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किसान संगठनों के प्रदर्शन के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने तीन सांसदों की कमेटी गठित की
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र्किट हाउस में किसान व सांसदो की कमेटी की मिटिंग के दोरान आपस में बहस करते किसान । संवाद न्यूज ऐजे?
- फोटो : RohtakCity
रोहतक। ज्यादातर किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा पिछले दिनों पास किए गए तीन कृषि अध्यादेशों में कई खामियां हैं। अब तक केंद्र सरकार फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर स्थिति स्पष्ट नहीं कर सकी है। एक अध्यादेश से तो कालाबाजारी बढ़ने की पूरी आशंका है।
कृषि अध्यादेशों को लेकर विपक्ष के लगातार हमलों और किसान संगठनों के प्रदर्शन के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ ने तीन सांसदों की कमेटी गठित की थी। चौधरी धर्मवीर सिंह की अगुवाई में गठित कमेटी में नायब सैनी और बिजेंद्र सिंह शामिल हैं। यह कमेटी कृषि अध्यादेशों पर किसान संगठनों के सुझाव लेगी। शनिवार को कमेटी ने सर्किट हाउस में किसानों से फीडबैक लिया। इसके बाद करनाल और पंचकूला में भी कमेटी किसान संगठनों से बात करेगी। शनिवार की बैठक में बड़ी तादाद में किसान नेता पहुंचे। अच्छी बात यह थी कि कमेटी ने पार्टी और संगठन से ऊपर उठ कर सभी के सुझाव सुने और उन्हें नोट किया। भाजपा का किसान मोर्चा बैठक में उतना मुखर नहीं रहा। लेकिन वाम झुकाव वाली किसान सभा और भारतीय किसान संघ जैसे संगठनों ने खुल कर कृषि अध्यादेशों की खामियां गिनाईं। कृषि अध्यादेशों के अलावा कुछ और मुद्दे भी बैठक में उठे। दूसरे जिलों के किसानों ने भी अपने मुद्दे उठाए। सभी ने पिपली में किसानों पर हुए लाठीचार्ज की निंदा की। इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की। सांसद धर्मवीर सिंह ने भी माना कि यह उचित नहीं था। भाजपा से जुड़े किसान नेताओं ने कहा कि अगर सही ढंग से निचले स्तर पर अध्यादेशों के बारे में प्रचार किया जाता तो विपक्ष को मौका नहीं मिलता। बाद में मीडिया से बातचीत में सांसद धर्मवीर सिंह ने माना कि कोरोना के चलते इन अध्यादेशों के बारे में किसानों को समझाने में नाकाम रहे। तीनों बैठकों के बाद सभी संगठनों की राय लेकर पार्टी नेतृत्व और कृषि मंत्री तक पहुंचाई जाएगी। यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि गलतफहमी कैसे दूर की जाए। क्योंकि लोगों को पता ही नहीं है कि सच क्या है।
किसानों को बर्बाद करेंगे अध्यादेश
किसान सभा के इंद्रजीत सिंह और प्रीत सिंह ने कहा कि ये तीनों अध्यादेश किसानों को बर्बाद कर देंगे। मंडियों के बाहर किसानों की फसलों को कोई नहीं पूछेगा। कई फसलों को आवश्यक वस्तुएं अधिनियम से बाहर करने से कालाबाजारी बढ़ेगी और आम लोगों को नुकसान झेलना पड़ेगा। कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग से संबंधित अध्यादेश से भी किसानों का नुकसान होगा, जमीनों पर कॉरपोरेट का कब्जा हो जाएगा। उन्होंने किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन न जारी करने का मुद्दा भी उठाया। सांसदों को बताया कि किसानों ने तीस हजार से लेकर साढ़े सात लाख रुपये जमा किए हैं, फिर भी कनेक्शन जारी नहीं किए जा रहे हैं। सांसद धर्मवीर सिंह ने इस पर हैरानी जताते हुए पूछा कि साढ़े सात लाख कैसे हो गए। तो किसान नेताओं ने बताया कि उसके करीब 70 पोल लगने हैं। साथ ही कपास व अन्य बर्बाद फसलों की गिरदावरी करवा कर किसानों को मुआवजा देने की मांग की। साथ ही फसल बीमा योजना की खामियां भी गिनाईं।
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कृषि मंत्री कह रहे हैं, एमएसपी की गारंटी नहीं
भारतीय किसान संघ के सुंदर लाल ने कहा कि आज ही उन्होेंने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर का फेसबुक पेज देखा था, वह कह रहे हैं कि एमएसपी की गारंटी नहीं है। संघ ने हरियाणा की 1070 ग्राम समितियों से प्रस्ताव पास कर पीएम और कृषि मंत्री को ई-मेल भेजे हैं। एमएसपी गारंटी की मांग की है। अध्यादेश में कहा गया है कि पैन कार्ड रखने वाला कोई भी व्यक्ति फसल खरीद सकता है। बैंक गारंटी की शर्त रखी जाए, खरीददार का सारा ब्योरा पोर्टल पर हो। किसानों और व्यापारियों के मामलों की सुनवाई के लिए एसडीएम के बजाय कृषि न्यायालय बनाए जाएं। किसानों और आढ़तियों के संबंध खराब न हों। उन्होंने कहा कि सरकार के निर्णयों पर हैरानी हो रही है, पहले पिपली में लाठीचार्ज किया गया, फिर रैली करने की इजाजत भी दे दी गई। इसी संगठन के जिला प्रधान सतीश चिकारा ने कहा कि फसलें आवश्यक वस्तुएं अधिनियम से हटने के बाद व्यापारी कालाबाजारी करेगा, मनमर्जी के रेट पर बेचेगा। आढ़ती एसोसिएशन ने कहा कि अगर बाहर कोई शुल्क नहीं है तो मंडी में भी चार फीसदी फीस खत्म की जाए।
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कृषि अध्यादेशों को लेकर विपक्ष के लगातार हमलों और किसान संगठनों के प्रदर्शन के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ ने तीन सांसदों की कमेटी गठित की थी। चौधरी धर्मवीर सिंह की अगुवाई में गठित कमेटी में नायब सैनी और बिजेंद्र सिंह शामिल हैं। यह कमेटी कृषि अध्यादेशों पर किसान संगठनों के सुझाव लेगी। शनिवार को कमेटी ने सर्किट हाउस में किसानों से फीडबैक लिया। इसके बाद करनाल और पंचकूला में भी कमेटी किसान संगठनों से बात करेगी। शनिवार की बैठक में बड़ी तादाद में किसान नेता पहुंचे। अच्छी बात यह थी कि कमेटी ने पार्टी और संगठन से ऊपर उठ कर सभी के सुझाव सुने और उन्हें नोट किया। भाजपा का किसान मोर्चा बैठक में उतना मुखर नहीं रहा। लेकिन वाम झुकाव वाली किसान सभा और भारतीय किसान संघ जैसे संगठनों ने खुल कर कृषि अध्यादेशों की खामियां गिनाईं। कृषि अध्यादेशों के अलावा कुछ और मुद्दे भी बैठक में उठे। दूसरे जिलों के किसानों ने भी अपने मुद्दे उठाए। सभी ने पिपली में किसानों पर हुए लाठीचार्ज की निंदा की। इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की। सांसद धर्मवीर सिंह ने भी माना कि यह उचित नहीं था। भाजपा से जुड़े किसान नेताओं ने कहा कि अगर सही ढंग से निचले स्तर पर अध्यादेशों के बारे में प्रचार किया जाता तो विपक्ष को मौका नहीं मिलता। बाद में मीडिया से बातचीत में सांसद धर्मवीर सिंह ने माना कि कोरोना के चलते इन अध्यादेशों के बारे में किसानों को समझाने में नाकाम रहे। तीनों बैठकों के बाद सभी संगठनों की राय लेकर पार्टी नेतृत्व और कृषि मंत्री तक पहुंचाई जाएगी। यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि गलतफहमी कैसे दूर की जाए। क्योंकि लोगों को पता ही नहीं है कि सच क्या है।
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किसानों को बर्बाद करेंगे अध्यादेश
किसान सभा के इंद्रजीत सिंह और प्रीत सिंह ने कहा कि ये तीनों अध्यादेश किसानों को बर्बाद कर देंगे। मंडियों के बाहर किसानों की फसलों को कोई नहीं पूछेगा। कई फसलों को आवश्यक वस्तुएं अधिनियम से बाहर करने से कालाबाजारी बढ़ेगी और आम लोगों को नुकसान झेलना पड़ेगा। कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग से संबंधित अध्यादेश से भी किसानों का नुकसान होगा, जमीनों पर कॉरपोरेट का कब्जा हो जाएगा। उन्होंने किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन न जारी करने का मुद्दा भी उठाया। सांसदों को बताया कि किसानों ने तीस हजार से लेकर साढ़े सात लाख रुपये जमा किए हैं, फिर भी कनेक्शन जारी नहीं किए जा रहे हैं। सांसद धर्मवीर सिंह ने इस पर हैरानी जताते हुए पूछा कि साढ़े सात लाख कैसे हो गए। तो किसान नेताओं ने बताया कि उसके करीब 70 पोल लगने हैं। साथ ही कपास व अन्य बर्बाद फसलों की गिरदावरी करवा कर किसानों को मुआवजा देने की मांग की। साथ ही फसल बीमा योजना की खामियां भी गिनाईं।
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कृषि मंत्री कह रहे हैं, एमएसपी की गारंटी नहीं
भारतीय किसान संघ के सुंदर लाल ने कहा कि आज ही उन्होेंने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर का फेसबुक पेज देखा था, वह कह रहे हैं कि एमएसपी की गारंटी नहीं है। संघ ने हरियाणा की 1070 ग्राम समितियों से प्रस्ताव पास कर पीएम और कृषि मंत्री को ई-मेल भेजे हैं। एमएसपी गारंटी की मांग की है। अध्यादेश में कहा गया है कि पैन कार्ड रखने वाला कोई भी व्यक्ति फसल खरीद सकता है। बैंक गारंटी की शर्त रखी जाए, खरीददार का सारा ब्योरा पोर्टल पर हो। किसानों और व्यापारियों के मामलों की सुनवाई के लिए एसडीएम के बजाय कृषि न्यायालय बनाए जाएं। किसानों और आढ़तियों के संबंध खराब न हों। उन्होंने कहा कि सरकार के निर्णयों पर हैरानी हो रही है, पहले पिपली में लाठीचार्ज किया गया, फिर रैली करने की इजाजत भी दे दी गई। इसी संगठन के जिला प्रधान सतीश चिकारा ने कहा कि फसलें आवश्यक वस्तुएं अधिनियम से हटने के बाद व्यापारी कालाबाजारी करेगा, मनमर्जी के रेट पर बेचेगा। आढ़ती एसोसिएशन ने कहा कि अगर बाहर कोई शुल्क नहीं है तो मंडी में भी चार फीसदी फीस खत्म की जाए।