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एमडीयू के तरणताल में लाखों के घोटाले का आरोप, प्रशासन ने सिरे से नकारा
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एमडीयू के तरणताल के पुर्ननिमार्ण में घोटाले को लेकर पत्रकारों से वार्ता करते शहीद भगत सिंह छात्?
रोहतक। शहीद भगत सिंह छात्र संगठन ने एमडीयू के तरणताल में लाखों रुपये का घोटाला होने का आरोप लगाया है। संगठन विवि के एक अधिकारी के हवाले से तरणताल के जीर्णोद्धार पर ढाई करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया है। जबकि खर्च इससे करीब दो गुणा अधिक होने की चर्चा है। यही नहीं, विवि के पास फंड का अभाव होने के चलते तरणताल पुराने ठेकेदार को सौंप दिया गया। इधर, विवि प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से नकारा है।
संगठन के अध्यक्ष प्रदीप मोटा ने वीरवार को एक्टिविटी सेंटर में हुई प्रेसवार्ता में विवि प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2017 में विवि के तरणताल का ठेका हुआ था। उस समय तरणताल की हाल जर्जर थी। ठेकेदार को 33 हजार रुपये प्रति माह विश्वविद्यालय को भुगतान करना था। इस संबंध में ठेकेदार ने विवि को कितनी राशि जमा कराई, इसका कोई ब्योरा नहीं दिया गया है। जबकि विवि कुलसचिव से बुधवार को हुई बातचीत में इसका ऑडिट होने का दावा किया गया है। ऑडिट के बावजूद रसीद न दिखाया जाना अपने आपमें सवाल उठाता है। कुल सचिव ने कहा कि विवि प्रशासन ने ठेका पुराने ठेकेदार को पुरानी शर्तों के आधार पर दिया है।
संगठन अध्यक्ष ने कहा कि तरणताल की मरम्मत का कार्य जिस ठेकेदार को दिया गया है, उसने कितनी राशि का क्या काम कराया है, इस संबंध में बिल व अन्य जानकारी दी जाए। सभी बिल सार्वजनिक किए जाएं। इनमें भी गोलमाल का अंदेशा है। विवि प्रशासन की क्या मजबूरी है कि वर्ष 2017 से एक ही ठेकेदार को ठेका दिया जा रहा है। इसकी मरम्मत पर ढाई करोड़ रुपये का खर्च भी विवि प्रशासन ने किया है। इसके बावजूद पुरानी शर्तों पर दिए गए ठेके में नई बढ़ी हुई दर से शुल्क वसूली क्यों की जा रही है। यहां आने वाले लोगों को दो गुणा अधिक शुल्क वसूला जा रहा है। यह भी संदेहास्पद है। इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। विवि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले। इस ओर सात अगस्त तक कार्रवाई नहीं हुई तो आठ अगस्त को तरणताल पर ताला लगा दिया जाएगा।
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तरणताल ठेकेदार का, क्या करेंगे कोच
संगठन अध्यक्ष ने विवि के स्वीमिंग कोच पर भी सवालिया निशान लगाया है। उन्होंने कहा कि तरणताल ठेकेदार को दे दिया गया है। टेंडर के अनुसार अब वह उसका है। वहां वह अपना स्टाफ रखेगा। ऐसे में विवि के स्वीमिंग कोच क्या करेंगे। जबकि वे विवि से मोटी तनख्वाह ले रहे हैं। यही नहीं, विवि प्रशासन इसे स्वयं चलाने में भी सक्षम है। इसके बावजूद ठेका देना समझ से परे है।
नियम के तहत दिया ठेकेदार को टेंडर
विवि के तरणताल का टेंडर हुआ है। यह नियम कानून के तहत ठेकेदार को दिया गया है। वर्ष 2017 में विवि ने ठेकेदार को तरणताल ठेके पर दिया था। इसे एक वर्ष ही चलाया गया था। इसके बाद दो वर्ष का समय ठेकेदार का बच गया था। विवि प्रशासन ने इसे मरम्मत के बाद दुरुस्त करा कर ठेकेदार को दिया है। वे ठेके के तहत तय शुल्क विवि को देगा। विवि ने उसे शेष समय के लिए ही ठेका दिया है। यही नहीं, मरम्मत के बाद ठेकेदार दो वर्ष तक तरणताल की टूटफूट का जिम्मेदार है। इसलिए उसी ठेकेदार को यह ठेका दिया गया है। कहीं किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है। आरोप लगाने वालों को मामला समझ नहीं आया।
