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रक्तदान ही मानवता की सच्ची सेवा : स्वामी आर्यवेश
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32-स्वामी इंद्रवेश विद्यापीठ आश्रम में रक्तदाता का हौसला बढ़ाते स्वामी आर्यवेश व स्वामी आदित्यव
- फोटो : संवाद
रोहतक। रक्तदान जातिवाद और सांप्रदायिकता की दीवारों को तोड़कर समाज में एकता, भाईचारे और मानवता की भावना को मजबूत करता है। रक्तदान ही मानवता की सच्ची सेवा है। यह बात सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान स्वामी आर्यवेश ने कही।
स्वामी आर्यवेश शुक्रवार को गांव टिटोली स्थित स्वामी इंद्रवेश विद्यापीठ आश्रम में बेटी बचाओ चतुर्वेद पारायण महायज्ञ के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। स्वामी इंद्रवेश के 89वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में 109 युवाओं और संन्यासियों ने रक्तदान किया। सभी रक्तदाताओं को सम्मानित किया गया।
महायज्ञ में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आहुति देकर समाज को कुरीतियों से मुक्त बनाने का संकल्प लिया। यज्ञ के दौरान कन्या भ्रूण हत्या, नशाखोरी, अश्लीलता, धार्मिक अंधविश्वास और गोहत्या जैसी सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन के लिए विशेष संकल्प लिया।
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पूनम आर्या ने कहा कि मां बच्चे की प्रथम गुरु होती है। इसलिए उसका शिक्षित और संस्कारित होना आवश्यक है। प्रवेश आर्या ने बताया कि रविवार को यज्ञ, भजन एवं प्रवचनों का कार्यक्रम होगा। डॉ. कैलाश कर्मठ ने कहा कि महर्षि दयानंद के विचारों ने देश में स्वतंत्रता, स्वाभिमान और सामाजिक सुधार की भावना को जागृत किया।
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स्वामी आर्यवेश शुक्रवार को गांव टिटोली स्थित स्वामी इंद्रवेश विद्यापीठ आश्रम में बेटी बचाओ चतुर्वेद पारायण महायज्ञ के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। स्वामी इंद्रवेश के 89वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में 109 युवाओं और संन्यासियों ने रक्तदान किया। सभी रक्तदाताओं को सम्मानित किया गया।
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महायज्ञ में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आहुति देकर समाज को कुरीतियों से मुक्त बनाने का संकल्प लिया। यज्ञ के दौरान कन्या भ्रूण हत्या, नशाखोरी, अश्लीलता, धार्मिक अंधविश्वास और गोहत्या जैसी सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन के लिए विशेष संकल्प लिया।
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पूनम आर्या ने कहा कि मां बच्चे की प्रथम गुरु होती है। इसलिए उसका शिक्षित और संस्कारित होना आवश्यक है। प्रवेश आर्या ने बताया कि रविवार को यज्ञ, भजन एवं प्रवचनों का कार्यक्रम होगा। डॉ. कैलाश कर्मठ ने कहा कि महर्षि दयानंद के विचारों ने देश में स्वतंत्रता, स्वाभिमान और सामाजिक सुधार की भावना को जागृत किया।