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हर सप्ताह पकड़े जाते हैं बाल मजदूर, फिर भी कंट्रोल नहीं

Sun, 12 Jun 2016 01:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sun, 12 Jun 2016 01:42 AM IST
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Child laborers are caught every week , but not control
child labour - फोटो : amar ujala
पेट की आग ने दो मासूम भाइयों को बाल मजदूर बना दिया तो एक भाई-बहन को भिखारी। पिता की मौत और मां से बिछड़ने के बाद दानों भाई गोहाना अड्डा स्थित एक ढाबे पर जूठे बर्तन साफ कर रहे हैं। वहीं, भाई-बहन अशोका चौक और पुराना बस स्टैंड के समीप करीब एक साल से भीख मांग रहे हैं। ऑपरेशन मुस्कान के तहत ये बच्चे अभी रेस्क्यू नहीं किए गए हैं। पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी इनकी ओर देखते तो हैं, लेकिन कुछ करना जरूरी नहीं समझते। शहर में ऐसे दो-चार नहीं, बल्कि कई मासूम गुजर-बसर करने के लिए या तो मजदूरी कर रहे हैं या चौक-चौराहों पर भीख मांग रहे हैं। रविवार को विश्व बालश्रम निषेध दिवस मनाया जाएगा, लेकिन यह मासूम दो जून की रोटी के लिए श्रम करने को मजबूर होंगे। 
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ऑपरेशन मुस्कान के तहत पुलिस और बाल संरक्षण की टीमों ने अभियान चलाया तो पिछले साल 193 मासूमों को बचाकर उन्हें अपनों से मिलवाया गया। अब भी ऑपरेशन स्माइल अभियान जारी है, जिसके तहत हर सप्ताह तीन से चार बाल मजदूर पकड़े जाते हैं। इसके बावजूद बाल श्रम पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। खासतौर से शहर के बाहरी इलाकों के ढाबों, फास्ट फूड की रेहड़ियों और चाय की दुकानों पर बाल श्रमिक काम करते नजर आ ही जाते हैं। वह भी तब, जब एंटी ह्यूमन ट्रैफिक टीम की ओर से बाल मजदूरों की धड़-पकड़ की जा रही है और हर चौक-चौराहों पर पुलिस का पहरा रहता है।
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बाल मजदूरों के लिए चल रही कल्याणकारी योजनाएं
- अनाथ बच्चों को तीन साल तक हर माह दो हजार रुपये राशि दी जाती है। इसमें वे बच्चे भी शामिल हैं, जिनके अभिभावक सात साल से ज्यादा की सजा काट रहे हैं।
- जो बच्चे पढ़ने के इच्छुक होते हैं, उन्हें निशुल्क शिक्षा मुहैया कराई जाती है। पिछले साल 24 बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाया गया।
- जरूरतमंद परिवारों को बच्चे गोद दिलवाए जाते हैं। राई और पंचकुला में इसका विशेष सेंटर है।
- छोटी उम्र में जो बच्चे जुर्म से जुड़ जाते हैं, उनकी काउंसिलिंग करके मुख्यधारा से जोड़ा जाता है।
- पोस्को एक्ट के तहत 18 साल तक के बच्चों को निशुल्क कानूनी सहायता और वकील की सुविधा दी जाती है।
 
जल्द ही खुलेगा ओपन शेल्टर होम
ऑपरेशन स्माइल और एंटी ह्यूमन ट्रैफिक टीम की ओर से बाल मजदूरी रोकने के लिए हर सप्ताह रेस्क्यू अभियान चलाया जाता है। इसके तहत करीब चार बाल श्रमिकों को पकड़कर उनकी काउंसिलिंग की जाती है। जो बच्चे इच्छुक होते हैं, उन्हें पढ़ने के लिए स्कूल भेजा जाता है। पिछले कुछ वर्षों में शहर में बाल मजदूर कम हुए हैं। बच्चे समाज की मुख्यधारा से जुड़ें, इसके लिए जल्द ही रोहतक में ओपन शेल्टर होम खुलने जा रहा है। इसमें बच्चों को एक छत के नीचे शिक्षा के साथ भोजन की सुविधा दी जाएगी। 
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- पूनम, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, रोहतक
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