- डॉ. देवेंद्र सिंह ढुल, निदेशक
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संगठन के अध्यक्ष प्रदीप मोटा ने वीरवार को एक्टिविटी सेंटर में हुई प्रेसवार्ता में विवि प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2017 में विवि के तरणताल का ठेका हुआ था। उस समय तरणताल की हाल जर्जर थी। ठेकेदार को 33 हजार रुपये प्रति माह विश्वविद्यालय को भुगतान करना था। इस संबंध में ठेकेदार ने विवि को कितनी राशि जमा कराई, इसका कोई ब्योरा नहीं दिया गया है। जबकि विवि कुलसचिव से बुधवार को हुई बातचीत में इसका ऑडिट होने का दावा किया गया है। ऑडिट के बावजूद रसीद न दिखाया जाना अपने आपमें सवाल उठाता है। कुल सचिव ने कहा कि विवि प्रशासन ने ठेका पुराने ठेकेदार को पुरानी शर्तों के आधार पर दिया है।
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संगठन अध्यक्ष ने कहा कि तरणताल की मरम्मत का कार्य जिस ठेकेदार को दिया गया है, उसने कितनी राशि का क्या काम कराया है, इस संबंध में बिल व अन्य जानकारी दी जाए। सभी बिल सार्वजनिक किए जाएं। इनमें भी गोलमाल का अंदेशा है। विवि प्रशासन की क्या मजबूरी है कि वर्ष 2017 से एक ही ठेकेदार को ठेका दिया जा रहा है। इसकी मरम्मत पर ढाई करोड़ रुपये का खर्च भी विवि प्रशासन ने किया है। इसके बावजूद पुरानी शर्तों पर दिए गए ठेके में नई बढ़ी हुई दर से शुल्क वसूली क्यों की जा रही है। यहां आने वाले लोगों को दो गुणा अधिक शुल्क वसूला जा रहा है। यह भी संदेहास्पद है। इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। विवि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले। इस ओर सात अगस्त तक कार्रवाई नहीं हुई तो आठ अगस्त को तरणताल पर ताला लगा दिया जाएगा।
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तरणताल ठेकेदार का, क्या करेंगे कोच
संगठन अध्यक्ष ने विवि के स्वीमिंग कोच पर भी सवालिया निशान लगाया है। उन्होंने कहा कि तरणताल ठेकेदार को दे दिया गया है। टेंडर के अनुसार अब वह उसका है। वहां वह अपना स्टाफ रखेगा। ऐसे में विवि के स्वीमिंग कोच क्या करेंगे। जबकि वे विवि से मोटी तनख्वाह ले रहे हैं। यही नहीं, विवि प्रशासन इसे स्वयं चलाने में भी सक्षम है। इसके बावजूद ठेका देना समझ से परे है।
नियम के तहत दिया ठेकेदार को टेंडर
विवि के तरणताल का टेंडर हुआ है। यह नियम कानून के तहत ठेकेदार को दिया गया है। वर्ष 2017 में विवि ने ठेकेदार को तरणताल ठेके पर दिया था। इसे एक वर्ष ही चलाया गया था। इसके बाद दो वर्ष का समय ठेकेदार का बच गया था। विवि प्रशासन ने इसे मरम्मत के बाद दुरुस्त करा कर ठेकेदार को दिया है। वे ठेके के तहत तय शुल्क विवि को देगा। विवि ने उसे शेष समय के लिए ही ठेका दिया है। यही नहीं, मरम्मत के बाद ठेकेदार दो वर्ष तक तरणताल की टूटफूट का जिम्मेदार है। इसलिए उसी ठेकेदार को यह ठेका दिया गया है। कहीं किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है। आरोप लगाने वालों को मामला समझ नहीं आया।
- डॉ. देवेंद्र सिंह ढुल, निदेशक