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कलानौर में सूअर के मीट की बिक्री पर रोक
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आईजी कार्यालय के पास जेएलएन नहर में मरा पड़ा सूअर। अमर उजाला
कस्बे में बुधवार को 28 से अधिक सूअरों की मौत हो गई। सूअर पालकों का मानना है कि खंड में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के चलते उनके सभी सूअर मारे गए हैं। साथ ही सूअर के मीट की बिक्री पर भी नपा ने प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में उनको आर्थिक नुकसान हो रहा है। फिलहाल नगरपालिका ने सभी मृत सुअरों को गली-मोहल्ले, नालियों, खाली पड़े प्लाटों, तालाब किनारे से तलाश कर कस्बे से बाहर दफना रही है।
बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने की बैठक
नागरिक अस्पताल कलानौर में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए बैठक आयोजित की गई। एसएमओ डॉ. कमला वर्मा की अध्यक्षता में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की बैठक हुई। इसमें डॉ. वर्मा ने बताया कि अफ्रीकन स्वाइन फ्लू सूअर में होने वाली एक भयंकर एवं अति खतरनाक संक्रमित बीमारी है। इस बीमारी में सूअर को बुखार, बेचैनी, त्वचा लाल और नीली हो जाती है। इस बीमारी से बचाव अति आवश्यक है। खरीद और बिक्री पर प्रतिबंध है। नए खरीदे गए सूअरों को 15 दिन तक अलग स्थान पर रखने के बाद ही उसे दूसरे सूअरों के साथ रखें। यदि कोई संदिग्ध केस दिखाई देता है तो तुरंत संबंधित वेटरनरी सर्जन को सूचित करें। इस बीमारी से प्रभावित सूअरों को चारा और पानी पिलाने का उपाय अलग से करें। सूअरों के शेड को 1 प्रतिशत फोरमाडीहाइड या 2 प्रतिशत एनएओएच से नियमित तौर पर संक्रमण मुक्त करें। मरे सूअरों को गहरे गड्ढे में दफनाएं और उन्हें इधर-उधर पानी या खुले में मत फेंके। इस अवसर पर आरएमओ डॉ. तेज सिंह, डॉ. विवेक गेरा, डॉ. सुरेंद्र सिंह दंत चिकित्सक, डॉ. रमन, डॉ. भानू प्रताप, डॉ. सौरव, ब्लॉक एक्सटेंशन एजुकेटर जसवीर रंगा, हेल्थ इंस्पेक्टर सतीश कुमार, एलएचवी सुशीला देवी, नर्सिंग ऑफिसर सुषमा देवी, आईसीएन पूनम रंगा, दर्शन कुमार, नीरज दुआ, नरेश कुमार और अन्य स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे।
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बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने की बैठक
नागरिक अस्पताल कलानौर में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए बैठक आयोजित की गई। एसएमओ डॉ. कमला वर्मा की अध्यक्षता में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की बैठक हुई। इसमें डॉ. वर्मा ने बताया कि अफ्रीकन स्वाइन फ्लू सूअर में होने वाली एक भयंकर एवं अति खतरनाक संक्रमित बीमारी है। इस बीमारी में सूअर को बुखार, बेचैनी, त्वचा लाल और नीली हो जाती है। इस बीमारी से बचाव अति आवश्यक है। खरीद और बिक्री पर प्रतिबंध है। नए खरीदे गए सूअरों को 15 दिन तक अलग स्थान पर रखने के बाद ही उसे दूसरे सूअरों के साथ रखें। यदि कोई संदिग्ध केस दिखाई देता है तो तुरंत संबंधित वेटरनरी सर्जन को सूचित करें। इस बीमारी से प्रभावित सूअरों को चारा और पानी पिलाने का उपाय अलग से करें। सूअरों के शेड को 1 प्रतिशत फोरमाडीहाइड या 2 प्रतिशत एनएओएच से नियमित तौर पर संक्रमण मुक्त करें। मरे सूअरों को गहरे गड्ढे में दफनाएं और उन्हें इधर-उधर पानी या खुले में मत फेंके। इस अवसर पर आरएमओ डॉ. तेज सिंह, डॉ. विवेक गेरा, डॉ. सुरेंद्र सिंह दंत चिकित्सक, डॉ. रमन, डॉ. भानू प्रताप, डॉ. सौरव, ब्लॉक एक्सटेंशन एजुकेटर जसवीर रंगा, हेल्थ इंस्पेक्टर सतीश कुमार, एलएचवी सुशीला देवी, नर्सिंग ऑफिसर सुषमा देवी, आईसीएन पूनम रंगा, दर्शन कुमार, नीरज दुआ, नरेश कुमार और अन्य स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे।
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