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जीत का मनाया जश्न, धरना जारी
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मकड़ौली टोल के पास धरने पर बैठे किसान । संवाद
पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा गुरु पर्व के पावन दिन पर तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद जिले के किसानों में खुशी का माहौल रहा। मकड़ौली टोल प्लाजा पर चल रहे धरने पर किसानों ने लड्डू बांटकर आंदोलन की जीत का जश्न मनाया। लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि जब तक संसदीय प्रक्रिया से ये कानून रद्द नहीं किए जाते आंदोलन और मकड़ौली में चल रहा धरना जारी रहेगा।
धरने के अध्यक्ष और भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के जिला प्रधान राजू मकड़ौली ने कहा कि अभी तो पीएम ने सिर्फ एक घोषणा की है। जब तक तीनों कृषि कानून संसद के माध्यम से वापस नहीं हो जाते, आंदोलन खत्म नहीं हो सकता। तब तक मकड़ौली टोल प्लाजा का धरना भी जारी रहेगा। अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि जल्द ही संयुक्त किसान मोर्चा इस संबंध में बैठक कर कोई फैसला लेगा। सभी संगठन उसी के अनुसार काम करेंगे। शुक्रवार को संयुक्त किसान मोर्चा का शीर्ष नेतृत्व हांसी के प्रदर्शन में व्यस्त था। जल्द ही संबंध में फैसला ले लिया जाएगा। उधर, भारतीय किसान यूनियन (अंबावता) के प्रदेश प्रधान अनिल नांदल ने पीएम नरेंद्र मोदी के एलान के बाद नई अनाज में किसानों के साथ तीनों कृषि कानूनों को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से जो भी आदेश मिलेगा, उस पर अमल किया जाएगा। आंदोलन अभी जारी रहेगा।
जनता को बधाई : प्रीत सिंह
अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि इस जीत के लिए जनता को बधाई है। यह किसान, मजदूर, कर्मचारी और महिलाओं की जीत है। साथ ही किसान सभा पीएम नरेंद्र मोदी का भी धन्यवाद करती है। उनसे अपील करते हैं कि एमएसपी पर गारंटी का कानून भी बनवा दें। साथ ही किसान आंदोलन के दौरान जो लोग शहीद हुए हैं उनके परिजनों को मुआवजा और सरकारी नौकरी का प्रबंध किया जाए।
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जीत की ओर अग्रसर किसान आंदोलन : नांदल
भारतीय किसान यूनियन (अंबावता) के प्रदेश प्रधान अनिल नांदल बल्लू ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के पीएम के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उच्च संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से घोषणा के प्रभावी होने की प्रतीक्षा की जाएगी। पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के एलान से यह साबित हो रहा है कि किसान आंदोलन अब जीत की ओर अग्रसर है। हालांकि आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा क्योंकि हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि कानूनों को संसद में पूरी तरह रद्द कर दिया जाएगा। सरकार को किसानों से बातचीत कर एमएसपी व अन्य मुद्दों का भी हल निकालना चाहिए।
किसान, मजदूरों की ऐतिहासिक जीत
किसान सभा की हरियाणा कमेटी ने प्रधानमंत्री द्वारा कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा को किसानों, मजदूरों की ऐतिहासिक जीत और हठधर्मी सरकार की हार बताया है। साथ ही एमएसपी की गारंटी व बिजली बिल वापस लेने की मांग की। राज्य प्रधान फूल सिंह श्योकंद ने कहा कि पीएम की घोषणा आजादी के बाद के सबसे बड़े और शांतिपूर्ण ऐतिहासिक आंदोलन की जीत है। इसका श्रेय किसानों और संयुक्त किसान मोर्चा को जाता है। राज्य सचिव सुमित दलाल ने कहा कि संसद में बिना बहस पारित कराए कानूनों को वापस लेने का अधिकार भी संसद को है। जल्द संसद में इन कानूनों को वापस लेते हुए एमएसपी की गारंटी पर कानून बनाने और बिजली बिल वापस लेने की घोषणा करनी चाहिए।
किसानों के साथ आम भारतीय की जीत : डंग
राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गुलशन डंग ने कहा कि गुरु पर्व के दिन पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानून वापस लेने की घोषणा का संगठन स्वागत करता है। संगठन ने पहले दिन से किसान आंदोलन को समर्थन दिया था। आज सिर्फ किसानों ही नहीं, हर भारतवासी के लिए खुशी का दिन है कि केंद्र सरकार ने कृषि कानून वापस लेने का फैसला किया है। इतने बड़े आंदोलन अंग्रेजों के समय चलते थे, आजादी के बाद पहली बार इतना लंबा आंदोलन हुआ है। आंदोलन में करीब 700 किसान शहीद हुए और 25000 करोड़ का कारोबार का नुकसान हुआ है। सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ।
