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12वीं में कंपार्टमेंट तो एमडीयू में प्रवेश नहीं
रोहतक
Updated Wed, 30 Apr 2014 02:55 AM IST
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अब 12वीं में कंपार्टमेंट वाले विद्यार्थियों को एमडीयू में स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश नहीं मिल पाएगा। वहीं, एमडीयू में वोकेशनल कॉलेज ट्रायल और एसएफएस बेस पर शुरू होगा। वोकेशनल कॉलेज शुरू करने के प्रस्ताव पर कुछ संशोधन के साथ मंगलवार को एकेडमिक काउंसिल की 174वीं बैठक में मुहर लग गई।
यूनिवर्सिटी के यूआईईटी में एसएफएस (सेल्फ फाइनेंस स्कीम) के तहत मेकेनिकल इंजीनियरिंग को भी मंजूरी मिल गई। बैठक में ज्यादातर प्रस्तावों को पारित कर दिया गया है। बैठक में 35 प्रस्तावों का मूल एजेंडा शामिल किया गया था और 17 आइटम का एडिशनल एजेंडा भी रखा गया। यहां पारित सभी प्रस्तावों को एग्जीक्यूटिव काउंसिल में अप्रूवल केलिए रखा जाएगा।
इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर यह हुआ निर्णय
- प्रस्ताव : कंपार्टमेंट वाले विद्यार्थियों को प्रवेश
निर्णय :- इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है। अब 12वीं में कंपार्टमेंट पाने वाले विद्यार्थियों को एमडीयू में स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
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- यह होगा फायदा :- कॉलेज में प्रवेश लेने केलिए विद्यार्थी 12 वीं में ही अच्छी मेहनत करेंगे। इसका फायदा यह होगा कि यूनिवर्सिटी या कॉलेजों में आने वाले ज्यादातर विद्यार्थी अच्छे अंकों वाले होंगे। जिससे प्रवेश लेने केलिए प्रतियोगिता बढ़ेगी और अच्छे विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
- प्रस्ताव :- वोकेशनल कॉलेज शुरू करना
- फैसला :- यूनिवर्सिटी परिसर में वोकेशनल कॉलेज के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। हालांकि इस प्रस्ताव को संशोधन के साथ पारित किया गया है। अब यह कॉलेज शुरुआत में ट्रायल बेस पर एसएफएस (सेल्फ फाइनेंस स्कीम) के तहत चलाया जाएगा। यदि इसके परिणाम बेहतर हुए तो इसे नियमित रूप से चलाया जाएगा।
- यह होगा फायदा :- परिसर में वोकेशनल कॉलेज शुरू होने से विद्यार्थियों को रोजगार परक शिक्षा दी जाएगी। यहां विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से दक्ष किया जाएगा। इसका फायदा विभिन्न सरकारी और मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी के वक्त मिलेगा। इस कोर्स के बाद विद्यार्थियों को रोजगार मिलने के मौके बढ़ जाएंगे।
- प्रस्ताव : एमटेक मेकेनिकल इंजीनियरिंग शुरू करना
- फैसला :- यूआईईटी में एमटेक (मेकेनिकल इंजीनियरिंग) कोर्स शुरू करने के प्रस्ताव को भी पारित कर दिया गया है। पहले इस कोर्स में 18 सीट निर्धारित की गई थी, लेकिन बैठक में सीटों की संख्या बढ़ाकर 24 कर दी गई है।
- यह होगा फायदा :- विद्यार्थियों के लिए अलग से एक नया कोर्स शुरू होगा। अब तक एमटेक के लिए कई विद्यार्थियों को दिल्ली या अन्य शहरों में जाना पड़ता था। अब यूनिवर्सिटी परिसर में ही एमटेक मेकेनिकल इंजीनियरिंग का मौका मिल जाएगा। कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत चलाया जाएगा। इससे विभाग को भी आर्थिक लाभ होगा।
- प्रस्ताव :- एमएससी कंप्यूटर साइंस कोर्स शुरू करना
फैसला :- इस प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है। इसे कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन विभाग में एसएफएस केतहत शुरू किया जाएगा।
