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अंग्रेजी के बाद एमडीयू के विधि विभाग की प्रवेश प्रक्रिया पर भी कोर्ट का स्टे
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महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) की नए सत्र की दाखिला प्रक्रिया हर दिन मुश्किलों में घिरती जा रही है। अंग्रेजी के बाद अब विधि विभाग की प्रवेश प्रक्रिया पर भी अगले निर्देशों तक रोक दी गई है। अदालत ने छात्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए। विवि के इस विभाग में अब न तो मेरिट सूची जारी होगी और न ही दाखिले के लिए विद्यार्थियों की फीस जमा होगी। जेएमआईसी विवेक सिंह की अदालत में नगमा अंजुम ने न्याय की गुहार लगाई थी। छात्रा ने एमडीयू के खिलाफ दायर की शिकायत में अपना आवेदन पत्र रद्द किए जाने की बात कही है। छात्रा का कहना है कि उसने विधि विभाग में पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स के लिए आवेदन किया था। आवेदन के साथ कक्षा 12वीं के परिणाम की ऑनलाइन जारी हुई प्रति व अपना पिछड़े वर्ग का प्रमाण पत्र भी अपलोड किया था। बाद में यह प्रमाण पत्र अपलोड नहीं होने की बात कही। यह प्रमाण पत्र नहीं होने के चलते मेरा आवेदन रद्द कर दिया गया। जबकि इससे पूर्व मेरा आवेदन स्वीकार करते हुए मेरिट सूची में नाम आने की बात की गई थी। इसलिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अदालत ने केस की सुनवाई करते हुए विधि विभाग की प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
छात्रा नवजीत ने विवि में जमा कराए कोर्ट के ऑर्डर
एमडीयू के विधि विभाग के प्रवेश के लिए आवेदन करने वाली छात्रा नवजीत का आवेदन पत्र भी विवि ने रद्द कर दिया। आल इंडिया कैटेगरी में 92.2 प्रतिशत अंकों के साथ आवेदन करने वाली छात्रा ने विवि के सोफ्टवेयर के हिसाब से स्टेप बाई स्टेप आवेदन के कालम भरे थे। इसके बाद ही सॉफ्टवेयर ने आवेदन स्वीकार किया था। बाद में दस्तावेज अपलोड नहीं होने के कारण आवेदन रद्द कर दिया गया। इस बारे में विवि प्रशासन को ईमेल के जरिए अवगत भी कराया था। विवि में दूसरी काउंसिलिंग के तहत छात्रा को प्रवेश दिया जाना था। जेएमआईसी भरत ने याचिका की सुनवाई करते हुए छात्रा को राहत प्रदान की। छात्रा ने अदालती निर्देशों की प्रति विवि कुलपति, कुलसचिव व एचओडी को सौंपी। हालांकि दाखिला प्रक्रिया पर रोक लगने के चलते उसके दस्तावेज ले लिए गए हैं, मगर दाखिले पर बाद में विचार होगा। अदालत में इस केस की तीन सितंबर को सुनवाई होगी। अधिवक्ता संदीप वर्मा ने छात्रा की ओर से उसका पक्ष रखते हुए विवि की अनदेखी को उजागर किया।
आज होगी काउंसिंलिंग
एमडीयू में वीरवार को दाखिले को लेकर काउंसिंलिंग होगी। कोर्ट से अपनी सीट सुनिश्चित कराने वाले विद्यार्थी काउंसिंलिंग में हिस्सा लेंगे। यही नहीं अदालत में विचाराधीन दाखिला संबंधी केसों की सुनवाई भी होगी। इसमें दो केस विधि विभाग से ही हैं।
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विवि सुधारे सॉफ्टवेयर की खामियां
अधिवक्ता डॉ. दीपक भारद्वाज ने एमडीयू की दाखिला प्रक्रिया पर उठे सवालों पर हुई बातचीत में कहा कि विवि को अपनी ऑनलाइन दाखिला प्रक्रिया को बेहतर बनाना चाहिए। विवि के सॉफ्टवेयर में खामियां है। इन्हें दूर कर व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सकता है। सॉफ्टवेयर की तकनीकी गड़बड़ी के कारण विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। इसके अलावा को बार-बार री-शेड्यूल करना भी विवि अधिकारियों की गंभीरता को दर्शाता है। इस बारे में गहनता से विचार करने की जरूरत है। इसके बगैर नियम बदले जाने की वजह से विद्यार्थी परेशान हो रहे हैं।
