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Rohtak News: क्लैट में झटका...फिर प्री-बोर्ड में गिरावट के बाद नहीं मानी हार, राहिनी ने पाए 96% अंक
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16-दुर्गा कॉलोनी स्थित मकान में पिता डाॅ. दीपक भारद्वाज, मां मेधा शर्मा, दादा सुशील कुमार शर्म
रोहतक। 12वीं की पढ़ाई के दौरान जब क्लैट (कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट) में कम स्कोर आने से प्री-बोर्ड एग्जाम का परिणाम गिरा तो दुर्गा कॉलोनी निवासी राहिनी भारद्वाज का हौसला टूटने लगा था लेकिन हार नहीं मानी। तीन माह की कड़ी मेहनत के बाद बुधवार को जारी सीबीएसई 12वीं के परिणाम में आर्ट्स संकाय से 500 में से 480 (96%) अंक प्राप्त कर अच्छा स्कोर किया है।
दुर्गा कॉलोनी निवासी राहिनी बताती हैं कि दिसंबर 2025 में क्लैट में अपेक्षा से कम अंक आए थे। इस दौरान मन स्थिर नहीं रहा और प्री-बोर्ड में भी परिणाम गिरने के बाद आत्मविश्वास डगमगाया था लेकिन झुकने के बजाय दिशा बदली। तीन माह में रोजाना 4 से 5 घंटे खुद घर पर पढ़ाई की।
आंबेडकर चौक स्थित मॉडल स्कूल की छात्रा राहिनी कहती हैं कि माता-पिता ने कभी पढ़ाई का दबाव नहीं बनाया बल्कि उनकी पसंद को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। 10वीं में उन्होंने 92.8 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। तब भी उन्होंने अपनी रुचि के अनुसार आर्ट्स चुना जिसे परिवार और स्कूल दोनों ने समर्थन दिया। उस दौरान लोगों ने 11वीं में आर्ट्स लेने पर भी सवाल उठाए थे।
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ज्यूडिशियल ऑफिसर बनना राहिनी का लक्ष्य
राहिनी ने बताया कि मेरा लक्ष्य ज्यूडिशियल ऑफिसर बनना है। असफलता अंत नहीं होती अगर मेहनत और सही मार्गदर्शन मिले तो वापसी संभव है। बच्चों को यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि समिति समय में तैयारी न करें। सत्र के प्रारंभ से पढ़ाई को जारी रखें।
क्लैट की निराशा से प्री बोर्ड में 80 प्रतिशत अंक आए थे लेकिन निरंतर पढ़ाई के बाद सुधार लिया है। उन्होंने बताया कि पिता डाॅ. दीपक भारद्वाज अधिवक्ता हैं जबकि मां मेधा शर्मा अंग्रेजी की शिक्षिका हैं।
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दुर्गा कॉलोनी निवासी राहिनी बताती हैं कि दिसंबर 2025 में क्लैट में अपेक्षा से कम अंक आए थे। इस दौरान मन स्थिर नहीं रहा और प्री-बोर्ड में भी परिणाम गिरने के बाद आत्मविश्वास डगमगाया था लेकिन झुकने के बजाय दिशा बदली। तीन माह में रोजाना 4 से 5 घंटे खुद घर पर पढ़ाई की।
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आंबेडकर चौक स्थित मॉडल स्कूल की छात्रा राहिनी कहती हैं कि माता-पिता ने कभी पढ़ाई का दबाव नहीं बनाया बल्कि उनकी पसंद को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। 10वीं में उन्होंने 92.8 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। तब भी उन्होंने अपनी रुचि के अनुसार आर्ट्स चुना जिसे परिवार और स्कूल दोनों ने समर्थन दिया। उस दौरान लोगों ने 11वीं में आर्ट्स लेने पर भी सवाल उठाए थे।
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ज्यूडिशियल ऑफिसर बनना राहिनी का लक्ष्य
राहिनी ने बताया कि मेरा लक्ष्य ज्यूडिशियल ऑफिसर बनना है। असफलता अंत नहीं होती अगर मेहनत और सही मार्गदर्शन मिले तो वापसी संभव है। बच्चों को यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि समिति समय में तैयारी न करें। सत्र के प्रारंभ से पढ़ाई को जारी रखें।
क्लैट की निराशा से प्री बोर्ड में 80 प्रतिशत अंक आए थे लेकिन निरंतर पढ़ाई के बाद सुधार लिया है। उन्होंने बताया कि पिता डाॅ. दीपक भारद्वाज अधिवक्ता हैं जबकि मां मेधा शर्मा अंग्रेजी की शिक्षिका हैं।