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कोवैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल का पहला फेज पूरा
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कोवैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल का पहला फेज पूरा हो चुका है। पीजीआईएमएस ने वालंटियर्स को डोज लगाने के 14 दिन बाद सैंपल ले लिया है। अब इसे जांच के लिए आईसीएमआर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च दिल्ली भेजा जाएगा। इसके बाद दो सप्ताह बीतने के बाद फिर वालंटियर्स का सैंपल भेजा जाएगा। दूसरे सैंपल में सामने आ जाएगा कि कोवैक्सीन लगने के 28 दिन बाद शरीर में एंटीबाडी बनने का क्या स्तर है।
स्वदेशी कोवैक्सीन की प्रिंसिपल इंवेस्टीगेटर एवं पीजीआईएमएस के फार्माकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. सविता वर्मा ने बताया कि कोवैक्सीन ट्रायल अभी तक ठीक चल रहा है, किसी वालंटियर के स्वास्थ्य पर अभी तक कोई दुष्प्रभाव नहीं मिला है। सभी बिल्कुल स्वस्थ्य हैं। 15 के करीब वालंटियरों के 14 दिन बीतने के बाद पहला सैंपल जांच के लिए ले लिया गया है। इनके सैंपल 28 अगस्त को दोबारा लिए जाएंगे, इस सैंपल की जांच के बाद खुलासा होगा कि हमारी रिसर्च किस दिशा में जा रही है। कोवैक्सीन की सेफ्टी में तो हम अभी तक ठीक हैं और अगली जांच में इसके इफेक्ट को देखा जाएगा।
आईसीएमआर की जांच लैब में वालंटियरों के सैंपल से पता चल पाएगा कि वैक्सीन का क्या रिजल्ट आ रहा है। गौरतलब है कि वैक्सीन लगने के 14, 28, 42, 104, 194 दिन व छह माह पूरे होने पर सैंपल लिए जाएंगे। इन सभी में वालंटियरों के अंदर एंटीबाडी का स्तर देखा जाएगा। इसमें जांचा जाएगा कि कितने समय तक एंटी बॉडी बढ़ती है या घटती है और किसी वालंटियर को कितनी डोज पर क्या असर रहा।
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स्वदेशी कोवैक्सीन की प्रिंसिपल इंवेस्टीगेटर एवं पीजीआईएमएस के फार्माकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. सविता वर्मा ने बताया कि कोवैक्सीन ट्रायल अभी तक ठीक चल रहा है, किसी वालंटियर के स्वास्थ्य पर अभी तक कोई दुष्प्रभाव नहीं मिला है। सभी बिल्कुल स्वस्थ्य हैं। 15 के करीब वालंटियरों के 14 दिन बीतने के बाद पहला सैंपल जांच के लिए ले लिया गया है। इनके सैंपल 28 अगस्त को दोबारा लिए जाएंगे, इस सैंपल की जांच के बाद खुलासा होगा कि हमारी रिसर्च किस दिशा में जा रही है। कोवैक्सीन की सेफ्टी में तो हम अभी तक ठीक हैं और अगली जांच में इसके इफेक्ट को देखा जाएगा।
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आईसीएमआर की जांच लैब में वालंटियरों के सैंपल से पता चल पाएगा कि वैक्सीन का क्या रिजल्ट आ रहा है। गौरतलब है कि वैक्सीन लगने के 14, 28, 42, 104, 194 दिन व छह माह पूरे होने पर सैंपल लिए जाएंगे। इन सभी में वालंटियरों के अंदर एंटीबाडी का स्तर देखा जाएगा। इसमें जांचा जाएगा कि कितने समय तक एंटी बॉडी बढ़ती है या घटती है और किसी वालंटियर को कितनी डोज पर क्या असर रहा।
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