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स्मार्ट फोन के जरिए बेहतरीन फिल्मांकन संभव : राकेश अंदानिया
Tue, 04 Mar 2025 01:49 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Tue, 04 Mar 2025 01:49 AM IST
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03सीटीके04-एमडीयू के पत्रकारिता विभाग में आयोजित कार्यशाला में अपनी बात रखते वक्ता राकेश अंदानि
रोहतक। शाॅर्ट फिल्म्स व रील्स के जरिए केवल मनोरंजक ही नहीं, बल्कि शिक्षाप्रद कंटेंट का फिल्मीकरण संभव है। सामाजिक व पर्यावरणीय विषयों पर बेहतरीन लघु फिल्में बनाई जा सकती हैं। यह कहना है वृत्तचित्र निर्माता-निर्देशक एवं एमडीयू एलुमनाई राकेश अंदानिया का। वह साेमवार को महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में आयोजित फिल्म निर्माण (लघु फिल्म व रील्स निर्माण) कार्यशाला में बतौर विशेषज्ञ आमंत्रित वक्ता बोल रहे थे।
विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वन्य जीवन केंद्रित शॉर्ट फिल्म्स व रील्स बनाने के गुर देते हुए उन्होंने कहा कि स्मार्ट फोन के जरिए बेहतरीन फिल्मांकन संभव है। पर्यावरण विषयक फिल्म मेकर माइक पांडे समेत अन्य फिल्म निदेशकों का उदाहरण देते हुए पर्यावरणीय सरोकारों पर फिल्म निर्माण की जानकारी दी। इस दो दिवसीय कार्यशाला के प्रथम दिन उन्होंने कैमरा वर्क समेत फिल्म निर्माण की तकनीकी बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए मोबाइल पत्रकारिता की भी जानकारी साझा की।
विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला के कन्वीनर प्रो. हरीश कुमार ने कहा कि जनसंचार क्षेत्र में मोबाइल क्रांति ने नए आयाम प्रस्तुत किए हैं। रील्स के जरिए मनोरंजन के साथ शैक्षणिक-सामाजिक कंटेट साझा किया जा सकता है। शॉर्ट फिल्मस व रील्स निर्माण स्वरोजगार का रास्ता प्रशस्त कर रहा है।
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कार्यशाला का समन्वयन-संचालन प्राध्यापक सुनित मुखर्जी ने किया। उन्होंने कहा कि यह दो दिवसीय कार्यशाला विद्यार्थियों के कौशल विकास, क्षमता संवर्धन के लिए व उनकी इम्प्लाॅयबिलिटी की दृष्टि से अहम है। कार्यशाला में पंकज नैन, राजकीय पीजी नेहरू कालेज, झज्जर से डाॅ. मीनू, बीएमयू से डाॅ. सुशील कुमार, एलएन हिंदू कालेज, रोहतक से डाॅ. सुमित सहरावत समेत विभाग के शोधार्थी एवं संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वन्य जीवन केंद्रित शॉर्ट फिल्म्स व रील्स बनाने के गुर देते हुए उन्होंने कहा कि स्मार्ट फोन के जरिए बेहतरीन फिल्मांकन संभव है। पर्यावरण विषयक फिल्म मेकर माइक पांडे समेत अन्य फिल्म निदेशकों का उदाहरण देते हुए पर्यावरणीय सरोकारों पर फिल्म निर्माण की जानकारी दी। इस दो दिवसीय कार्यशाला के प्रथम दिन उन्होंने कैमरा वर्क समेत फिल्म निर्माण की तकनीकी बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए मोबाइल पत्रकारिता की भी जानकारी साझा की।
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विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला के कन्वीनर प्रो. हरीश कुमार ने कहा कि जनसंचार क्षेत्र में मोबाइल क्रांति ने नए आयाम प्रस्तुत किए हैं। रील्स के जरिए मनोरंजन के साथ शैक्षणिक-सामाजिक कंटेट साझा किया जा सकता है। शॉर्ट फिल्मस व रील्स निर्माण स्वरोजगार का रास्ता प्रशस्त कर रहा है।
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कार्यशाला का समन्वयन-संचालन प्राध्यापक सुनित मुखर्जी ने किया। उन्होंने कहा कि यह दो दिवसीय कार्यशाला विद्यार्थियों के कौशल विकास, क्षमता संवर्धन के लिए व उनकी इम्प्लाॅयबिलिटी की दृष्टि से अहम है। कार्यशाला में पंकज नैन, राजकीय पीजी नेहरू कालेज, झज्जर से डाॅ. मीनू, बीएमयू से डाॅ. सुशील कुमार, एलएन हिंदू कालेज, रोहतक से डाॅ. सुमित सहरावत समेत विभाग के शोधार्थी एवं संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थी उपस्थित रहे।