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सात दिन बाद भी निगम का सर्वे अधूरा, एक दिन में 303 कॉल्स में से 258 ने मांगा राशन

Thu, 16 Apr 2020 12:39 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 16 Apr 2020 12:39 AM IST
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After seven days, the Corporation's survey is incomplete, 258 out of 303 calls in one day sought ration
लघु सचिवालय में बने कोरोना कंट्रोल रूम में अधिनस्थ कर्मचारियों द्वारा फोन पर जानकारी लेने के बा? - फोटो : RohtakCity
लॉकडाउन के पहले चरण में एक तरफ प्रशासन व सामाजिक संस्थाएं साढ़े 3 लाख लोगों को भोजन के पैकेट व साढ़े 14 हजार परिवारों तक राशन पहुंचाने का दावा कर रहे हैं, दूसरी तरफ प्रशासन के हेल्पलाइन नंबर 1950 पर 303 में से 258 कॉल्स सूखे राशन को लेकर आ रही हैं। इससे साफ है कि शत-प्रतिशत घरों तक राशन नहीं पहुंचा है। लॉकडाउन के 21 दिन बाद भी पेट की आग परिवारों को सता रही है।
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पीएम द्वारा लागू किया गया 21 दिन का लॉकडाउन खत्म हो चुका है। अब बुधवार से दूसरे चरण का लॉकडाउन शुरू हो चुका है। जिला प्रशासन की तरफ से प्रवासी व जरूरतमंद लोगों तक राशन व भोजन पहुंचाने की जिम्मेदारी सामाजिक संस्थाओं को दी गई थी। पके भोजन वितरण में अग्रणी रही सति भाई सांई सेवा दल सीएम को बता चुकी है कि वह अकेली लॉकडाउन के दौरान 3 लाख पैकेट बांट चुकी है। इसके अलावा जनसेवा संस्थान व दूसरी संस्थाओं ने भी पका भोजन बांटा है। सभी संस्थाएं मिलकर साढ़े 14 हजार परिवारों को राशन पहुंचा चुकी है। इसके बावजूद हर रोज लोग प्रशासन के हेल्प लाइन नंबर 1950 पर कॉल करके लोग राशन मांग रहे हैं।
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24 घंटे में 4145 लोगों के लिए राशन, 1014 के लिए मांगा पका भोजन
प्रशासन की तरफ से एसडीएम आफिस में हेल्प लाइन नंबर 1950, 01262-244163 व 9468090380 जारी किया गया है। आधारिक आंकड़ों के मुताबिक लॉकडाउन की अवधि में करीब 7252 कॉल आई हैं। इनमें अस्सी प्रतिशत कॉल भोजन से संबंधित हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि लोगों को भोजन की कितनी जरूरत है। इतना ही नहीं, 13 अप्रैल को सुबह 8 बजे से 14 अप्रैल को सुबह 8 बजे तक 303 कॉल आई। इनमें 258 कॉल में 4145 लोगों के लिए राशन मांगा गया। जबकि 26 कॉल में 1014 लोगों के लिए कुक्ड फूड मांगा गया। एक कॉल में दवाई मांगी गई, जबकि 18 कॉल लॉकडाउन व परमिट संबंधी आई हैं।
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छह दिन बाद भी निगम का सर्वे अधूरा, आयुक्त बोले - क्रास चेक करवा रहे
निगम मेयर मनमोहन गोयल ने आठ अप्रैल को हाउस की मीटिंग बुलाई थी, जिसमें तय हुआ था कि पार्षदों के अगुवाई में वार्ड वाइज सर्वे होगा। सर्वे में ऐसे वंचित परिवारों का पता लगाया जाएगा, जिनको अब तक न तो डिपो से राशन मिला है और न किसी सरकारी योजना का लाभ। साथ ही ऐसे परिवार सामाजिक संस्थाओं की सहायता से भी वंचित हैं या नहीं। 9 अप्रैल को जहां वार्डों में कर्मचारी नहीं पहुंचे, ऐसे पहले दिन 25 हजार फार्म ही भरे गए। अगले दिन निगम ने एक सॉफ्टेवयर तैयार करके कई पार्षदों के पास भेज दिया। पार्षदों ने लोगों के पास भेज दिया। जबकि उसे कर्मचारियों द्वारा भरा जाना था। आयुक्त का कहना है कि करीब एक लाख फार्म भरे गए हैं। अब उनको क्रास चेक करवा रहे हैं। क्योंकि फार्मों में काफी संख्या में लोगों ने पूरी जानकारी नहीं दी है।
करीब एक सप्ताह पहले शहर में सर्वे की जिम्मेदारी निगम प्रशासन व अधिकारियों ने ली थी। पार्षदों ने तो वार्ड वाइज पूरा सहयोग किया, लेकिन अभी तक सर्वे पूा नहीं हुआ है। इसमें निगम प्रशासन ही कुछ बता पाएगा। दूसरा जहां तक सामाजिक संस्थाओं द्वारा राशन वितरण का सवाल है, जल्दी ही कुक्ड फूड कम करके राशन वितरण पर जोर देंगे।

- मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम
संस्थाओं से मिले डाटा की जांच पड़ताल अंतिम चरण में है। जल्द पका भोजन कम करके राशन पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।
- मंजुल पालीवाल, संयोजक सामाजिक संस्थाएं
पहले चरण का सर्वे पूरा हो चुका है। करीब एक लाख फार्म आए हैं। अब उनको क्रास चेक करवा रहे हैं। जल्द सरकार को पूरा डाटा भेज दिया जाएगा। इतने बड़े सर्वे में समय तो लगता ही है।
- प्रदीप गोदारा, आयुक्त नगर निगम
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