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Rohtak News: बदलती जीवनशैली और प्रतियोगिता का दबाव युवाओं में तनाव का प्रमुख कारण
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फोटो 26संवाद कार्यक्रम में भाग लेते युवा।संवाद
- फोटो : 1
निजामपुर। युवाओं में बढ़ते तनाव और मानसिक स्वास्थ्य विषय पर सोमवार को निजामपुर में संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कॉलेज के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और चिकित्सा विशेषज्ञ ने भाग लेकर अपने विचार साझा किए। बदलती जीवनशैली, प्रतियोगिता का दबाव और सोशल मीडिया के प्रभाव को युवाओं में मानसिक तनाव का प्रमुख कारण बताया गया।
वक्ताओं ने कहा कि आज का युवा जहां एक ओर अपने कॅरिअर को लेकर सजग है, वहीं दूसरी ओर वह लगातार मानसिक दबाव से भी जूझ रहा है। इस संवाद के माध्यम से युवाओं को अपनी समस्याएं खुलकर रखने का मंच मिला।
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सोशल मीडिया तनाव को बढ़ा रहा है। दूसरों की सफलता देखकर खुद को कमतर समझने लगते हैं जिससे तनाव बढ़ता है। पढ़ाई और कॅरिअर को लेकर लगातार प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। कई बार उम्मीदों का बोझ इतना बढ़ जाता है कि तनाव महसूस होने लगता है। -कुलदीप, गांव नारेहड़ी।
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सोशल मीडिया का बहुत असर होता है। नींद पूरी न होने से चिड़चिड़ापन और थकान बढ़ती है। तनाव को कम करने के लिए दोस्तों से बात करता हूं, म्यूजिक सुनता हूं या थोड़ा ब्रेक लेता हूं। -नेकीराम, छात्र गांव रामबास।
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तनाव से पढ़ाई और दिनचर्या पर असर पड़ता है। ध्यान भटकता है और पढ़ाई में मन नहीं लगता जिससे प्रदर्शन प्रभावित होता है। परिवार और समाज की अपेक्षाएं कई बार लड़कियों पर अतिरिक्त दबाव बना देती हैं जिससे मानसिक थकान बढ़ती है। -मुस्कान, छात्रा, गांव कारोली।
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हर क्षेत्र की परीक्षा में प्रतियोगिता बहुत ज्यादा है जिससे हर समय बेहतर करने का दबाव बना रहता है। हम अपने मन की बात किसी से साझा नहीं करते जिससे समस्या और बढ़ जाती है। हमें मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बात करनी चाहिए। -रिया, छात्रा, नारनौल।
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युवाओं में तनाव बढ़ना एक गंभीर संकेत है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और समय-समय पर अपने मन की बात साझा करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। -डॉ. अमित कुमार सिंह, वरिष्ठ चिकित्सक।
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वक्ताओं ने कहा कि आज का युवा जहां एक ओर अपने कॅरिअर को लेकर सजग है, वहीं दूसरी ओर वह लगातार मानसिक दबाव से भी जूझ रहा है। इस संवाद के माध्यम से युवाओं को अपनी समस्याएं खुलकर रखने का मंच मिला।
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सोशल मीडिया तनाव को बढ़ा रहा है। दूसरों की सफलता देखकर खुद को कमतर समझने लगते हैं जिससे तनाव बढ़ता है। पढ़ाई और कॅरिअर को लेकर लगातार प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। कई बार उम्मीदों का बोझ इतना बढ़ जाता है कि तनाव महसूस होने लगता है। -कुलदीप, गांव नारेहड़ी।
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सोशल मीडिया का बहुत असर होता है। नींद पूरी न होने से चिड़चिड़ापन और थकान बढ़ती है। तनाव को कम करने के लिए दोस्तों से बात करता हूं, म्यूजिक सुनता हूं या थोड़ा ब्रेक लेता हूं। -नेकीराम, छात्र गांव रामबास।
तनाव से पढ़ाई और दिनचर्या पर असर पड़ता है। ध्यान भटकता है और पढ़ाई में मन नहीं लगता जिससे प्रदर्शन प्रभावित होता है। परिवार और समाज की अपेक्षाएं कई बार लड़कियों पर अतिरिक्त दबाव बना देती हैं जिससे मानसिक थकान बढ़ती है। -मुस्कान, छात्रा, गांव कारोली।
हर क्षेत्र की परीक्षा में प्रतियोगिता बहुत ज्यादा है जिससे हर समय बेहतर करने का दबाव बना रहता है। हम अपने मन की बात किसी से साझा नहीं करते जिससे समस्या और बढ़ जाती है। हमें मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बात करनी चाहिए। -रिया, छात्रा, नारनौल।
युवाओं में तनाव बढ़ना एक गंभीर संकेत है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और समय-समय पर अपने मन की बात साझा करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। -डॉ. अमित कुमार सिंह, वरिष्ठ चिकित्सक।