{"_id":"6140f8138ebc3e976a2b2926","slug":"an-effigy-of-an-elderly-farmer-made-by-storing-waste-iron-rohtak-news-rtk623987885","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेकार लोहे को संजोकर बनाया बुजुर्ग किसान का पुतला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेकार लोहे को संजोकर बनाया बुजुर्ग किसान का पुतला
विज्ञापन
किसान का पुतला बनाता सुपवा का छात्र साहिल। अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जब कोई वस्तु बेकार हो जाती है तो लोग उसे फेंक देते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो उस कचरे को संजोकर कोई उपयोगी वस्तु बना देते हैं। ऐसा ही काम सुपवा के फाइन आर्ट्स के विद्यार्थी साहिल ने भी किया है। इन्होंने बेकार लोहे को संजोकर झूले पर झूलते हुए एक बुजुर्ग किसान का पुतला बनाया है।
फाइनल ईयर के विद्यार्थी साहिल ने बताया कि लाइव स्टडी में उन्हें वेस्ट से पुतला बनाना सिखाया गया था, उस समय वह तृतीय वर्ष में था। फाइनल ईयर के विद्यार्थियों को वेस्ट से पुतला बनाने का प्रोजेक्ट मिला। सीनियर विद्यार्थियों को यह काम करते देख उनके मन में भी पुतला बनाने का ख्याल आया। इसमें अध्यापकों ने उनका सहयोग दिया। उन्होंने एक बुजुर्ग किसान का पुतला बनाने की सोची और दो माह में यह पुतला तैयार किया।
किसान का शरीर खेत में काम करके हो जाता है मजबूत, इसलिए लोहे को चुना
साहिल ने बताया कि उनके मन में बुजुर्ग किसान का पुतला बनाने की थीम थी। जिसे वह घास, लकड़ी, लोहा आदि किसी वस्तु से बना सकता था। किसान जीवन भर खेत में काम करता है, जिससे उसका शरीर मजबूत हो जाता है। किसान के खिंचे हुए शरीर को दिखाने के लिए उन्होंने बेकार लोहे से पुतला बनाया। वहीं किसान हर प्रकार की तकलीफों जैसे मौसम की मार, कम भाव के बाद भी खुशमिजाज स्वभाव का रहता है। ऐसा ही खुशमिजाज स्वभाव का एक किसान जब शहर पहुंचा तो वह झूला झूलने लगा, ऐसे ही पुतले में किसान को झूला झूलते हुए दिखाया गया है।
विज्ञापन
किसान के जीवन में प्रयोग होने वाले सामान के वेस्ट का किया प्रयोग
पुतले में वहीं वेस्ट प्रयोग किया गया है, जो किसान अपने जीवन में प्रयोग करता है। किसान का सीना फावड़े से बनाया गया है। वहीं खेत के ट्यूबवेल में प्रयोग होने वाली पाइप, साइकिल के पुर्जे भी प्रयोग किए गए हैं। दिमाग के लिए मोटर के पुर्जे का इस्तेमाल किया गया हैं। जिसे खुद ही वेल्डिंग मशीन के सहारे जोड़ा गया है। पुतला जीवंत प्रतीत हो इसके लिए हृदय के स्थान पर एक बल्ब लगाया गया है। उन्होंने सारा लोहा विश्वविद्यालय परिसर से ही लिया है।
वॉल पेंटिंग भी करता है साहिल
साहिल ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसलिए वह पढ़ाई के साथ-साथ अपने फाइन आर्ट्स में सीखे काम को आय के लिए भी प्रयोग करता है। वह खाली समय में कैफे या अन्य स्थलों पर सुंदर वॉल पेंटिंग का कार्य करता है।
विज्ञापन
फाइनल ईयर के विद्यार्थी साहिल ने बताया कि लाइव स्टडी में उन्हें वेस्ट से पुतला बनाना सिखाया गया था, उस समय वह तृतीय वर्ष में था। फाइनल ईयर के विद्यार्थियों को वेस्ट से पुतला बनाने का प्रोजेक्ट मिला। सीनियर विद्यार्थियों को यह काम करते देख उनके मन में भी पुतला बनाने का ख्याल आया। इसमें अध्यापकों ने उनका सहयोग दिया। उन्होंने एक बुजुर्ग किसान का पुतला बनाने की सोची और दो माह में यह पुतला तैयार किया।
विज्ञापन
किसान का शरीर खेत में काम करके हो जाता है मजबूत, इसलिए लोहे को चुना
साहिल ने बताया कि उनके मन में बुजुर्ग किसान का पुतला बनाने की थीम थी। जिसे वह घास, लकड़ी, लोहा आदि किसी वस्तु से बना सकता था। किसान जीवन भर खेत में काम करता है, जिससे उसका शरीर मजबूत हो जाता है। किसान के खिंचे हुए शरीर को दिखाने के लिए उन्होंने बेकार लोहे से पुतला बनाया। वहीं किसान हर प्रकार की तकलीफों जैसे मौसम की मार, कम भाव के बाद भी खुशमिजाज स्वभाव का रहता है। ऐसा ही खुशमिजाज स्वभाव का एक किसान जब शहर पहुंचा तो वह झूला झूलने लगा, ऐसे ही पुतले में किसान को झूला झूलते हुए दिखाया गया है।
विज्ञापन
किसान के जीवन में प्रयोग होने वाले सामान के वेस्ट का किया प्रयोग
पुतले में वहीं वेस्ट प्रयोग किया गया है, जो किसान अपने जीवन में प्रयोग करता है। किसान का सीना फावड़े से बनाया गया है। वहीं खेत के ट्यूबवेल में प्रयोग होने वाली पाइप, साइकिल के पुर्जे भी प्रयोग किए गए हैं। दिमाग के लिए मोटर के पुर्जे का इस्तेमाल किया गया हैं। जिसे खुद ही वेल्डिंग मशीन के सहारे जोड़ा गया है। पुतला जीवंत प्रतीत हो इसके लिए हृदय के स्थान पर एक बल्ब लगाया गया है। उन्होंने सारा लोहा विश्वविद्यालय परिसर से ही लिया है।
वॉल पेंटिंग भी करता है साहिल
साहिल ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसलिए वह पढ़ाई के साथ-साथ अपने फाइन आर्ट्स में सीखे काम को आय के लिए भी प्रयोग करता है। वह खाली समय में कैफे या अन्य स्थलों पर सुंदर वॉल पेंटिंग का कार्य करता है।