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कैप्टन अजय यादव लिखित में दें तो करवाएंगे पूर्व सीएम हुड्डा की जांच: बराला

Sat, 12 Dec 2015 02:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sat, 12 Dec 2015 02:19 AM IST
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caption ajay yadav sholud given some proof
पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा पर उनकी
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ही पार्टी के नेता कैप्टन अजय यादव ने विधायकों की खरीद फरोख्त के आरोप लगाए तो सत्ताधारी भाजपा भी मुखर हो गई है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने कहा कि अगर पूर्व विधायक यादव लिखित में शिकायत दें तो हम पूर्व सीएम हुड्डा की जांच कराएंगे।

शिकायत के आधार पर पूर्व सीएम की केवल विधायक खरीद फरोख्त में ही नहीं, बल्कि उनकी संपत्ति तक की जांच भी कराई जाएगी। बराला ने कैप्टन यादव को शिकायत करने का बुलावा भी दिया है। यादव को सलाह देते हुए बराला ने कहा कि जब वे खुलकर बोल रहे हैं तो शिकायत भी करें ताकि सरकार जांच शुरू करा सके।

       शुक्रवार को रोहतक में पार्टी के प्रदेश कार्यालय पहुंचे बराला ने कहा कि कैप्टन अजय यादव पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा से जुड़ी सभी बातों को जानते हैं। अगर वे हुड्डा पर 2009 में विधायकों की खरीद फरोख्त का आरोप लगा रहे हैं तो उनमें सच्चाई जरूर होगी। लेकिन इस मामले में अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं आई है।

जिस तरह से राबर्ट वाड्रा के खिलाफ शिकायत आने पर सरकार ने जांच कराई है, उसी तरह भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ जांच कराई जाएगी।

25 दिसंबर तक होंगे संगठन चुनाव
बराला ने कहा कि 25 दिसंबर से पहले सभी जिलों में पार्टी के संगठन चुनाव हो जाएंगे। 16 जिलों में पूरी तैयारी हो गई, जिनमें इस समय भी चुनाव कराए जा सकते हैं। लेकिन अन्य जिलों में तैयारी पूरी होते ही चुनाव करा दिए जाएंगे।  
हरियाणा बन रहा नजीर
उन्होंने कहा कि शिक्षित पंचायत देने के लिए अग्रसर सरकार लगातार नजीर पेश कर रही है। उसने पहले गौ संरक्षण एवं गौ संवर्धन कानून बनाकर देशभर में नजीर पेश कर दी और अब पंचायत चुनाव के नियमों से बड़ा संदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने विपक्षियों की बोलती भी बंद कर दी।

धान खरीद में नहीं हुआ घोटाला
प्रदेशाध्यक्ष का कहना है कि किसी भी जगह धान खरीद में घोटाला नहीं हुआ है। सरकार ने पहली बार जब धान की कीमत लगभग एक हजार रुपये रखी थी। जिस 1509 धान को कोई खरीदता नहीं था, उसको सरकार ने ज्यादा दाम पर खरीदा है। अगर विरोधी पार्टियां घोटाले के आरोप लगा रही है तो वे पूरी तरह से किसान विरोधी हैं। वे नहीं चाहती कि सरकार उनको धान का अच्छा दाम दे। 
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