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Rohtak News: रिश्वत प्रकरण में बिजली निगम का क्लर्क बरी
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रोहतक।
बिजली मीटर लगाने के नाम पर तीन हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोपी क्लर्क सुनील कुमार को अदालत ने वीरवार को बरी कर दिया। क्लर्क ने मीटर लगाने के लिए नियमानुसार ली जाने वाली राशि की मांगी थी। यह राशि भी उसके पास से बरामद नहीं हुई। यह फैसला वीरवार को एएसजे राजकुमार की अदालत ने दिया।
अदालत के मुताबिक, बसंतपुर के एक व्यक्ति ने धर पर बिजली मीटर लगवाना था। इसके लिए बिजली कर्मचारी सुनील कुमार से संपर्क किया। इसके कहे अनुसार एक किलो वाट के बिजली कनेक्शन की फाइल बिजली विभाग जसिया कार्यालय में जमा कराई। इस फाइल की फीस भरकर रसीद भी ले ली। सुनील ने मीटर लगवाने के लिए 4000 रुपये की मांग की। उसने 12 सितंबर को फोन पर मीटर लगाने के लिए 3000 रुपये रिश्वत मांगी। इस बारे में शिकायत एंटी क्रप्शन ब्यूरो में दी। यहां से टीम ने कार्रवाई करते हुए सुनील को गिरफ्तार किया। इस संबंध में 13 सितंबर को केस दर्ज किया गया। अब अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया है।
अधिवक्ता जगबीर दहिया ने बताया कि सुनील कुमार के पास से न तो रुपये मिले और न ही उसने रिश्वत की मांग की थी। उसने मीटर के लिए नियमानुसार रुपये ही मांगे थे। उसके खिलाफ झूठा केस बनाया गया। इसके चलते अदालत ने उसे बरी कर दिया।
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बिजली मीटर लगाने के नाम पर तीन हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोपी क्लर्क सुनील कुमार को अदालत ने वीरवार को बरी कर दिया। क्लर्क ने मीटर लगाने के लिए नियमानुसार ली जाने वाली राशि की मांगी थी। यह राशि भी उसके पास से बरामद नहीं हुई। यह फैसला वीरवार को एएसजे राजकुमार की अदालत ने दिया।
अदालत के मुताबिक, बसंतपुर के एक व्यक्ति ने धर पर बिजली मीटर लगवाना था। इसके लिए बिजली कर्मचारी सुनील कुमार से संपर्क किया। इसके कहे अनुसार एक किलो वाट के बिजली कनेक्शन की फाइल बिजली विभाग जसिया कार्यालय में जमा कराई। इस फाइल की फीस भरकर रसीद भी ले ली। सुनील ने मीटर लगवाने के लिए 4000 रुपये की मांग की। उसने 12 सितंबर को फोन पर मीटर लगाने के लिए 3000 रुपये रिश्वत मांगी। इस बारे में शिकायत एंटी क्रप्शन ब्यूरो में दी। यहां से टीम ने कार्रवाई करते हुए सुनील को गिरफ्तार किया। इस संबंध में 13 सितंबर को केस दर्ज किया गया। अब अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया है।
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अधिवक्ता जगबीर दहिया ने बताया कि सुनील कुमार के पास से न तो रुपये मिले और न ही उसने रिश्वत की मांग की थी। उसने मीटर के लिए नियमानुसार रुपये ही मांगे थे। उसके खिलाफ झूठा केस बनाया गया। इसके चलते अदालत ने उसे बरी कर दिया।
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