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हवाई अड्डों पर दावा थर्मल स्कैनर का, हकीकत यात्री के स्वयं के स्वास्थ्य घोषणा पत्र तक सिमटी

Fri, 07 Feb 2020 02:45 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 07 Feb 2020 02:45 AM IST
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Claims of Thermal Scanners at Airports, Reacted to Passenger's Own Health Declaration Form
डब्ल्यूएचओ के दिशा-निर्देशों पर विश्व भर में कोरोना वायरस के वुहान स्टैन को लेकर अलर्ट जारी है। हवाई अड्डों पर दावा किया जा रहा है कि थर्मल स्कैनर से पास होने के बाद ही हर यात्री को बाहर जाने दिया जा रहा है। जबकि हकीकत में देश के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैनात डॉक्टरों की टीम हर यात्री से उसका महज स्वास्थ्य घोषणा पत्र ले रही है। इसमें यदि कोई यात्री अपनी बीमारी के लक्षण छिपा लेता है तो प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग व एयरपोर्ट अथारिटी किसी प्रकार से कोरोना वायरस से ग्रस्त होने की पहचान नहीं कर सकते। इससे वायरस के देश में फैलने की आशंका बढ़ जाती है।
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यूएसए से लौटे पीजीआईएमएस के पूर्व निदेशक एवं मेडिसन विभागाध्यक्ष डॉ. नित्यानंद ने बताया कि कई देशों के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर काफी सख्ती है। यहां थर्मल स्कैनर में सेंसर बता देते हैं कि व्यक्ति को बुखार है या नहीं। इसके अलावा स्वास्थ्य घोषणा पत्र में ही यात्री की हिस्ट्री से आकलन किया जाता है कि उसे आईसोलेट करना है या नहीं। क्योंकि जुकाम, बुखार, खांसी व सांस लेने में समस्या होने के कई कारण हो सकते हैं। लेकिन यदि कोई चीन या अन्य प्रभावित देश से आ रहा है तो उसे चार सप्ताह के लिए आईसोलेट करना अनिवार्य हो जाता है। दिल्ली हवाई अड्डे पर आने वाले यात्रियों से पूछा जाता है कि क्या वह चीन से आए हैं या किसी चीनी के संपर्क में आए हैं। उन्हें कफ, खांसी, बुखार व सांस लेने में समस्या तो नहीं है। यदि कोई हां करता है तो उसे निगरानी में रख लिया जाता है। लेकिन समस्या से बचने के लिए कुछ लोग यहां झूठ बोल कर बाहर निकल जाते हैं। इससे वायरस के बाहर जाने का खतरा बढ़ जाता है। यहां जरूरी है कि बाहर से आने वाले जागरूक हों और स्वयं बताए कि वह प्रभावित क्षेत्र से आए हैं और स्वयं को चार सप्ताह के लिए आईसोलेट कर स्वयं को अपने परिवार को व समाज को कोरोना वायरस से प्रभावित होने से बचाएं।
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कोरोना वायरस को लेकर जल्द वैक्सीन आने की उम्मीद
डॉ. नित्यानंद ने बताया कि कोरोना वायरस अब अकेले चीन की समस्या नहीं है। यह विश्व भर की समस्या हो गई है। यह वायरस फिलहाल चौथी स्टेज में है। पहले यह आदमी में था। इसके बाद यह आदमी से चूहे, चमगादड़ या स्नैक में गया। जब इनके मांस को खाया गया तो यह वायरस वापस इंसान में आ गया और अब यह एक इंसान से दूसरे इंसान में जा रहा है। यह इस वायरस की चौथी स्टैज है। फिलहाल इसके चलते मृत्यु दर तीन से चार फीसदी है। डब्ल्यूएचओ ने इसे गंभीर श्रेणी में माना है, यदि 100 में से दस की मौत होती है तो अत्यधिक गंभीर की श्रेणी में स्थिति आ जाती है। इस वायरस से प्रभावित व्यक्ति में लक्षण आने में 14 दिन लग सकते हैं और प्रभावित व्यक्ति में यह चार सप्ताह तक रहता है। इस दौरान प्रभावित व्यक्ति के संपर्क में आने वाला हर व्यक्ति संक्रमित हो जाता है। इससे बच्चों व बुजुर्गों को अधिक बचाव की जरूरत है। उम्मीद है इससे बचाव की जल्द वैक्सीन बन जाएगी, एक्सपर्ट की टीम इसके लिए काम कर रही हैं।
