{"_id":"627962af0f97536d40512692","slug":"changing-weather-and-carelessness-in-eating-habits-is-making-sick-rohtakcity-news-rtk646173248","type":"story","status":"publish","title_hn":"बदलते मौसम और खान-पान में लापरवाही बना रही बीमार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बदलते मौसम और खान-पान में लापरवाही बना रही बीमार
विज्ञापन
सामान्य अस्पताल में बीमार बच्चों को दिखाने के लिए पहुंचे परिजन आपनी बारी के इंतेजार में फर्श पर ब
- फोटो : RohtakCity
झुलसाती गर्मी में खानपान में लापरवाही हमें बीमार बना रही है। पसीने में फ्रिज का पानी या शीतल पेय पीने से गला खराब हो रहा है। फसल कटाई के चलते हवा में घुली तूड़ी व धूल एलर्जी के मरीजों खासकर दमा व अस्थमा के रोगियों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। इस कारण अस्पतालों में खांसी, जुकाम के केस बढ़ गए हैं। बर्फ खाकर बच्चे भी सर्द-गर्म का शिकार हो रहे हैं। इन दिनों फैले वायरल से बुखार के मामले भी सामने आ रहे हैं। वायरल व कोविड-19 के लक्षण मिलते-जुलते हैं। ऐसे करीब 70 प्रतिशत मामले हैं। शेष 30 प्रतिशत में डायरिया, हीट स्ट्रोक व अन्य केस शामिल हैं। इन मरीजों से अस्पतालों की ओपीडी भरी हुई है।
सामान्य अस्पताल की ओपीडी इन दिनों मरीजों से भरी पड़ी है। यहां पिछले 15 दिन में मरीज डेढ़ गुना बढ़ गए हैं। गर्मी अधिक होने के कारण खानपान में बरती जा रही लापरवाही इसकी वजह बताई जा रही है । गर्मी ज्यादा होने के कारण कोल्ड ड्रिंक या ठंडा पानी पीना, पसीने के बीच पानी पीना, फ्रिज का ठंडा पानी या उसमें रखा ठंडा खाना खाने से गला खराब हो रहा है। इसकी वजह से सर्द-गर्म के कारम खांसी, जुकाम, गले में दर्द या खारिश होने की शिकायत हो रही है। अस्पताल के मेडिसन विभाग के एक चिकित्सक की ओपीडी की बात करें तो उनके पास 150 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। पहले यह संख्या करीब सौ थी। इनमें से 70 प्रतिशत खांसी, जुकाम, गले में दिक्कत के मरीज आ रहे हैं। शेष 30 प्रतिशत को पेट दर्द, डायरिया, हीट स्ट्रोक व अन्य की समस्या है।
बच्चों के चिकित्सकों की एक ओपीडी पर नजर डालें तो यहां इन दिनों करीब 200 से ज्यादा बीमार पहुंच रहे हैं। यहां करीब एक पखवाड़े पहले 150 मरीज आ रहे थे। इनमें निमोनिया, खांसी, जुकाम, आंखों में जलन के अलावा एलर्जी के केस शामिल थे।
विज्ञापन
सावधानी के साथ स्वच्छता पर ध्यान देने की जरूरत
ओपीडी में इन दिनों 200 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें से 70 से 75 प्रतिशत खांसी, जुकाम, बुखार, गले में तकलीफ, निमोनिया, वायरल के केस होते हैं। शेष में पीलिया, डायरिया, एलर्जी के केस होते हैं। पिछले कुछ दिनों में मरीजों की संख्या बढ़ी है। यह मौसम बीमार करने वाला है। इसमें सावधानी के साथ स्वच्छता पर ध्यान देने की जरूरत है। -डॉ. जेपी चौहान, शिशु रोग विशेषज्ञ, सिविल अस्पताल।
इस समय तापमान 40 डिग्री सेल्सिय से अधिक है। इस मौसम में बार-बार पानी पीने की जरूरत पड़ती है। इस पर भी प्यास नहीं बुझती है। ऐसे में अक्सर लोग ठंडा पानी या शीतल पेय पीते हैं। फ्रिज का ठंडा पानी या खाना खाकर हम खुद को बीमार कर लेते हैं। गर्मी में ज्यादा ठंडे या पीसने में पानी पीने से बचना चाहिए। इलाके अलावा मौसम भी बीमारियों की वजह है। फसल कटाई के बाद उड़ने वाली तूड़ी व धूल भरी आंधी दमा व अस्थमा मरीजों की परेशानी बढ़ा देती है। ऐसे मौसम में बाहर निकलने से बचना चाहिए। बाहर निकलने पर मास्क जरूर लगाएं। काम करते समय पसीने में पानी या ठंडा पीने से परहेज करें। एलर्जी के कारण आंखों व त्वचा संबंधी दिक्कतें भी सामने आती हैं। 40 से ऊपर बना तापमान व गर्म हवाएं हीट स्ट्रोक की भी वजह बनी हुई है। इन दिनों चल रहे वायरल और कोविड-19 के लक्षण एक समान हैं। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है। मरीज अपनी जांच कराएं और दवा लें। -डॉ. शिव कुमार, पूर्व सीएमओ।
बेटी नायरा बीमार है। उसे बुखार है। इलाज के लिए सुबह ही लेकर अस्पताल आ गया था, मगर पौने 12 बज चुके हैं पर अभी तक डॉक्टर ही नहीं आए हैं। कमरे में पूछा तो कहा गया कि पांच मिनट में आ रहे हैं। उन्हीं का इंतजार कर रहा हूं। संजय, बोहर।
बेटे रितिक की तबीयत खराब है। उसे खांसी आ रही है। इलाज के लिए सिविल अस्पताल में सुबह साढ़े दस बजे आया गया था। दोपहर के 12 बज रहे हैं, मगर अभी तक डॉक्टर ही नहीं है। डॉक्टर के आने पर ही बच्चे को इलाज मिलेगा। -दीपक, सूर्या कॉलोनी।
बेटा हार्दिक बीमार है। उसे खांसी, जुकाम है। आंखों में भी दिक्कत है। यहां मरीजों की भीड़ लगी है। डॉक्टर कमरे में नहीं है। लोग लाइन में खड़े होकर थक गए तो फर्श पर बैठ गए। अब डॉक्टर आएगा तभी राहत मिलेगी। -सूरज, गढ़ी मोहल्ला।
मौसम के कारण अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। खांसी, जुकाम, वायरल केस ज्यादा हैं। मरीजों की भीड़ के कारण थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। काम का अधिक दबाव होने के कारण चिकित्सकों के पास चाय पीने तक का समय नहीं है। एक चिकित्सक दोपहर साढ़े बारह बजे तक मौजूद थे। दूसरे को कोर्ट केस के कारण कुछ समय के लिए जाना पड़ा। मरीजों की सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है। इसके लिए ओपीडी में दूसरे चिकित्सकों की व्यवस्था की गई है। -डॉ. रमेशचंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, सामान्य अस्पताल।
विज्ञापन
सामान्य अस्पताल की ओपीडी इन दिनों मरीजों से भरी पड़ी है। यहां पिछले 15 दिन में मरीज डेढ़ गुना बढ़ गए हैं। गर्मी अधिक होने के कारण खानपान में बरती जा रही लापरवाही इसकी वजह बताई जा रही है । गर्मी ज्यादा होने के कारण कोल्ड ड्रिंक या ठंडा पानी पीना, पसीने के बीच पानी पीना, फ्रिज का ठंडा पानी या उसमें रखा ठंडा खाना खाने से गला खराब हो रहा है। इसकी वजह से सर्द-गर्म के कारम खांसी, जुकाम, गले में दर्द या खारिश होने की शिकायत हो रही है। अस्पताल के मेडिसन विभाग के एक चिकित्सक की ओपीडी की बात करें तो उनके पास 150 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। पहले यह संख्या करीब सौ थी। इनमें से 70 प्रतिशत खांसी, जुकाम, गले में दिक्कत के मरीज आ रहे हैं। शेष 30 प्रतिशत को पेट दर्द, डायरिया, हीट स्ट्रोक व अन्य की समस्या है।
विज्ञापन