कोर्ट केसों पर खर्च हो रहा विद्यार्थियों का पैसा
इनसो प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप देशवाल ने कहा कि विवि की गलती की सजा विद्यार्थियों को भुगतनी पड़ रही है। उन्हें अपान हक पाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। यहां उन्हें वकील व दस्तावेजों पर खर्च न करना पड़े, इसके लिए इनसो अपने स्तर पर उनके केसों की पैरवी कर रहा है। इसके बावजूद विवि के विद्यार्थियों का धन कोर्ट केसों का खर्च हो रहा है। विवि को केसों की पैरवी के लिए वकील करने पड़ रहे हैं। इस पर मोटा खर्च आ रहा है। यह भार विद्यार्थियों पर ही पड़ने वाला है।
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छात्रा नवजीत ने विवि में जमा कराए कोर्ट के ऑर्डर
एमडीयू के विधि विभाग के प्रवेश के लिए आवेदन करने वाली छात्रा नवजीत का आवेदन पत्र भी विवि ने रद्द कर दिया। आल इंडिया कैटेगरी में 92.2 प्रतिशत अंकों के साथ आवेदन करने वाली छात्रा ने विवि के सोफ्टवेयर के हिसाब से स्टेप बाई स्टेप आवेदन के कालम भरे थे। इसके बाद ही सॉफ्टवेयर ने आवेदन स्वीकार किया था। बाद में दस्तावेज अपलोड नहीं होने के कारण आवेदन रद्द कर दिया गया। इस बारे में विवि प्रशासन को ईमेल के जरिए अवगत भी कराया था। विवि में दूसरी काउंसिलिंग के तहत छात्रा को प्रवेश दिया जाना था। जेएमआईसी भरत ने याचिका की सुनवाई करते हुए छात्रा को राहत प्रदान की। छात्रा ने अदालती निर्देशों की प्रति विवि कुलपति, कुलसचिव व एचओडी को सौंपी। हालांकि दाखिला प्रक्रिया पर रोक लगने के चलते उसके दस्तावेज ले लिए गए हैं, मगर दाखिले पर बाद में विचार होगा। अदालत में इस केस की तीन सितंबर को सुनवाई होगी। अधिवक्ता संदीप वर्मा ने छात्रा की ओर से उसका पक्ष रखते हुए विवि की अनदेखी को उजागर किया।
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आज होगी काउंसिंलिंग
एमडीयू में वीरवार को दाखिले को लेकर काउंसिंलिंग होगी। कोर्ट से अपनी सीट सुनिश्चित कराने वाले विद्यार्थी काउंसिंलिंग में हिस्सा लेंगे। यही नहीं अदालत में विचाराधीन दाखिला संबंधी केसों की सुनवाई भी होगी। इसमें दो केस विधि विभाग से ही हैं।
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विवि सुधारे सॉफ्टवेयर की खामियां
अधिवक्ता डॉ. दीपक भारद्वाज ने एमडीयू की दाखिला प्रक्रिया पर उठे सवालों पर हुई बातचीत में कहा कि विवि को अपनी ऑनलाइन दाखिला प्रक्रिया को बेहतर बनाना चाहिए। विवि के सॉफ्टवेयर में खामियां है। इन्हें दूर कर व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सकता है। सॉफ्टवेयर की तकनीकी गड़बड़ी के कारण विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। इसके अलावा को बार-बार री-शेड्यूल करना भी विवि अधिकारियों की गंभीरता को दर्शाता है। इस बारे में गहनता से विचार करने की जरूरत है। इसके बगैर नियम बदले जाने की वजह से विद्यार्थी परेशान हो रहे हैं।
कोर्ट केसों पर खर्च हो रहा विद्यार्थियों का पैसा
इनसो प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप देशवाल ने कहा कि विवि की गलती की सजा विद्यार्थियों को भुगतनी पड़ रही है। उन्हें अपान हक पाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। यहां उन्हें वकील व दस्तावेजों पर खर्च न करना पड़े, इसके लिए इनसो अपने स्तर पर उनके केसों की पैरवी कर रहा है। इसके बावजूद विवि के विद्यार्थियों का धन कोर्ट केसों का खर्च हो रहा है। विवि को केसों की पैरवी के लिए वकील करने पड़ रहे हैं। इस पर मोटा खर्च आ रहा है। यह भार विद्यार्थियों पर ही पड़ने वाला है।