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एआई और चैट जीपीटी से नहीं जाएगी नौकरी, आसान होगा काम : प्रो. प्रदीप
Thu, 26 Dec 2024 01:36 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 26 Dec 2024 01:36 PM IST
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रोहतक। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और चैट जीपीटी (वर्चुअल असिस्टेंट एक कंप्यूटर प्रोग्राम) अत्याधुनिक तकनीक है। नई तकनीक के प्रति जागरूक होने के साथ इसकी शिक्षा की भी जरूरत है। जमाना बदल रहा है। जमाने के साथ चलना होगा। तभी तालमेल बैठ सकते हैं। यह कहना है इमसाॅर के प्रो. प्रदीप अहलावत का। वे बुधवार को अमर उजाला कार्यालय में बिजनेस पत्रकारिता विषय पर आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे।
प्रो. प्रदीप ने कहा कि नई तकनीक को नकारात्मकता की सोच से देखने की जरूरत नहीं है। टेक्नोलॉजी किसी की नौकरी नहीं छिनती। यह नौकरी को आसान, गुणवत्तापूर्ण और सुचारू बनाने के लिए है। जब कोई तकनीक आती है, तब पहली बार उसे लोग नकारात्मक दृष्टि से देखते हैं। देश में बीते कई वर्षों में ये हो चुका है। चाहे कंप्यूटर हो या मोबाइल। वर्तमान में यह आमजन की सबसे आवश्यकताओं में से एक है।
आंख बंद कर तकनीक पर न करें भरोसा
उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल आंख बंद करके भी नहीं करना चाहिए। एआई या चैट जीपीटी की मदद से किसी प्रश्न का उत्तर आसानी से मिल जाता है, लेकिन इसमें भी गलती की गुंजाइश रहती है। ऐसे में एआई पर पूर्ण भरोसा न करें। खुद रिसर्च करें, उसके बाद किसी नतीजे पर पहुंचें।
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रचनात्मकता के साथ करें काम
प्रो. प्रदीप ने शेयर ट्रेडिंग व सेंसेक्स की उठापटक पर बढ़ती लोगों की रुचि पर बात की। कहा कि ऐसे ही पाठक की मांग को समझना पत्रकार के लिए जरूरी है। मांग पता रहने पर ही हम सही सूचना दे सकेंगे। ऐसे में नई तकनीक के साथ जुड़ना जरूरी है। उन्होंने रचनात्मकता के साथ काम करने की बात कही। कहा कि यह पत्रकारिता को और बेहतर बनाएगी।
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प्रो. प्रदीप ने कहा कि नई तकनीक को नकारात्मकता की सोच से देखने की जरूरत नहीं है। टेक्नोलॉजी किसी की नौकरी नहीं छिनती। यह नौकरी को आसान, गुणवत्तापूर्ण और सुचारू बनाने के लिए है। जब कोई तकनीक आती है, तब पहली बार उसे लोग नकारात्मक दृष्टि से देखते हैं। देश में बीते कई वर्षों में ये हो चुका है। चाहे कंप्यूटर हो या मोबाइल। वर्तमान में यह आमजन की सबसे आवश्यकताओं में से एक है।
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आंख बंद कर तकनीक पर न करें भरोसा
उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल आंख बंद करके भी नहीं करना चाहिए। एआई या चैट जीपीटी की मदद से किसी प्रश्न का उत्तर आसानी से मिल जाता है, लेकिन इसमें भी गलती की गुंजाइश रहती है। ऐसे में एआई पर पूर्ण भरोसा न करें। खुद रिसर्च करें, उसके बाद किसी नतीजे पर पहुंचें।
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रचनात्मकता के साथ करें काम
प्रो. प्रदीप ने शेयर ट्रेडिंग व सेंसेक्स की उठापटक पर बढ़ती लोगों की रुचि पर बात की। कहा कि ऐसे ही पाठक की मांग को समझना पत्रकार के लिए जरूरी है। मांग पता रहने पर ही हम सही सूचना दे सकेंगे। ऐसे में नई तकनीक के साथ जुड़ना जरूरी है। उन्होंने रचनात्मकता के साथ काम करने की बात कही। कहा कि यह पत्रकारिता को और बेहतर बनाएगी।

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