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आजादी के आंदोलन में आर्य समाज में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका : स्वामी आर्यवेश
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रोहतक। आजादी के आंदोलन में आर्य समाज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों ने राष्ट्रवाद, स्वाभिमान और सामाजिक चेतना को नई दिशा दी। स्वामी इंद्रवेश विद्यापीठ आश्रम टिटोली में वीरवार से शुरू हुए तीन दिवसीय चिंतन शिविर के शुभारंभ पर स्वामी आर्यवेश ने ये बात कही।
वैदिक विरक्त मंडल एवं सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में शिविर शुरू हुआ। शिविर में देशभर से आए आर्य समाज के पांच दर्जन से अधिक संन्यासी राष्ट्रीय एवं सामाजिक विषयों पर गहन मंथन करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान स्वामी आर्यवेश ने की।
वैदिक विरक्त मंडल के प्रधान स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने ध्वजरोहण कर शिविर का विधिवत उद्घाटन किया। कार्यक्रम का संचालन मथुरा से पधारे संगठन महामंत्री स्वामी सौम्यानंद ने किया। स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने कहा कि धर्म के क्षेत्र में फैले पाखंड, अंधविश्वास और कुरीतियों का सबसे सशक्त विरोध महर्षि दयानंद ने किया।
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शिविर में हिमाचल प्रदेश से स्वामी वेदप्रकाश, मथुरा से योगानंद्र, अलीगढ़ से आत्मानंद, मध्यप्रदेश से स्वामी सूर्यवेश सहित ओडिशा, छत्तीसगढ़, राजस्थान और दिल्ली से आए संन्यासियों ने भाग लेकर अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए।
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वैदिक विरक्त मंडल एवं सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में शिविर शुरू हुआ। शिविर में देशभर से आए आर्य समाज के पांच दर्जन से अधिक संन्यासी राष्ट्रीय एवं सामाजिक विषयों पर गहन मंथन करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान स्वामी आर्यवेश ने की।
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वैदिक विरक्त मंडल के प्रधान स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने ध्वजरोहण कर शिविर का विधिवत उद्घाटन किया। कार्यक्रम का संचालन मथुरा से पधारे संगठन महामंत्री स्वामी सौम्यानंद ने किया। स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने कहा कि धर्म के क्षेत्र में फैले पाखंड, अंधविश्वास और कुरीतियों का सबसे सशक्त विरोध महर्षि दयानंद ने किया।
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शिविर में हिमाचल प्रदेश से स्वामी वेदप्रकाश, मथुरा से योगानंद्र, अलीगढ़ से आत्मानंद, मध्यप्रदेश से स्वामी सूर्यवेश सहित ओडिशा, छत्तीसगढ़, राजस्थान और दिल्ली से आए संन्यासियों ने भाग लेकर अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए।