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Rohtak News: 90 के दशक में उत्तर भारत में शतरंज चुनना था बड़ी चुनौती
Mon, 20 Jul 2026 05:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Mon, 20 Jul 2026 05:10 AM IST
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14: शतरंज के ग्रैंड मास्टर हिमांशु शर्मा । संवाद
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प्रिंस राजपूत
रोहतक। हरियाणा के पहले शतरंज ग्रैंड मास्टर हिमांशु शर्मा का कहना है कि 1990 के दशक में उत्तर भारत के खिलाड़ियों के लिए शतरंज को कॅरिअर के रूप में चुनना आसान नहीं था। उस समय हरियाणा में कुश्ती और कबड्डी का दबदबा था जबकि शतरंज को गंभीर खेल के रूप में ज्यादा महत्व नहीं मिलता था। बावजूद इसके उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना। आज उत्तर भारत में शतरंज को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस के अवसर पर हिमांशु शर्मा ने बताया कि उन्होंने करीब 13 वर्ष की उम्र में हरियाणा सीनियर स्टेट चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। शुरुआती दौर में जब वे राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दक्षिण भारत जाते थे। तब उत्तर भारत के खिलाड़ियों को मजबूत प्रतिद्वंद्वी नहीं माना जाता था। इसी सोच ने उन्हें उत्तर भारत की शतरंज में पहचान मजबूत करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बताया कि शतरंज केवल खेल नहीं, बल्कि निर्णय क्षमता, एकाग्रता और रणनीतिक सोच विकसित करने का माध्यम है। यह खिलाड़ी को कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर सही फैसला लेना सिखाता है।
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हिमांशु शर्मा ने बताया कि उन्होंने आयकर विभाग में इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़ पूरी तरह शतरंज के प्रशिक्षण को अपना मिशन बना लिया। अब तक वे 300 से अधिक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे चुके हैं। उनकी अकादमी में हरियाणा के अलावा राजस्थान, तेलंगाना, केरल समेत कई राज्यों के खिलाड़ी प्रशिक्षण लेने आते हैं। वे भारतीय जूनियर शतरंज टीम के कोच के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से वे हरियाणा के नंबर-1 खिलाड़ी बने हुए हैं और उनका यह रिकॉर्ड अब तक कायम है। उनका मानना है कि यदि खिलाड़ियों को सही मार्गदर्शन और बेहतर सुविधाएं मिलें तो उत्तर भारत से भी विश्व स्तर के कई शतरंज खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।
ग्रैंड मास्टर बनने के बाद सरकार ने किया था 5 लाख नकद पुरस्कार देने का वादा
हिमांशु शर्मा ने बताया कि वर्ष 2017 में हरियाणा के पहले शतरंज ग्रैंड मास्टर बनने पर हरियाणा सरकार ने उन्हें पांच लाख रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की थी। उनका कहना है कि घोषणा के बावजूद आज तक उन्हें यह राशि नहीं मिली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार अपने वादे को पूरा करेगी। शतरंज जैसे खेलों को बढ़ावा देने के लिए खिलाड़ियों को समय पर प्रोत्साहन और सम्मान प्रदान करेगी।
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रोहतक। हरियाणा के पहले शतरंज ग्रैंड मास्टर हिमांशु शर्मा का कहना है कि 1990 के दशक में उत्तर भारत के खिलाड़ियों के लिए शतरंज को कॅरिअर के रूप में चुनना आसान नहीं था। उस समय हरियाणा में कुश्ती और कबड्डी का दबदबा था जबकि शतरंज को गंभीर खेल के रूप में ज्यादा महत्व नहीं मिलता था। बावजूद इसके उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना। आज उत्तर भारत में शतरंज को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस के अवसर पर हिमांशु शर्मा ने बताया कि उन्होंने करीब 13 वर्ष की उम्र में हरियाणा सीनियर स्टेट चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। शुरुआती दौर में जब वे राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दक्षिण भारत जाते थे। तब उत्तर भारत के खिलाड़ियों को मजबूत प्रतिद्वंद्वी नहीं माना जाता था। इसी सोच ने उन्हें उत्तर भारत की शतरंज में पहचान मजबूत करने के लिए प्रेरित किया।
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उन्होंने बताया कि शतरंज केवल खेल नहीं, बल्कि निर्णय क्षमता, एकाग्रता और रणनीतिक सोच विकसित करने का माध्यम है। यह खिलाड़ी को कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर सही फैसला लेना सिखाता है।
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हिमांशु शर्मा ने बताया कि उन्होंने आयकर विभाग में इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़ पूरी तरह शतरंज के प्रशिक्षण को अपना मिशन बना लिया। अब तक वे 300 से अधिक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे चुके हैं। उनकी अकादमी में हरियाणा के अलावा राजस्थान, तेलंगाना, केरल समेत कई राज्यों के खिलाड़ी प्रशिक्षण लेने आते हैं। वे भारतीय जूनियर शतरंज टीम के कोच के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से वे हरियाणा के नंबर-1 खिलाड़ी बने हुए हैं और उनका यह रिकॉर्ड अब तक कायम है। उनका मानना है कि यदि खिलाड़ियों को सही मार्गदर्शन और बेहतर सुविधाएं मिलें तो उत्तर भारत से भी विश्व स्तर के कई शतरंज खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।
ग्रैंड मास्टर बनने के बाद सरकार ने किया था 5 लाख नकद पुरस्कार देने का वादा
हिमांशु शर्मा ने बताया कि वर्ष 2017 में हरियाणा के पहले शतरंज ग्रैंड मास्टर बनने पर हरियाणा सरकार ने उन्हें पांच लाख रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की थी। उनका कहना है कि घोषणा के बावजूद आज तक उन्हें यह राशि नहीं मिली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार अपने वादे को पूरा करेगी। शतरंज जैसे खेलों को बढ़ावा देने के लिए खिलाड़ियों को समय पर प्रोत्साहन और सम्मान प्रदान करेगी।