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Rohtak News: सीजेआई बोले-रोहतक मेरा प्रेरणा क्षेत्र, समय मिला तो रोहतक फिर आएंगे
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10. रोहतक जिला बार में हुए अभिनंदन समारोह में सीजेआई सूर्यकांत को स्मृति चिह्न भेंट करते सेशन
रोहतक। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा है कि रोहतक मेरी प्रेरणा का स्रोत है। बार, शहर व एमडीयू को नमन करता हूं, क्योंकि कर्मक्षेत्र में कामयाब होने के लिए प्रेरणा क्षेत्र की अहम भूमिका होती है। प्रदेश सरकार व हाईकोर्ट भविष्य को ध्यान में रखकर ऐसा आधुनिक न्यायिक कॉम्प्लेक्स बनाएं जो युवा पीढ़ी की मूलभूत आवश्यकताएं पूरी हो सकें। वह शनिवार को जिला बार परिसर में आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
सीजेआई ने कहा कि रोहतक बार का न केवल हरियाणा बल्कि पूरे भारत में न्याय प्रणाली को मजबूत करने में अहम योगदान है। जिला बार एसोसिएशन का स्वतंत्रता संग्राम से संविधान निर्माण में भी योगदान रहा है। कई सदस्य विधानसभा में भी पहुंचे हैं। सूर्यकांत ने कहा कि वे सीजेआई की भूमिका में उस योगदान को स्मरण व सम्मान करने के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल देशों के न्यायिक अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल एक दिन पहले दिल्ली आया है। उनके साथ बैठक होने के कारण जल्दी जाना पड़ रहा है। समय मिला तो सीजेआई के तौर पर रोहतक फिर आएंगे।
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पांच साल में तीन हजार नए वकील जुड़े, 10 साल को ध्यान में रखकर बनाएं योजना
सीजेआई ने कहा कि पांच साल में तीन हजार नए वकील बार से जुड़े हैं जबकि चैंबरों की संख्या नहीं बढ़ी है। आगे 10 साल में संख्या कितनी बढ़ जाएगी, इसको ध्यान में रखकर आधुनिक व नए न्यायिक परिसर व कॉम्प्लेक्स बनाने पर काम करें।
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पूर्व चेयरमैन ने रखी पार्किंग व चैंबरों कमी की समस्या, सीजेआई बोले-मंच से कहूंगा तो गैर न्यायिक
समारोह में बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन डॉ. विजेंद्र अहलावत ने कहा कि सीजेआई का स्वागत करने के बार में वकीलों की चैंबर व पार्किंग की समस्या रखी। कहा कि सीजेआई ने ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जज रहते नए चैंबरों की आधारशिला रखी थी। अब तक चैंबरों की कमी बनी हुई है। वकीलों के लिए डीसी आवास में खाली पड़ी दो एकड़ जमीन दिलवाई जाए। यहीं पर हाईकोर्ट की बिल्डिंग कमेटी के अध्यक्ष भी हैं। संबोधन के दौरान सीजेआई ने कहा कि मंच से इस विषय पर बोलना मेरी न्यायिक भूमिका से बाहर है। अंदर का वकील अब भी जिंदा है। रोहतक बार के लिए पैरवी जरूर करूंगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि हाईकोर्ट की बिल्डिंग कमेटी व जिला बार मिलकर कोई समाधान निकालेंगी।
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मुख्यमंत्री नहीं आ सके, सहकारिता मंत्री को संबोधन का मौका नहीं मिला
जिला बार की तरफ से अभिनंदन समारोह में मुख्यमंत्री नायब सैनी को भी आमंत्रित किया गया था लेकिन वे नहीं आ सके। सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा समारोह में पहुंचे। हालांकि, सीजेआई को जल्दी लौटना था, इसलिए मंत्री व अन्य वक्ताओं को बोलने का मौका नहीं मिल सका।
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हाईकोर्ट के जज ने किया वकीलों को सम्मानित
सीजेआई करीब साढ़े चार बजे दिल्ली के लिए रवाना हो गए। उन्होंने सबसे बुजुर्ग वकील जगबीर नरवाल व केएल मल्होत्रा सहित अन्य वकीलों को सम्मानित करने की जिम्मेदारी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू को दी। मौके पर हाईकोर्ट के जज एचएस सेठी व जस्टिस विकास सूरी भी मौजूद रहे।
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सीजेआई ने किया दीप प्रज्वलित
सीजेआई सूर्यकांत ने मंच के सामने दीपक जलाकर अभिनंदन समारोह का शुभारंभ किया। मंच पर सेशन जज अजय तेवतिया, बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन विजेंद्र अहलावत, पूर्व बार प्रधान उमेश भारद्वाज व अन्य वकीलों ने स्मृति चिह्न भेंट कर सीजेआई का सम्मान किया। मंच पर बार प्रधान दीपक हुड्डा नजर नहीं आए। उनका कहना है कि पैर में चोट की वजह से दिक्कत आ गई, इसलिए घर चले गए। महासचिव राजकरण पंघाल व अन्य कार्यकारिणी सदस्य मौजूद रहे।