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धरने के अध्यक्ष और भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के जिला प्रधान राजू मकड़ौली ने कहा कि अभी तो पीएम ने सिर्फ एक घोषणा की है। जब तक तीनों कृषि कानून संसद के माध्यम से वापस नहीं हो जाते, आंदोलन खत्म नहीं हो सकता। तब तक मकड़ौली टोल प्लाजा का धरना भी जारी रहेगा। अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि जल्द ही संयुक्त किसान मोर्चा इस संबंध में बैठक कर कोई फैसला लेगा। सभी संगठन उसी के अनुसार काम करेंगे। शुक्रवार को संयुक्त किसान मोर्चा का शीर्ष नेतृत्व हांसी के प्रदर्शन में व्यस्त था। जल्द ही संबंध में फैसला ले लिया जाएगा। उधर, भारतीय किसान यूनियन (अंबावता) के प्रदेश प्रधान अनिल नांदल ने पीएम नरेंद्र मोदी के एलान के बाद नई अनाज में किसानों के साथ तीनों कृषि कानूनों को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से जो भी आदेश मिलेगा, उस पर अमल किया जाएगा। आंदोलन अभी जारी रहेगा।
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जनता को बधाई : प्रीत सिंह
अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि इस जीत के लिए जनता को बधाई है। यह किसान, मजदूर, कर्मचारी और महिलाओं की जीत है। साथ ही किसान सभा पीएम नरेंद्र मोदी का भी धन्यवाद करती है। उनसे अपील करते हैं कि एमएसपी पर गारंटी का कानून भी बनवा दें। साथ ही किसान आंदोलन के दौरान जो लोग शहीद हुए हैं उनके परिजनों को मुआवजा और सरकारी नौकरी का प्रबंध किया जाए।
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जीत की ओर अग्रसर किसान आंदोलन : नांदल
भारतीय किसान यूनियन (अंबावता) के प्रदेश प्रधान अनिल नांदल बल्लू ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के पीएम के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उच्च संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से घोषणा के प्रभावी होने की प्रतीक्षा की जाएगी। पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के एलान से यह साबित हो रहा है कि किसान आंदोलन अब जीत की ओर अग्रसर है। हालांकि आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा क्योंकि हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि कानूनों को संसद में पूरी तरह रद्द कर दिया जाएगा। सरकार को किसानों से बातचीत कर एमएसपी व अन्य मुद्दों का भी हल निकालना चाहिए।
किसान, मजदूरों की ऐतिहासिक जीत
किसान सभा की हरियाणा कमेटी ने प्रधानमंत्री द्वारा कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा को किसानों, मजदूरों की ऐतिहासिक जीत और हठधर्मी सरकार की हार बताया है। साथ ही एमएसपी की गारंटी व बिजली बिल वापस लेने की मांग की। राज्य प्रधान फूल सिंह श्योकंद ने कहा कि पीएम की घोषणा आजादी के बाद के सबसे बड़े और शांतिपूर्ण ऐतिहासिक आंदोलन की जीत है। इसका श्रेय किसानों और संयुक्त किसान मोर्चा को जाता है। राज्य सचिव सुमित दलाल ने कहा कि संसद में बिना बहस पारित कराए कानूनों को वापस लेने का अधिकार भी संसद को है। जल्द संसद में इन कानूनों को वापस लेते हुए एमएसपी की गारंटी पर कानून बनाने और बिजली बिल वापस लेने की घोषणा करनी चाहिए।
किसानों के साथ आम भारतीय की जीत : डंग
राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गुलशन डंग ने कहा कि गुरु पर्व के दिन पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानून वापस लेने की घोषणा का संगठन स्वागत करता है। संगठन ने पहले दिन से किसान आंदोलन को समर्थन दिया था। आज सिर्फ किसानों ही नहीं, हर भारतवासी के लिए खुशी का दिन है कि केंद्र सरकार ने कृषि कानून वापस लेने का फैसला किया है। इतने बड़े आंदोलन अंग्रेजों के समय चलते थे, आजादी के बाद पहली बार इतना लंबा आंदोलन हुआ है। आंदोलन में करीब 700 किसान शहीद हुए और 25000 करोड़ का कारोबार का नुकसान हुआ है। सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ।