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बर्बरीक ने खुशी-खुशी शीश दान देना स्वीकार किया : पप्पू शर्मा
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05सीटीके17..मदनलाल ढींगरा कम्युनिटी सेंटर में तीन दिवसीय श्याम कथा के अंतिम दिन कथा श्रवण करते
रोहतक। हरियाणा के धर्मस्थली कुरुक्षेत्र की धरती पर हुए महाभारत युद्ध को देखने के लिए जब बर्बरीक आ रहे थे तो भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें बीच में ही रोक लिया। यह विचार कथा व्यास पप्पू शर्मा ने मदनलाल ढींगरा कम्युनिटी सेंटर में तीन दिवसीय श्याम कथा के अंतिम दिन उपस्थित जन समूह को संबोधित करते हुए कहे।
उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्णा जानते थे कि अगर बर्बरीक युद्ध में शामिल हो गए तो परिणाम कुछ भी हो सकता है। भगवान श्री कृष्ण बर्बरीक की क्षमता से हैरान थे और किसी भी तरह से उसे युद्ध में भाग लेने से रोकना चाहते थे। इसके लिए श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से कहा कि तुम तो बड़े पराक्रमी हो मुझ गरीब को कुछ दान नहीं दोगे। बर्बरीक ने जब दान मांगने के लिए कहा तो श्री कृष्ण ने बर्बरीक से उनका सिर मांग लिया। जब श्री कृष्ण ने अपना वास्तविक परिचय दिया तो बर्बरीक ने खुशी-खुशी शीश दान देना स्वीकार कर लिया।
श्री कृष्ण ने प्रसन्न होकर बर्बरीक के कटे सिर को वरदान दिया कि कलयुग में तुम मेरे श्याम नाम से पूजित होगे। तुम्हारे स्मरण मात्र से ही भक्तों का कल्याण होगा। धर्म अर्थ काम मोक्ष की प्राप्ति होगी
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रविवार को कथा के अंतिम दिन श्याम परिवार की ओर से कथा में शामिल होने आए सभी भक्तों के लिए भंडारा लगाया गया। भगवान को 56 भोग अर्पित किए गए।
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उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्णा जानते थे कि अगर बर्बरीक युद्ध में शामिल हो गए तो परिणाम कुछ भी हो सकता है। भगवान श्री कृष्ण बर्बरीक की क्षमता से हैरान थे और किसी भी तरह से उसे युद्ध में भाग लेने से रोकना चाहते थे। इसके लिए श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से कहा कि तुम तो बड़े पराक्रमी हो मुझ गरीब को कुछ दान नहीं दोगे। बर्बरीक ने जब दान मांगने के लिए कहा तो श्री कृष्ण ने बर्बरीक से उनका सिर मांग लिया। जब श्री कृष्ण ने अपना वास्तविक परिचय दिया तो बर्बरीक ने खुशी-खुशी शीश दान देना स्वीकार कर लिया।
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श्री कृष्ण ने प्रसन्न होकर बर्बरीक के कटे सिर को वरदान दिया कि कलयुग में तुम मेरे श्याम नाम से पूजित होगे। तुम्हारे स्मरण मात्र से ही भक्तों का कल्याण होगा। धर्म अर्थ काम मोक्ष की प्राप्ति होगी
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रविवार को कथा के अंतिम दिन श्याम परिवार की ओर से कथा में शामिल होने आए सभी भक्तों के लिए भंडारा लगाया गया। भगवान को 56 भोग अर्पित किए गए।