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जिला कोर्ट परिसर नहीं होना चाहिए शिफ्ट
बार के पूर्व प्रधान लोकेंद्र फौगाट उर्फ जोजो का कहना है कि शासन व प्रशासन के स्तर पर बार को शहर से बाहर शिफ्ट करने की चर्चाएं चल रही हैं लेकिन बार शिफ्ट नहीं होनी चाहिए। इसके लिए उनको चाहे कोई संघर्ष करना पड़ा, क्योंकि बार उनकी मातृभूमि है।
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सीजेआई ने विद्यार्थियों को दिया सफलता का मूल मंत्र, बोेल-संयम व दृढ़ता से आगे बढ़ें
रोहतक। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि नई पीढ़ी के पास वर्तमान में अवसर के साथ सुविधाएं भी हैं। इंटरनेट के चलते जानकारी भी बहुत है। दबाव भी है। अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए विद्यार्थियों को संयम व दृढ़ता से आगे बढ़ना चाहिए। स्पीड के लिए गहराई से समझौता न करें। अपनी महत्वाकांक्षाओं के लिए ईमानदारी न छोड़ें।
यह तीन चीजें सफलता के लिए जरूरी हैं। वह शनिवार को एमडीयू में स्वर्ण जयंती द्वार का उद्घाटन करने के बाद टैगोर सभागार में अपना संबोधन दे रहे थे।
सभागार में गुरुजनों का चरण स्पर्श करने के बाद मंच से सीजेआई ने कहा कि वर्ष 1970 के दशक में देश कुछ अलग था। हरियाणा में दो ही विवि थे। कुरुक्षेत्र व महर्षि दयानंद विवि। उस समय ज्यादा सुविधाएं नहीं थीं। 1970 के दशक में एमडीयू में आई पहली पीढ़ी दूर-दराज के गांवों से आई थी। यह पीढ़ी देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग विभागों के पड़े पदों तक पहुंची है।
बोले-ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण मुझे एमडीयू में कभी भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा
एमडीयू से पढ़े सीजेआई सूर्यकांत ने एमडीयू में बिताए गए दिनों को स्मरण करते हुए कहा कि विवि परिसर में उन्हें कभी ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। विश्वविद्यालय ने समावेशी वातावरण प्रदान किया जहां केवल प्रतिभा, परिश्रम और बौद्धिक क्षमता को महत्व दिया गया। कहा, यही मूल्य उनकी जीवन यात्रा और न्यायिक सोच की मजबूत नींव बने। सीजेआई ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परंपरा की सराहना करते हुए विद्यार्थियों से नैतिक मूल्यों, संविधान की भावना और न्याय के सिद्धांतों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।बोले-मैं खुद भी हिसार के ग्रामीण इलाके से आया हूं। एमडीयू ने मुझे काफी कुछ दिया है। वर्तमान में मुझे यह पहचान भी एमडीयू ने दिलाई है।
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सीजेआई ने कहा कि रोहतक बार का न केवल हरियाणा बल्कि पूरे भारत में न्याय प्रणाली को मजबूत करने में अहम योगदान है। जिला बार एसोसिएशन का स्वतंत्रता संग्राम से संविधान निर्माण में भी योगदान रहा है। कई सदस्य विधानसभा में भी पहुंचे हैं। सूर्यकांत ने कहा कि वे सीजेआई की भूमिका में उस योगदान को स्मरण व सम्मान करने के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल देशों के न्यायिक अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल एक दिन पहले दिल्ली आया है। उनके साथ बैठक होने के कारण जल्दी जाना पड़ रहा है। समय मिला तो सीजेआई के तौर पर रोहतक फिर आएंगे।
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पांच साल में तीन हजार नए वकील जुड़े, 10 साल को ध्यान में रखकर बनाएं योजना
सीजेआई ने कहा कि पांच साल में तीन हजार नए वकील बार से जुड़े हैं जबकि चैंबरों की संख्या नहीं बढ़ी है। आगे 10 साल में संख्या कितनी बढ़ जाएगी, इसको ध्यान में रखकर आधुनिक व नए न्यायिक परिसर व कॉम्प्लेक्स बनाने पर काम करें।
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पूर्व चेयरमैन ने रखी पार्किंग व चैंबरों कमी की समस्या, सीजेआई बोले-मंच से कहूंगा तो गैर न्यायिक
समारोह में बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन डॉ. विजेंद्र अहलावत ने कहा कि सीजेआई का स्वागत करने के बार में वकीलों की चैंबर व पार्किंग की समस्या रखी। कहा कि सीजेआई ने ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जज रहते नए चैंबरों की आधारशिला रखी थी। अब तक चैंबरों की कमी बनी हुई है। वकीलों के लिए डीसी आवास में खाली पड़ी दो एकड़ जमीन दिलवाई जाए। यहीं पर हाईकोर्ट की बिल्डिंग कमेटी के अध्यक्ष भी हैं। संबोधन के दौरान सीजेआई ने कहा कि मंच से इस विषय पर बोलना मेरी न्यायिक भूमिका से बाहर है। अंदर का वकील अब भी जिंदा है। रोहतक बार के लिए पैरवी जरूर करूंगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि हाईकोर्ट की बिल्डिंग कमेटी व जिला बार मिलकर कोई समाधान निकालेंगी।
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मुख्यमंत्री नहीं आ सके, सहकारिता मंत्री को संबोधन का मौका नहीं मिला
जिला बार की तरफ से अभिनंदन समारोह में मुख्यमंत्री नायब सैनी को भी आमंत्रित किया गया था लेकिन वे नहीं आ सके। सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा समारोह में पहुंचे। हालांकि, सीजेआई को जल्दी लौटना था, इसलिए मंत्री व अन्य वक्ताओं को बोलने का मौका नहीं मिल सका।
हाईकोर्ट के जज ने किया वकीलों को सम्मानित
सीजेआई करीब साढ़े चार बजे दिल्ली के लिए रवाना हो गए। उन्होंने सबसे बुजुर्ग वकील जगबीर नरवाल व केएल मल्होत्रा सहित अन्य वकीलों को सम्मानित करने की जिम्मेदारी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू को दी। मौके पर हाईकोर्ट के जज एचएस सेठी व जस्टिस विकास सूरी भी मौजूद रहे।
सीजेआई ने किया दीप प्रज्वलित
सीजेआई सूर्यकांत ने मंच के सामने दीपक जलाकर अभिनंदन समारोह का शुभारंभ किया। मंच पर सेशन जज अजय तेवतिया, बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन विजेंद्र अहलावत, पूर्व बार प्रधान उमेश भारद्वाज व अन्य वकीलों ने स्मृति चिह्न भेंट कर सीजेआई का सम्मान किया। मंच पर बार प्रधान दीपक हुड्डा नजर नहीं आए। उनका कहना है कि पैर में चोट की वजह से दिक्कत आ गई, इसलिए घर चले गए। महासचिव राजकरण पंघाल व अन्य कार्यकारिणी सदस्य मौजूद रहे।
जिला कोर्ट परिसर नहीं होना चाहिए शिफ्ट
बार के पूर्व प्रधान लोकेंद्र फौगाट उर्फ जोजो का कहना है कि शासन व प्रशासन के स्तर पर बार को शहर से बाहर शिफ्ट करने की चर्चाएं चल रही हैं लेकिन बार शिफ्ट नहीं होनी चाहिए। इसके लिए उनको चाहे कोई संघर्ष करना पड़ा, क्योंकि बार उनकी मातृभूमि है।
सीजेआई ने विद्यार्थियों को दिया सफलता का मूल मंत्र, बोेल-संयम व दृढ़ता से आगे बढ़ें
रोहतक। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि नई पीढ़ी के पास वर्तमान में अवसर के साथ सुविधाएं भी हैं। इंटरनेट के चलते जानकारी भी बहुत है। दबाव भी है। अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए विद्यार्थियों को संयम व दृढ़ता से आगे बढ़ना चाहिए। स्पीड के लिए गहराई से समझौता न करें। अपनी महत्वाकांक्षाओं के लिए ईमानदारी न छोड़ें।
यह तीन चीजें सफलता के लिए जरूरी हैं। वह शनिवार को एमडीयू में स्वर्ण जयंती द्वार का उद्घाटन करने के बाद टैगोर सभागार में अपना संबोधन दे रहे थे।
सभागार में गुरुजनों का चरण स्पर्श करने के बाद मंच से सीजेआई ने कहा कि वर्ष 1970 के दशक में देश कुछ अलग था। हरियाणा में दो ही विवि थे। कुरुक्षेत्र व महर्षि दयानंद विवि। उस समय ज्यादा सुविधाएं नहीं थीं। 1970 के दशक में एमडीयू में आई पहली पीढ़ी दूर-दराज के गांवों से आई थी। यह पीढ़ी देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग विभागों के पड़े पदों तक पहुंची है।
बोले-ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण मुझे एमडीयू में कभी भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा
एमडीयू से पढ़े सीजेआई सूर्यकांत ने एमडीयू में बिताए गए दिनों को स्मरण करते हुए कहा कि विवि परिसर में उन्हें कभी ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। विश्वविद्यालय ने समावेशी वातावरण प्रदान किया जहां केवल प्रतिभा, परिश्रम और बौद्धिक क्षमता को महत्व दिया गया। कहा, यही मूल्य उनकी जीवन यात्रा और न्यायिक सोच की मजबूत नींव बने। सीजेआई ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परंपरा की सराहना करते हुए विद्यार्थियों से नैतिक मूल्यों, संविधान की भावना और न्याय के सिद्धांतों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।बोले-मैं खुद भी हिसार के ग्रामीण इलाके से आया हूं। एमडीयू ने मुझे काफी कुछ दिया है। वर्तमान में मुझे यह पहचान भी एमडीयू ने दिलाई है।