{"_id":"6823bdec108a85b82b096704","slug":"commission-considered-the-audio-recording-to-be-fake-the-insurance-company-should-give-compensation-of-rs-70-thousand-to-the-vehicle-owner-rohtak-news-c-17-roh1019-652327-2025-05-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: आयोग ने ऑडियो रिकाॅर्डिंग को माना फर्जी, वाहन मालिक को बीमा कंपनी दे 70 हजार रुपये मुआवजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: आयोग ने ऑडियो रिकाॅर्डिंग को माना फर्जी, वाहन मालिक को बीमा कंपनी दे 70 हजार रुपये मुआवजा
विज्ञापन
रोहतक। जिला उपभोक्ता फोरम ने फैसला दिया है कि कंपनी तीसरे व्यक्ति से बातचीत कर की गई कॉल रिकाॅर्डिंग को आधार बनाकर बीमा राशि देने से इन्कार नहीं कर सकती। ऐसे में वाहन मालिक जगदीश चंद्र निवासी बलियाना को 70 हजार 845 रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित दे। साथ ही, 5 हजार रुपये कानूनी खर्च व 5 हजार रुपये सेवाओं में कमी के नाम पर दे। पूरी राशि का भुगतान एक माह में किया जाए।
आयोग के रिकाॅर्ड के मुताबिक, जुलाई 2020 में जगदीश चंद्र ने याचिका दायर की कि उसने कार खरीदी थी, जिसका बीमा कराया था। कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसे उसका बेटा सुनील चला रहा था। बीमा कंपनी से संपर्क किया और सर्वे कर मुआवजे की मांग की। बीमा कंपनी ने आवेदन को यह कहकर खारिज कर दिया कि नियमों का पालन नहीं किया गया। इसके कारण उसने खुद पैसे का भुगतान करके कार ठीक करवाई।
इसके बाद ई-मेल व दूसरे तरीके से आवेदन कर नए सिरे से सर्वे कराने की मांग की। जब कोई असर नहीं हुआ तो जगदीश चंद्र ने आयोग में अर्जी दायर की। नोटिस पर बीमा कंपनी ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट में पता चला है कि वाहन कार मालिक जगदीश चला था, जिसका ड्राइवर लाइसेंस उस समय एक्सपायर हो चुका था। ऐसे में क्लेम नहीं दिया जा सकता। इसके लिए कंपनी की तरफ से एक ऑडियो रिकाॅर्डिंग दी गई। इसमें कहा गया कि सुनील खुद कह रहा है कि गाड़ी वह नहीं चला रहा था। दूसरी तरफ याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि सुनील से सर्वे करने वाले ने संपर्क नहीं किया। किसी तीसरे व्यक्ति की रिकाॅर्डिंग दी गई है। हकीकत में गाड़ी सुनील ही चला रहा था। आयोग ने कहा कि किसी तीसरे व्यक्ति की कॉल रिकाॅर्डिंग के आधार पर दावा खारिज नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन
आयोग के रिकाॅर्ड के मुताबिक, जुलाई 2020 में जगदीश चंद्र ने याचिका दायर की कि उसने कार खरीदी थी, जिसका बीमा कराया था। कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसे उसका बेटा सुनील चला रहा था। बीमा कंपनी से संपर्क किया और सर्वे कर मुआवजे की मांग की। बीमा कंपनी ने आवेदन को यह कहकर खारिज कर दिया कि नियमों का पालन नहीं किया गया। इसके कारण उसने खुद पैसे का भुगतान करके कार ठीक करवाई।
विज्ञापन
इसके बाद ई-मेल व दूसरे तरीके से आवेदन कर नए सिरे से सर्वे कराने की मांग की। जब कोई असर नहीं हुआ तो जगदीश चंद्र ने आयोग में अर्जी दायर की। नोटिस पर बीमा कंपनी ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट में पता चला है कि वाहन कार मालिक जगदीश चला था, जिसका ड्राइवर लाइसेंस उस समय एक्सपायर हो चुका था। ऐसे में क्लेम नहीं दिया जा सकता। इसके लिए कंपनी की तरफ से एक ऑडियो रिकाॅर्डिंग दी गई। इसमें कहा गया कि सुनील खुद कह रहा है कि गाड़ी वह नहीं चला रहा था। दूसरी तरफ याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि सुनील से सर्वे करने वाले ने संपर्क नहीं किया। किसी तीसरे व्यक्ति की रिकाॅर्डिंग दी गई है। हकीकत में गाड़ी सुनील ही चला रहा था। आयोग ने कहा कि किसी तीसरे व्यक्ति की कॉल रिकाॅर्डिंग के आधार पर दावा खारिज नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन