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Rohtak News: भाली के किसान नवीन ने समझाया किसान की आय बढ़ाने का तरीका
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रोहतक। किसान अपनी जमीन में एक ही समय में चार से पांच फसल लेकर आय बढ़ा सकता है। हल्दी, मेथी पालक के अलावा छोटी बेलें जमीन पर व घीया, तोरी की बडी बेलें जमीन से कुछ ऊपर मचान पर डाल सकते हैं। मचान के नीचे खीरा व ककड़ी लगाने के अलावा खेत में फलदार पौधे भी लगाए जा सकते हैं। यह मॉडल बुधवार को भाली के युवा किसान नवीन ने कृषि मेले में प्रस्तुत किया।
कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से आयोजित कृषि मेले में अनेक किसान अपने उत्पादों के साथ शामिल हुए। इन्होंने अपनी स्टॉल पर प्रस्तुत मॉडल के जरिये लोगों का ज्ञानवर्धन किया। कृषि मेले का विषय फसल अवशेष प्रबंधन रहा। यहां 700 से अधिक किसान पहुंचे। मुख्य अतिथि एफएसएल प्रभारी डॉ. सरोज दहिया ने प्रगतिशील महिला एवं किसानों को सम्मानित किया।
मुख्य अतिथि ने किसानों से आह्वान किया कि वे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए अपनी फसलों के अवशेष जलाने के बजाए मिट्टी मे बढा़एं। इससे मृदा की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होगी। पर्यावरण शुद्ध रहेगा। मेले में फसल अवशेष प्रबंधन में प्रयोग होने वाली मशीनों पर चर्चा की गई।
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कृषि विज्ञान केंद्र की वरिष्ठ संयोजक डॉ. मीना सिवाच ने किसानों को सुझाव दिया कि वे पराली प्रबंधन के साथ फसल चक्र में बदलाव करें। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी। किसानों की आमदनी भी ज्यादा होगी। मंच संचालन डॉ. राम करण गौड़ ने किया। डॉ. यशपाल सिंह सोलंकी ने मेले मे आए किसानों एवं अधिकारियों का आभार जताया। इस मौके पर डॉ. राजेंद्र सिंह, डॉ. दिलबाग अहलावत, डॉ. कमल सैनी व डॉ. सुकीर्ति ने भी अपने विचार रखे। मेले में 14 स्टाल विभिन्न विभागों एवं निजी संस्थाओं की ओर से लगाए गए। इस मौके पर विजय राणा, डॉ. दीपक धतरवाल, डॉ. जगत सिंह, डॉ. नीरज पवार, डॉ. मोहम्मद एहतशाम, डॉ. रुपेंदर, डॉ. मीना सेवहाग, डॉ. जोगिंदर, डॉ. अजय यादव और डॉ. गुरदीप सिंह उपस्थित रहे।
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कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से आयोजित कृषि मेले में अनेक किसान अपने उत्पादों के साथ शामिल हुए। इन्होंने अपनी स्टॉल पर प्रस्तुत मॉडल के जरिये लोगों का ज्ञानवर्धन किया। कृषि मेले का विषय फसल अवशेष प्रबंधन रहा। यहां 700 से अधिक किसान पहुंचे। मुख्य अतिथि एफएसएल प्रभारी डॉ. सरोज दहिया ने प्रगतिशील महिला एवं किसानों को सम्मानित किया।
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मुख्य अतिथि ने किसानों से आह्वान किया कि वे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए अपनी फसलों के अवशेष जलाने के बजाए मिट्टी मे बढा़एं। इससे मृदा की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होगी। पर्यावरण शुद्ध रहेगा। मेले में फसल अवशेष प्रबंधन में प्रयोग होने वाली मशीनों पर चर्चा की गई।
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कृषि विज्ञान केंद्र की वरिष्ठ संयोजक डॉ. मीना सिवाच ने किसानों को सुझाव दिया कि वे पराली प्रबंधन के साथ फसल चक्र में बदलाव करें। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी। किसानों की आमदनी भी ज्यादा होगी। मंच संचालन डॉ. राम करण गौड़ ने किया। डॉ. यशपाल सिंह सोलंकी ने मेले मे आए किसानों एवं अधिकारियों का आभार जताया। इस मौके पर डॉ. राजेंद्र सिंह, डॉ. दिलबाग अहलावत, डॉ. कमल सैनी व डॉ. सुकीर्ति ने भी अपने विचार रखे। मेले में 14 स्टाल विभिन्न विभागों एवं निजी संस्थाओं की ओर से लगाए गए। इस मौके पर विजय राणा, डॉ. दीपक धतरवाल, डॉ. जगत सिंह, डॉ. नीरज पवार, डॉ. मोहम्मद एहतशाम, डॉ. रुपेंदर, डॉ. मीना सेवहाग, डॉ. जोगिंदर, डॉ. अजय यादव और डॉ. गुरदीप सिंह उपस्थित रहे।