- क्या होगा फायदा :- विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा में एक पीजी डिग्री कोर्स का विकल्प मिलेगा। यूनिवर्सिटी परिसर में ही होने केकारण विद्यार्थियों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
- प्रस्ताव :- सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने संबंधित
- फैसला :- सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत एक वर्षीय चाइनीज सर्टिफिकेट कोर्स और पीजी सर्टिफिकेट कोर्स बॉयो इंफॉर्मेटिक्स, फार्माको-इंफॉर्मेटिक्स एंड फैलो ज्योनॉमिक्स भी शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। अगले सत्र से ही इसे भी शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
- यह होगा फायदा :- विद्यार्थियों को फॉरेन लैंग्वेज कोर्स में विकल्प मिलेगा। कठिन मानी जाने वाली चाइनीच भाषा का भी ज्ञान मिल सकेगा। सेल्फ फाइनेंस के तहत होने से इसका आर्थिक लाभ भी यूनिवर्सिटी को होगा।
- प्रस्ताव :- कॉमन ओर्डिनेंस का प्रस्ताव
फैसला :- यूजी, पीजी और पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्सेज (सेमेस्टर सिस्टम) में कॉमन ओर्डिनेंस लागू करने के प्रस्ताव को मान लिया गया है। प्रस्ताव केतहत अब तीसरे और पांचवें सेमेस्टर में प्रवेश केलिए विद्यार्थियों को पिछले सेमेस्टरों में कम से कम 50 प्रतिशत विषयों में पास होना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं होने पर इन फाइनल सेमेस्टर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
- ये होगा फायदा :- विद्यार्थियोें की लापरवाही पर रोक लगेगी। सभी विषयों में पास होने के लिए ठीक से पढ़ाई करेंगे। कक्षाओं में नियमित आने लगेंगे।
प्रस्ताव :- मप्र के विद्यार्थियों को प्रवेश का मामला
फैसला:- मध्यप्रदेश के ग्वालियर स्थित मध्य भारत सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड से 12वीं पास करने वाले 85 विद्यार्थियों को नियमित प्रवेश देने के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई।
ये होगा फायदा :- अन्य प्रदेशों के उन्हीं विद्यार्थियों को मौका मिल सकेगा जो मान्यता प्राप्त होंगे और यूनिवर्सिटी की सूची में शामिल होंगे। अन्य बोर्डों केविद्यार्थियों केनहीं होने से शहर और प्रदेश के ही ज्यादा विद्यार्थियों को प्रवेश मिलेगा।
आइटम नंबर 13 में बीपीएड सीपीएड कोर्स केलिए प्राचार्य, हेड या व्याख्याताओं की क्वालीफिकेशन से संबंधित प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया है। हरियाणा कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन की प्रतिनिधित्व समिति से संबंधित प्रस्ताव भी रद्द कर दिया गया। इसके अलावा दो तीन मुद्दों को भी फिलहाल टाल दिया गया है।
बैठक में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब एडिशनल एजेंडे के तहत यूएमसी कमेटी से संबंधित प्रस्ताव रखा गया। कुछ सदस्यों ने यूएमसी कमेटी में शारीरिक शिक्षा विभाग के डॉ. भगत सिंह का नाम शामिल करने का विरोध कर दिया। इन सदस्यों का तर्क था कि डॉ. भगत सिंह पर कई आरोप लगे हैं। जांच केलिए समिति भी बनाई जा चुकी है। ऐसे में उन्हें अनफेयर मिन्स और मिस कंटक्ट केसेज जैसे मामले की समिति में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि बैठक में उनका नाम हटाया नहीं गया। इसके अलावा एडिशनल एजेंडे में शामिल पीएचडी रजिस्ट्रेशन के प्रस्तावों को भी मंजूरी दे दी गई है। एमए पॉप्यूलेशन स्टडीज का कोर्स शिक्षकों की कमी केकारण बंद कर दिया गया।
