। निगम अधिकारियों ने मेयर को पांच दरबारों की स्टेटस रिपोर्ट सौंपी हैं, जिसमें बताया गया है कि 126 शिकायतों में से 69 का समाधान कर दिया है। बाकी की जांच कर रहे हैं, कई के कागजात नहीं मिले। इतना ही नहीं, शुक्रवार को मेयर के जनता दरबार में मात्र 12 शिकायतें आईं। अधिकारियों ने कहा कि व्यवस्था में सुधार हुआ है, जबकि पार्षद ने कहा कि शिकायतें दूर नहीं हो रही, इसलिए नहीं आ रहे। शुक्रवार को करीब सवा 11 बजे लोग जनता दरबार में पहुंच गए थे। मेयर मनमोहन गोयल करीब सवा 11 बजे कार्यालय आए, जिन्होंने जोनल टैक्स ऑफिसर अशोक व टैक्स इंस्पेक्टर अमन की मौजूदगी में शिकायतें सुननी शुरू की। करीब 12 बजे ज्वाइंट कमिश्नर विजय सिंह कार्यालय में पहुंचे। उन्होंने खुद भी लोगों की शिकायतें सुननी। 12 बजकर 20 मिनट के बाद दरबार में कोई नहीं आया। अधिकारी व पार्षद भी उठकर चले गए। पूरे दरबार में मात्र 12 शिकायतें आई, जिनको जांच के लिए प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के पास भेजा गया।
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अप्रैल माह से जनता दरबार लग रहे हैं। लोगों की शिकायतें दूर हो रही हैं। ऐसे में अब लोगों को दोबारा नहीं आना पड़ रहा। इसलिए शिकायत कम हो गई हैं।
विजय सिंह, ज्वाइंट कमिश्नर, नगर निगम

जनता दरबार में लोग काफी उम्मीदों के साथ आए थे, लेकिन जब शिकायतें दूर नहीं होंगी तो अब आना कम कर दिया। अधिकारी यह पहलू देखें।
सुनील कुमार, पार्षद वार्ड नंबर 8

जनता दरबार लगाकर लोगों की शिकायतें दूर करवा रहे हैं। निगम की तरफ से पांच दरबार की स्टेट्स रिपोर्ट दी है, जिसमें आधी से ज्यादा शिकायतें दूर करने का दावा किया गया है। उनका प्रयास है कि लोगों की दिक्कतें कम हों।
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मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम
पिछले पांच जनता दरबार की स्टेटस रिपोर्ट
दरबार कुल शिकायत समाधान
25 अप्रैल 22 09
04 मई 47 31
12 मई 19 10
18 मई 09 08
25 मई 17 03
1 जून 12 08

2001 से भर रहा हूं बिल, निगम बता रहा अब दूसरे की आईडी
हिसार रोड स्थित गाबा मार्केट से आए बुजुर्ग राधेश्याम कथूरिय व उनकी पुत्रवधू मोनिका कथूरिया ने बताया कि वे 2001 से प्रॉपर्टी टैक्स भर रहे हैं। जिसकी रसीद उनके पास हैं। 2011 में निगम ने ऑनलाइन डाटा किया तो उनकी प्रॉपर्टी आईडी नंबर बदल दिया। जबकि नाम, पता व क्षेत्र और मोबाइल नंबर सही रखा। वे बिल भरते रहे। अब दो दिन पहले बिल निकलवाया तो पता चला कि वे किसी अन्य की आईडी का बिल भर रहे थे। उनकी तरफ से अब भी 60 हजार रुपये प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है। मोनिका ने कहा कि वे गलती उनकी नहीं, बल्कि नगर निगम की है। उनकी राशि समायोजित की जाए।
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