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Rohtak News: आर्यवीर दल ने लाठी-भाला संचालन का दिया प्रशिक्षण
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सार्वदेशिक आर्यवीर दल और गुरुकुल विश्वभारती की ओर से चल रहे विशेष व्यायाम प्रशिक्षण एवं चरित्र निर्माण शिविर में शुक्रवार को लाठी-भाला संचालन का अभ्यास कराया गया। बौद्धिक कक्षा में गुरुकुल संस्थापक आचार्य हरिदत्त ने आर्यवीरों से माता-पिता, गुरु और वृद्धजनों का सम्मान एवं सेवा करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जो बच्चे माता-पिता की सेवा करते हैं, उनकी आयु, विद्या, यश और बल चार चीजें हमेशा बढ़ती हैं।
उन्होंने कहा कि माता के समान कोई दूसरा गुरु नहीं है और पिता ही सबसे श्रेष्ठ तपस्या है। हरेक पुत्र को चाहिए कि वह पिता के उत्तम व्रत, दया, सहानुभूति, अतिथि सेवा और प्रभु उपासना आदि गुणों का आचरण करें। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य लोकहित के कार्य करता है, तो उससे उसकी निकटता प्रभु से बढ़ती चली जाती है और उसे प्रभु की शक्ति एवं पवित्रता का लाभ प्राप्त होता है। शिविराध्यक्ष आचार्य संदीप ने कहा कि हमारा घर एक मंदिर है और उसमें उपस्थित माता-पिता हमारे देव हैं। यदि आप उनके किए उपकार का कुछ कर्ज चुकाना चाहते हो, उनकी सेवा–रक्षा करें। यदि ऐसा करेंगे तो जीवनभर चेहरे पर मुस्कुराहट होगी।
इससे ईश्वर भी आपसे प्रसन्न होंगे और आपको इस जन्म-जन्मों तक सुख, शांति, आनंद उत्साह एवं प्रसन्नता मिलेगी। इस मौके पर शिविर व्यवस्थापक स्वामी सच्चिदानंद, गुरुकुल निदेशक आचार्य नंदकिशोर, प्रधान व्यायाम शिक्षक प्रवीण आर्य, गोवर्धन, आचार्य प्रवीण योगी, सुरेंद्र आर्य चंदेनी, पहलवान नरेश आर्य, जगवीर आर्य, कौशल आर्य, संतराम आर्य, जयपाल आर्य, करण आर्य, रामनिवास आर्य, शेखर आर्य, सन्नी आर्य व सागर आर्य आदि की उपस्थिति रही।
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उन्होंने कहा कि माता के समान कोई दूसरा गुरु नहीं है और पिता ही सबसे श्रेष्ठ तपस्या है। हरेक पुत्र को चाहिए कि वह पिता के उत्तम व्रत, दया, सहानुभूति, अतिथि सेवा और प्रभु उपासना आदि गुणों का आचरण करें। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य लोकहित के कार्य करता है, तो उससे उसकी निकटता प्रभु से बढ़ती चली जाती है और उसे प्रभु की शक्ति एवं पवित्रता का लाभ प्राप्त होता है। शिविराध्यक्ष आचार्य संदीप ने कहा कि हमारा घर एक मंदिर है और उसमें उपस्थित माता-पिता हमारे देव हैं। यदि आप उनके किए उपकार का कुछ कर्ज चुकाना चाहते हो, उनकी सेवा–रक्षा करें। यदि ऐसा करेंगे तो जीवनभर चेहरे पर मुस्कुराहट होगी।
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इससे ईश्वर भी आपसे प्रसन्न होंगे और आपको इस जन्म-जन्मों तक सुख, शांति, आनंद उत्साह एवं प्रसन्नता मिलेगी। इस मौके पर शिविर व्यवस्थापक स्वामी सच्चिदानंद, गुरुकुल निदेशक आचार्य नंदकिशोर, प्रधान व्यायाम शिक्षक प्रवीण आर्य, गोवर्धन, आचार्य प्रवीण योगी, सुरेंद्र आर्य चंदेनी, पहलवान नरेश आर्य, जगवीर आर्य, कौशल आर्य, संतराम आर्य, जयपाल आर्य, करण आर्य, रामनिवास आर्य, शेखर आर्य, सन्नी आर्य व सागर आर्य आदि की उपस्थिति रही।
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