हम यूनिवर्सिटी केलिए बेहतर से बेहतर करना चाहते हैं। विद्यार्थियों को जितना फायदा मिलेगा उतना ही यूनिवर्सिटी का भी नाम होगा। लगभग सभी मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई और ज्यादातर प्रस्ताव पारित कर दिए गए हैं।
एचएस चहल, कुलपति, एमडीयू।
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यूनिवर्सिटी के यूआईईटी में एसएफएस (सेल्फ फाइनेंस स्कीम) के तहत मेकेनिकल इंजीनियरिंग को भी मंजूरी मिल गई। बैठक में ज्यादातर प्रस्तावों को पारित कर दिया गया है। बैठक में 35 प्रस्तावों का मूल एजेंडा शामिल किया गया था और 17 आइटम का एडिशनल एजेंडा भी रखा गया। यहां पारित सभी प्रस्तावों को एग्जीक्यूटिव काउंसिल में अप्रूवल केलिए रखा जाएगा।
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इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर यह हुआ निर्णय
- प्रस्ताव : कंपार्टमेंट वाले विद्यार्थियों को प्रवेश
निर्णय :- इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है। अब 12वीं में कंपार्टमेंट पाने वाले विद्यार्थियों को एमडीयू में स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
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- यह होगा फायदा :- कॉलेज में प्रवेश लेने केलिए विद्यार्थी 12 वीं में ही अच्छी मेहनत करेंगे। इसका फायदा यह होगा कि यूनिवर्सिटी या कॉलेजों में आने वाले ज्यादातर विद्यार्थी अच्छे अंकों वाले होंगे। जिससे प्रवेश लेने केलिए प्रतियोगिता बढ़ेगी और अच्छे विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
- प्रस्ताव :- वोकेशनल कॉलेज शुरू करना
- फैसला :- यूनिवर्सिटी परिसर में वोकेशनल कॉलेज के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। हालांकि इस प्रस्ताव को संशोधन के साथ पारित किया गया है। अब यह कॉलेज शुरुआत में ट्रायल बेस पर एसएफएस (सेल्फ फाइनेंस स्कीम) के तहत चलाया जाएगा। यदि इसके परिणाम बेहतर हुए तो इसे नियमित रूप से चलाया जाएगा।
- यह होगा फायदा :- परिसर में वोकेशनल कॉलेज शुरू होने से विद्यार्थियों को रोजगार परक शिक्षा दी जाएगी। यहां विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से दक्ष किया जाएगा। इसका फायदा विभिन्न सरकारी और मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी के वक्त मिलेगा। इस कोर्स के बाद विद्यार्थियों को रोजगार मिलने के मौके बढ़ जाएंगे।
- प्रस्ताव : एमटेक मेकेनिकल इंजीनियरिंग शुरू करना
- फैसला :- यूआईईटी में एमटेक (मेकेनिकल इंजीनियरिंग) कोर्स शुरू करने के प्रस्ताव को भी पारित कर दिया गया है। पहले इस कोर्स में 18 सीट निर्धारित की गई थी, लेकिन बैठक में सीटों की संख्या बढ़ाकर 24 कर दी गई है।
- यह होगा फायदा :- विद्यार्थियों के लिए अलग से एक नया कोर्स शुरू होगा। अब तक एमटेक के लिए कई विद्यार्थियों को दिल्ली या अन्य शहरों में जाना पड़ता था। अब यूनिवर्सिटी परिसर में ही एमटेक मेकेनिकल इंजीनियरिंग का मौका मिल जाएगा। कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत चलाया जाएगा। इससे विभाग को भी आर्थिक लाभ होगा।
- प्रस्ताव :- एमएससी कंप्यूटर साइंस कोर्स शुरू करना
फैसला :- इस प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है। इसे कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन विभाग में एसएफएस केतहत शुरू किया जाएगा।
- क्या होगा फायदा :- विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा में एक पीजी डिग्री कोर्स का विकल्प मिलेगा। यूनिवर्सिटी परिसर में ही होने केकारण विद्यार्थियों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
- प्रस्ताव :- सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने संबंधित
- फैसला :- सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत एक वर्षीय चाइनीज सर्टिफिकेट कोर्स और पीजी सर्टिफिकेट कोर्स बॉयो इंफॉर्मेटिक्स, फार्माको-इंफॉर्मेटिक्स एंड फैलो ज्योनॉमिक्स भी शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। अगले सत्र से ही इसे भी शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
- यह होगा फायदा :- विद्यार्थियों को फॉरेन लैंग्वेज कोर्स में विकल्प मिलेगा। कठिन मानी जाने वाली चाइनीच भाषा का भी ज्ञान मिल सकेगा। सेल्फ फाइनेंस के तहत होने से इसका आर्थिक लाभ भी यूनिवर्सिटी को होगा।
- प्रस्ताव :- कॉमन ओर्डिनेंस का प्रस्ताव
फैसला :- यूजी, पीजी और पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्सेज (सेमेस्टर सिस्टम) में कॉमन ओर्डिनेंस लागू करने के प्रस्ताव को मान लिया गया है। प्रस्ताव केतहत अब तीसरे और पांचवें सेमेस्टर में प्रवेश केलिए विद्यार्थियों को पिछले सेमेस्टरों में कम से कम 50 प्रतिशत विषयों में पास होना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं होने पर इन फाइनल सेमेस्टर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
- ये होगा फायदा :- विद्यार्थियोें की लापरवाही पर रोक लगेगी। सभी विषयों में पास होने के लिए ठीक से पढ़ाई करेंगे। कक्षाओं में नियमित आने लगेंगे।
प्रस्ताव :- मप्र के विद्यार्थियों को प्रवेश का मामला
फैसला:- मध्यप्रदेश के ग्वालियर स्थित मध्य भारत सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड से 12वीं पास करने वाले 85 विद्यार्थियों को नियमित प्रवेश देने के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई।
ये होगा फायदा :- अन्य प्रदेशों के उन्हीं विद्यार्थियों को मौका मिल सकेगा जो मान्यता प्राप्त होंगे और यूनिवर्सिटी की सूची में शामिल होंगे। अन्य बोर्डों केविद्यार्थियों केनहीं होने से शहर और प्रदेश के ही ज्यादा विद्यार्थियों को प्रवेश मिलेगा।
आइटम नंबर 13 में बीपीएड सीपीएड कोर्स केलिए प्राचार्य, हेड या व्याख्याताओं की क्वालीफिकेशन से संबंधित प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया है। हरियाणा कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन की प्रतिनिधित्व समिति से संबंधित प्रस्ताव भी रद्द कर दिया गया। इसके अलावा दो तीन मुद्दों को भी फिलहाल टाल दिया गया है।
बैठक में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब एडिशनल एजेंडे के तहत यूएमसी कमेटी से संबंधित प्रस्ताव रखा गया। कुछ सदस्यों ने यूएमसी कमेटी में शारीरिक शिक्षा विभाग के डॉ. भगत सिंह का नाम शामिल करने का विरोध कर दिया। इन सदस्यों का तर्क था कि डॉ. भगत सिंह पर कई आरोप लगे हैं। जांच केलिए समिति भी बनाई जा चुकी है। ऐसे में उन्हें अनफेयर मिन्स और मिस कंटक्ट केसेज जैसे मामले की समिति में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि बैठक में उनका नाम हटाया नहीं गया। इसके अलावा एडिशनल एजेंडे में शामिल पीएचडी रजिस्ट्रेशन के प्रस्तावों को भी मंजूरी दे दी गई है। एमए पॉप्यूलेशन स्टडीज का कोर्स शिक्षकों की कमी केकारण बंद कर दिया गया।
हम यूनिवर्सिटी केलिए बेहतर से बेहतर करना चाहते हैं। विद्यार्थियों को जितना फायदा मिलेगा उतना ही यूनिवर्सिटी का भी नाम होगा। लगभग सभी मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई और ज्यादातर प्रस्ताव पारित कर दिए गए हैं।
एचएस चहल, कुलपति, एमडीयू।