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24 घंटे बाहर नहीं रह सकता वायरस
डॉ. नित्यानंद ने बताया कि कोरोना वायरस 24 घंटे बाहर नहीं रह सकता। यदि वह रहता है तो स्वयं मर जाएगा। इसके अलावा 28 दिन में यह प्रभावित व्यक्ति में भी स्वयं निष्क्रिय हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि इस वायरस को फैलने से रोका जाए, ताकि यह अधिक लोगों को अपना शिकार न बना सके। इसके लिए एन-95 एक एमएम से कम क्षमता वाला मास्क ही सही है। कई देशों में इस मास्क के साथ पर्सनल प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट किट की भी कमी हो गई है।
चीन से आने वाले लोगों की संख्या में हर दिन हो रहा इजाफा, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
एक को पीजीआईएमएस ने किया दाखिल, 10 अपने घर में आइसोलेट
चीन से आने वाले लोगों की संख्या में हर दिन इजाफा हो रहा है। वीरवार को चीन से आने वालों की संख्या 11 पहुंच गई है। इसमें एक व्यक्ति को पीजीआईएमएस के ब्लाक सी स्थित आइसोलेशन वार्ड में दाखिल कर उन पर निगरानी रखी जा रही है। जबकि 11 को स्वास्थ्य विभाग ने उनके ही घरों में आइसोलेट कर रखा है।
स्वास्थ्य विभाग ने वीरवार को चीन से आने वाले तीन नये लोगों की पुष्टि की है। इसमें बताया जा रहा है कि एक किलोई हलका, आसन गांव के आसपास व एक शहर के ओमैक्स सिटी से है। इन सभी को उनके घरों में आइसोलेट रहने को कहा गया है। वहीं गांव बोहर में भी बताया जा रहा है कि एक व्यक्ति केरल से आया है, जोकि चीन से आए व्यक्ति के संपर्क में रहा है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पा रही है। गौरतलब है कि अब तक जिले में 11 लोग चीन से आए हैं। इसमें अधिकांश चीन में एमबीबीएस कर चुके हैं या कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग को इनसे कोेई सहयोग नहीं मिल रहा है। कुछ लोग तो अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लेते हैं। ऐसे में जांच टीम प्रशासन से मिले घर के पते पर चीन से आने वाले लोगों की तलाश करती है। टीम की मानें तो कुछ लोग जांच में सहयोग नहीं करते, हैरानी की बात है कि एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बावजूद वह वायरस की गंभीरता को नहीं समझते।

जिला अस्पताल में डॉक्टरों के पास मास्क व पीपीई किट नहीं
रोहतक। जिला अस्पताल में सिविल सर्जन के निर्देशों के बावजूद डॉक्टर, नर्स व स्टाफ एन-94 मास्क व पीपीई किट का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। आशंकित मरीजों के आने की संभावनाओं को दर किनार कर यहां तैनात स्टाफ स्वयं की जान जोखिम में डाल रहा है। इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद्र का कहना है कि उन्होंने बचाव का सामान जारी कर दिया है, यदि कोई इश्यू नहीं कराता तो वह क्या कर सकते हैं। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने 1000 से अधिक एन-95 मास्क खरीद रखे हैं। यदि कोई डॉक्टर, स्टाफ व नर्स इनका प्रयोग नहीं कर रहे तो यह उनकी लापरवाही है। इसकी जांच की जाएगी।
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