बच्चों के चिकित्सकों की एक ओपीडी पर नजर डालें तो यहां इन दिनों करीब 200 से ज्यादा बीमार पहुंच रहे हैं। यहां करीब एक पखवाड़े पहले 150 मरीज आ रहे थे। इनमें निमोनिया, खांसी, जुकाम, आंखों में जलन के अलावा एलर्जी के केस शामिल थे।
विज्ञापन
सावधानी के साथ स्वच्छता पर ध्यान देने की जरूरत
ओपीडी में इन दिनों 200 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें से 70 से 75 प्रतिशत खांसी, जुकाम, बुखार, गले में तकलीफ, निमोनिया, वायरल के केस होते हैं। शेष में पीलिया, डायरिया, एलर्जी के केस होते हैं। पिछले कुछ दिनों में मरीजों की संख्या बढ़ी है। यह मौसम बीमार करने वाला है। इसमें सावधानी के साथ स्वच्छता पर ध्यान देने की जरूरत है। -डॉ. जेपी चौहान, शिशु रोग विशेषज्ञ, सिविल अस्पताल।
इस समय तापमान 40 डिग्री सेल्सिय से अधिक है। इस मौसम में बार-बार पानी पीने की जरूरत पड़ती है। इस पर भी प्यास नहीं बुझती है। ऐसे में अक्सर लोग ठंडा पानी या शीतल पेय पीते हैं। फ्रिज का ठंडा पानी या खाना खाकर हम खुद को बीमार कर लेते हैं। गर्मी में ज्यादा ठंडे या पीसने में पानी पीने से बचना चाहिए। इलाके अलावा मौसम भी बीमारियों की वजह है। फसल कटाई के बाद उड़ने वाली तूड़ी व धूल भरी आंधी दमा व अस्थमा मरीजों की परेशानी बढ़ा देती है। ऐसे मौसम में बाहर निकलने से बचना चाहिए। बाहर निकलने पर मास्क जरूर लगाएं। काम करते समय पसीने में पानी या ठंडा पीने से परहेज करें। एलर्जी के कारण आंखों व त्वचा संबंधी दिक्कतें भी सामने आती हैं। 40 से ऊपर बना तापमान व गर्म हवाएं हीट स्ट्रोक की भी वजह बनी हुई है। इन दिनों चल रहे वायरल और कोविड-19 के लक्षण एक समान हैं। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है। मरीज अपनी जांच कराएं और दवा लें। -डॉ. शिव कुमार, पूर्व सीएमओ।
बेटी नायरा बीमार है। उसे बुखार है। इलाज के लिए सुबह ही लेकर अस्पताल आ गया था, मगर पौने 12 बज चुके हैं पर अभी तक डॉक्टर ही नहीं आए हैं। कमरे में पूछा तो कहा गया कि पांच मिनट में आ रहे हैं। उन्हीं का इंतजार कर रहा हूं। संजय, बोहर।
बेटे रितिक की तबीयत खराब है। उसे खांसी आ रही है। इलाज के लिए सिविल अस्पताल में सुबह साढ़े दस बजे आया गया था। दोपहर के 12 बज रहे हैं, मगर अभी तक डॉक्टर ही नहीं है। डॉक्टर के आने पर ही बच्चे को इलाज मिलेगा। -दीपक, सूर्या कॉलोनी।
बेटा हार्दिक बीमार है। उसे खांसी, जुकाम है। आंखों में भी दिक्कत है। यहां मरीजों की भीड़ लगी है। डॉक्टर कमरे में नहीं है। लोग लाइन में खड़े होकर थक गए तो फर्श पर बैठ गए। अब डॉक्टर आएगा तभी राहत मिलेगी। -सूरज, गढ़ी मोहल्ला।
मौसम के कारण अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। खांसी, जुकाम, वायरल केस ज्यादा हैं। मरीजों की भीड़ के कारण थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। काम का अधिक दबाव होने के कारण चिकित्सकों के पास चाय पीने तक का समय नहीं है। एक चिकित्सक दोपहर साढ़े बारह बजे तक मौजूद थे। दूसरे को कोर्ट केस के कारण कुछ समय के लिए जाना पड़ा। मरीजों की सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है। इसके लिए ओपीडी में दूसरे चिकित्सकों की व्यवस्था की गई है। -डॉ. रमेशचंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, सामान्य अस्पताल।