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Rohtak News: लंबे समय तक स्क्रीन का यूज करने से मायोपिया का शिकार हो रहे बच्चे

Thu, 21 Nov 2024 12:41 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 21 Nov 2024 12:41 AM IST
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Children becoming victims of myopia due to using screens for long periods of time
20सीटीके31..पीजीआई के  चौधरी रणबीर सिंह ओपीडी में बुधवार को आरआईओ की ओर से मायोपिया को लेकर लगा
रोहतक। मायोपिया आंखों की एक आम समस्या है। इसमें व्यक्ति को दूर की वस्तुओं को देखने में परेशानी होती है, लेकिन निकट की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख सकता है। मायोपिया में दूर की चीजें धुंधली दिखाई देती है। आंखों की ये समस्या बच्चों में ज्यादा देखी जाती है, कुछ मामलों में ये बीमारी जेनेटिक कारणों से भी हो सकती है।
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मायोपिया में दूर की चीजें साफ नहीं दिखती हैं। ऐसे में डॉक्टर नजर का चश्मा लगाने की सलाह देते हैं। मायोपिया के मामले हर साल बढ़ रहे हैं, लेकिन इस बीमारी को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी है। लोगों को जागरूक करने के लिए पीजीआई के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान की ओर से जो अभियान चलाया गया था। यह बातें पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की कुलपति डाॅ. अनीता सक्सेना कहीं। वे बुधवार को चौधरी रणबीर सिंह ओपीडी में आरआईओ की ओर से मायोपिया को लेकर लगाई गई पोस्टर प्रदर्शनी में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंची थीं।
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डाॅ. अनीता सक्सेना ने पोस्टर प्रदर्शनी के विजेताओं को पुरस्कृत करते हुए कहा कि उन्होंने बहुत अच्छे पोस्टर बनाए हैं। इनको पढ़कर आम जनता मायोपिया के प्रति काफी जागरूक होगी। इस दौरान डाॅ. निभा पाशी, आयोजक डाॅ. उर्मिल चावला ने अपने विचार रखे।
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ये रहे मौजूद

अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज फरीदाबाद के निदेशक डॉ. बीएम वशिष्ठ, डॉ मनीषा राठी, डॉ. मनीषा नाडा, डॉ. अशोक राठी, डॉ. सुमित सचदेवा, डॉ. जितेंद्र फोगाट और डॉ. ज्योति उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विभाग के डॉ. स्वीटी, डॉ दीपशिखा, डॉ. मेघा व डॉ. संस्कृति ने भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।




आंखों की बीमारियां हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही है। बच्चों में भी ये खतरा बढ़ता जा रहा है। आपने भी अपने आस-पास कई बच्चों की आंखों पर नजर का चश्मा लगा देखा होगा। आंखों की रोशनी कमजोर होने की दिक्कत क्वालिटी ऑफ लाइफ को भी प्रभावित करती है।

- डाॅ. आरएस चौहान, विभागाध्यक्ष, आरआईओ






अध्ययन में पाया जा रहा है कि खराब लाइफस्टाइल और लंबे समय तक स्क्रीन का यूज करने से बच्चे मायोपिया के शिकार हो रहे हैं। माता-पिता को अपने बच्चों की आंखों के स्वास्थ्य के बारे में सतर्क रहना चाहिए। मायोपिया से बचाव के लिए नियमित जांच, स्क्रीन एक्सपोजर को सीमित करना जरूरी है। अगर लंबे समय तक बच्चे स्क्रीन का यूज करेंगे तो मायोपिया होने का रिस्क बढ़ जाता है, ऐसे में बच्चों को फोन का यूज कम करने दें और उनको बिना वजह फोन या लैपटॉप न दें।

-डाॅ. एचके अग्रवाल, कुलसचिव, यूएचएस
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