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सेना दिवस विशेष: पाक की पनडुब्बी को डुबोने पर मिला था वीर चक्र, आज भी गौरवान्वित होते हैं कमांडर इंद्र सिंह

Sat, 14 Jan 2023 12:42 PM IST
निवेदिता वर्मा विकास सैनी, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
विकास सैनी, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 14 Jan 2023 12:42 PM IST
सार

कमांडर इंद्र सिंह किसान परिवार से संबंध रखते थे। किसान चौधरी जागे राम के बेटे रतिराम के घर पर 4 अक्तूबर 1924 को इनका जन्म हुआ। इस दिन कई दिनों के बाद वर्षा हुई थी। इसलिए परिजनों ने इनका नाम वर्षा के देव इंद्र के नाम पर इंद्र सिंह रखा।

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Army Day: Inspiring Story of Vir Chakra winner commander indra singh
वीर चक्र विजेता कमांडर इंद्र सिंह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत-पाक के 1971 युद्ध का वह दिन आज भी ताजा है। हमारे विमान वाहक युद्धपोत विक्रांत को डुबोने के लिए पाक ने अपनी पनडुब्बी गाजी भेजी थी। उस समय मैं आईएनएस राजपूत जहाज पर बतौर कमांडर तैनात था। हमने पनडुब्बी गाजी को निशाना बना कर नेस्तनाबूद किया। पनडुब्बी के मलबे मिलने के बाद इसके मार गिराने की पुष्टि हुई। यह सबसे बड़ी खुशी थी। इसके बाद पूरे जहाज पर जश्न का माहौल बन गया। गाजी डुबोने पर मुझे वीर चक्र मिला। इस पर अब भी गर्व होता है। यह कहना है आईएनएस राजपूत जहाज के कमांडर इंद्र सिंह का। 

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अमर उजाला से सेना दिवस से पूर्व आंवली हाल झंग कॉलोनी निवासी 99 वर्षीय वीर चक्र विजेता कमांडर इंद्र सिंह ने अपनी वीरता की कहानी साझा की। वीर चक्र विजेता ने कहा कि सेना को जानकारी मिली थी कि पाक ने हमारी सैन्य शक्ति कमजोर करने के लिए विक्रांत को डुबोने की तैयारी की है। इसे हर हाल में बचाना है। इसके चलते विशाखापट्टनम में तैनात विक्रांत को अंडमान निकोबार द्वीप समूहों के बीच सुरक्षित कर दिया।
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पाक से गाजी के विशाखापट्टनम पहुंचने से पहले यह काम कर दिया गया। साथ ही विक्रांत की जगह अपना आईएनएस राजपूत जहाज लेकर पहुंचा। इससे लगातार विक्रांत के नाम से संदेश जारी करता रहा। दुश्मन भी इसी फिराक में था। वह विक्रांत को तलाशते हुए जहाज के ठीक नीचे पहुंच गया। उनकी हरकत नजर आते ही जहाज से समुद्र के अंदर फायर किया। इसके बाद एक तेज धमाका हुआ। हमारा जहाज पूरी तरह दहल गया। सुबह उठे तो मछुवारे पाक सेना के जवानों की लाइफ सेविंग जैकेट व अन्य सामान लेकर पहुंचे। इसके बाद गोताखोर भेजकर गाजी के डूबने की पुष्टि की गई। यह पुष्टि पूरी सेना के लिए खुशी की लहर लाने वाली रही। उत्साहित जवान अपने पोत लेकर कराची तक घुस गए। अपनी विजय पताका फहराई। इसके लिए सरकार ने तलवार भेंट कर सम्मानित किया। 
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किसान परिवार में लिया था जन्म 
कमांडर इंद्र सिंह किसान परिवार से संबंध रखते थे। किसान चौधरी जागे राम के बेटे रतिराम के घर पर 4 अक्तूबर 1924 को इनका जन्म हुआ। इस दिन कई दिनों के बाद वर्षा हुई थी। इसलिए परिजनों ने इनका नाम वर्षा के देव इंद्र के नाम पर इंद्र सिंह रखा। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई। पढ़ाई में अच्छे अंक लाने के चलते अध्यापक एवं परिजन उन्हें पसंद करते थे। खेलों में भी उसकी रुचि थी। आठवीं की परीक्षा पास करने के बाद इन्हें उच्च शिक्षा के लिए जाट स्कूल सोनीपत में दाखिल दिलाया गया। यहां से दसवीं पास की। 

नेवी में भर्ती के साथ ही युद्ध में लिया हिस्सा 
जून 1944 में जब दूसरा महायुद्ध अपनी चरम सीमा पर था, उस समय नौजवान इंद्र सिंह रॉयल इंडियन नेवी में नाविक के रूप में भर्ती हो गए। प्रशिक्षण समाप्ति के बाद इन्होंने पूर्वी सेक्टर में युद्ध में भाग लिया। 15 अगस्त 1947 को भारतवर्ष की स्वतंत्रता के साथ ही रॉयल भारतीय नौसेना का नाम भारतीय नौसेना हो गया। अपनी प्रतिभा के बल पर इन्होंने 1957 में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया। 1961 में गोवा मुक्ति ऑपरेशन में गोवा को मुक्त कराने में सक्रिय भूमिका निभाई। 1965 के भारत-पाक युद्ध में इनकी नियुक्ति सुरक्षा के लिए पूर्वी सेक्टर में रही। 


वयोवृद्ध योद्धा दिवस आज 
भारतीय सेनाएं हर वर्ष 14 जनवरी को वयोवृद्ध योद्धा दिवस (वेटरंस दिवस) के रूप में मनाती है। इसी दिन वर्ष 1953 को देश के प्रथम जनरल फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा सेवानिवृत्त हुए थे। इस ऐतिहासिक दिवस की याद को ताजा बनाए रखने की कड़ी में वीरों का सम्मानित किया जाता है।
 

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