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‘अपनों का साथ डिप्रेशन व एंजाइटी का बेहतर उपचार’
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अपनों का साथ डिप्रेशन और एंजाइटी का सबसे बड़ा उपचार है। संयमित दिनचर्या, व्यायाम और पौष्टिक आहार से बेहतर रिजल्ट आता है। पीजीआईएमएस में सोसायटी फॉर रूरल मेंटल हेल्थ द्वारा ऑनलाइन आयोजित मिड टर्म सीएसई में यह बात वक्ताओं ने कही। चर्चा का विषय इवॉल्विंग इफेक्टिव स्ट्रेटजी टू कॉम्बैट मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स इन द पैंडेमिक रहा।
मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने कहा कोविड महामारी से मानसिक बीमारियों में इजाफा होगा। सीएमई से उपचार को लेकर योजना बनाने में मदद मिलेगी। कोरोना की दूसरी लहर ने गांवों की तरफ रुख किया। इसका काफी हद तक ग्रामीणों की मानसिक स्थिति पर प्रभाव पड़ा है। ग्रामीण इलाकों में मानसिक स्वास्थ्य सेवा सशक्त करने की जरूरत है। कुलपति ने मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक एवं सीईओ डॉ. राजीव गुप्ता से ग्रामीणों की मानसिक स्थिति मजबूत बनाने के लिए योजना बनाने को कहा। डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि महामारी से लोगों में घबराहट, अवसाद, तनाव आदि से समस्याएं हो रही हैं। विद्यार्थियों, बुजुर्गों, निजी कंपनी के कर्मियों व स्वास्थ्य कर्मियों में इस तरह की समस्या का खतरा ज्यादा है। सिक्किम मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डॉ. संजीवा दत्ता व एम्स नई दिल्ली के डॉ. राकेश चड्ढा ने बताया कि पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम, नशे से बचाव, नकारात्मकता से दूरी आवश्यक हैं। अपनों, रिश्तेदार व मित्रों से नजदीक सबसे बड़ा उपचार है। संस्थान के प्रो. डॉ. हितेश खुराना, एसजीटी मेडिकल कॉलेज के डॉ. वेदपाल महला, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के डॉ. कृष्ण सोनी, सिविल सर्जन पलवल डॉ. ब्रह्मदीप सिंधु ने भी विचार रखे। आयोजन समिति सचिव डॉ. विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि सीएमई में 100 से ज्यादा विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस दौरान सोसायटी फॉर रूरल मेंटल हेल्थ के अध्यक्ष डॉ. बीर सिंह यादव, डॉ. विनय कुमार, डॉ. पुरुषोत्तम, डॉ. भूपेंद्र सिंह, डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. पीयूष, डॉ. अद्विविका, डॉ. ईशा, डॉ. रोहित, डॉ. ओमसी तनेजा, डॉ. रवि, डॉ. मीनू आदि मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने कहा कोविड महामारी से मानसिक बीमारियों में इजाफा होगा। सीएमई से उपचार को लेकर योजना बनाने में मदद मिलेगी। कोरोना की दूसरी लहर ने गांवों की तरफ रुख किया। इसका काफी हद तक ग्रामीणों की मानसिक स्थिति पर प्रभाव पड़ा है। ग्रामीण इलाकों में मानसिक स्वास्थ्य सेवा सशक्त करने की जरूरत है। कुलपति ने मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक एवं सीईओ डॉ. राजीव गुप्ता से ग्रामीणों की मानसिक स्थिति मजबूत बनाने के लिए योजना बनाने को कहा। डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि महामारी से लोगों में घबराहट, अवसाद, तनाव आदि से समस्याएं हो रही हैं। विद्यार्थियों, बुजुर्गों, निजी कंपनी के कर्मियों व स्वास्थ्य कर्मियों में इस तरह की समस्या का खतरा ज्यादा है। सिक्किम मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डॉ. संजीवा दत्ता व एम्स नई दिल्ली के डॉ. राकेश चड्ढा ने बताया कि पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम, नशे से बचाव, नकारात्मकता से दूरी आवश्यक हैं। अपनों, रिश्तेदार व मित्रों से नजदीक सबसे बड़ा उपचार है। संस्थान के प्रो. डॉ. हितेश खुराना, एसजीटी मेडिकल कॉलेज के डॉ. वेदपाल महला, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के डॉ. कृष्ण सोनी, सिविल सर्जन पलवल डॉ. ब्रह्मदीप सिंधु ने भी विचार रखे। आयोजन समिति सचिव डॉ. विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि सीएमई में 100 से ज्यादा विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस दौरान सोसायटी फॉर रूरल मेंटल हेल्थ के अध्यक्ष डॉ. बीर सिंह यादव, डॉ. विनय कुमार, डॉ. पुरुषोत्तम, डॉ. भूपेंद्र सिंह, डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. पीयूष, डॉ. अद्विविका, डॉ. ईशा, डॉ. रोहित, डॉ. ओमसी तनेजा, डॉ. रवि, डॉ. मीनू आदि मौजूद रहे।
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