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प्रॉपर्टी टैक्स व बिल्डिंग शाखा में हुए भ्रष्टाचार की जांच करेंगे एडीसी
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नीरज वर्मा
रोहतक। प्रदेश सरकार ने नगर निगम की प्रॉपर्टी टैक्स और बिल्डिंग शाखा में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच एडीसी को सौंप दी है। निगम को आरोपों से संबंधित दस्तावेज प्रशासनिक अधिकारी को देने के आदेश दे दिए हैं। शासन का आदेश बुधवार को आने से निगम में हलचल मच गई है। नगर आयुक्त का कहना है कि जल्द एडीसी को सारे दस्तावेज सौंप दिए जाएंगे। इन्हीं आरोपों की पहले सीटीपी से जांच कराई गई थी, इसमें जेडटीओ, चार लिपिक व दो बेलदारों को दोषी ठहराया गया था। पार्षदों ने सीटीपी की जांच रिपोर्ट को भेदभावपूर्ण बताते हुए इस मामले में चहेतों को बचाने का आरोप लगाया था। इस पर मेयर ने शासन से निष्पक्ष जांच की संस्तुति की थी।
प्रॉपर्टी की गलत आईडी बनाने, फर्जी एनडीसी जारी कर घालमेल करने का था आरोप
निगम हाउस की बैठक 28 सितंबर को बुलाई गई थी। एकजुट पार्षदों ने प्रॉपर्टी टैक्स व बिल्डिंग ब्रांच में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाते हुए सदन का बहिष्कार कर दिया था। आरोप लगाया गया था कि प्रॉपर्टी की गलत आईडी बनाने और फर्जी एनडीसी जारी करके घालमेल किया जा रहा है। अमरूत योजना में हुए कामों में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया गया। इस पर सदन का बहिष्कार करके पार्षदों ने निष्पक्ष जांच करके दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए तीन दिन तक निगम परिसर में धरना दिया था। पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, भाजपा जिलाध्यक्ष अजय बंसल, मेयर मनमोहन गोयल के आश्वासन पर धरना खत्म हुआ। इसके बाद आरोपों की जांच सीटीपी (सीनियर टाउन प्लानर) केके वार्ष्णेय को सौंपी गई। आरोपों की जांच रिपोर्ट में सीटीपी ने प्रॉपर्टी टैक्स शाखा में लंबे समय से जेडटीओ के पद पर तैनात रहे जगदीश चंद्र शर्मा को गड़बड़ियों का दोषी ठहराया। रिपोर्ट आने के बाद नगर आयुक्त ने जगदीश चंद्र शर्मा को तत्काल जेडटीओ पद से हटाकर मूल पद सीपीओ (सिटी प्लानिंग ऑफिसर) पर भेज दिया। इसके अलावा नवनियुक्त चार लिपिक विशाल, देवेंद्र, दिनेश व कमल और बेलदार सचिन व अमित को गड़बड़ी का दोषी बताया। साथ ही नगर आयुक्त ने जेडटीओ के खिलाफ कार्रवाई की शासन से संस्तुति कर दी। हालांकि इस जांच रिपोर्ट के आने के बाद पार्षद संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी लंबे समय से रोहतक निगम में बिल्डिंग ब्रांच में तैनात रहे हैं, इसलिए अपने चहेतों को बचाया गया है। बिल्डिंग ब्रांच को बचाते हुए उन्होंने सिर्फ प्रॉपर्टी टैक्स शाखा पर निशाना बनाया है। पार्षदों के तल्ख तेवर को देख मेयर मनमोहन गोयल ने प्रदेश सरकार से निष्पक्ष जांच कराने के लिए कहा। इस पर बुधवार को शासन ने एडीसी महेंद्रपाल को आरोपों की निष्पक्ष जांच करने के आदेश दिए हैं। शासन से एडीसी को जांच अधिकारी नियुक्त किए जाने से निगम में बुधवार को हड़कंप की स्थिति बनी रही।
वर्जन
शासन ने पार्षदों के आरोपों की जांच एडीसी महेंद्रपाल से कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। जल्द ही पार्षदों के आरोपों के साथ-साथ संबंधित दस्तावेज जांच अधिकारी को सौंप दिए जाएंगे।
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- नगर आयुक्त डॉ. नरहरि बांगड़
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अब सीटीपी की जांच रिपोर्ट में हकीकत आएगी सामने
एडीसी को शासन स्तर से जांच सौंपने के मामले में पार्षदों ने संतुष्टि जाहिर की है। पार्षद सुनील समेत कई अन्य का कहना है कि अब जांच होने पर हकीकत सामने आएगी। यह भी साफ हो जाएगा कि सीटीपी ने अपने चहेतों को बचाया या नहीं।
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रोहतक। प्रदेश सरकार ने नगर निगम की प्रॉपर्टी टैक्स और बिल्डिंग शाखा में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच एडीसी को सौंप दी है। निगम को आरोपों से संबंधित दस्तावेज प्रशासनिक अधिकारी को देने के आदेश दे दिए हैं। शासन का आदेश बुधवार को आने से निगम में हलचल मच गई है। नगर आयुक्त का कहना है कि जल्द एडीसी को सारे दस्तावेज सौंप दिए जाएंगे। इन्हीं आरोपों की पहले सीटीपी से जांच कराई गई थी, इसमें जेडटीओ, चार लिपिक व दो बेलदारों को दोषी ठहराया गया था। पार्षदों ने सीटीपी की जांच रिपोर्ट को भेदभावपूर्ण बताते हुए इस मामले में चहेतों को बचाने का आरोप लगाया था। इस पर मेयर ने शासन से निष्पक्ष जांच की संस्तुति की थी।
प्रॉपर्टी की गलत आईडी बनाने, फर्जी एनडीसी जारी कर घालमेल करने का था आरोप
निगम हाउस की बैठक 28 सितंबर को बुलाई गई थी। एकजुट पार्षदों ने प्रॉपर्टी टैक्स व बिल्डिंग ब्रांच में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाते हुए सदन का बहिष्कार कर दिया था। आरोप लगाया गया था कि प्रॉपर्टी की गलत आईडी बनाने और फर्जी एनडीसी जारी करके घालमेल किया जा रहा है। अमरूत योजना में हुए कामों में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया गया। इस पर सदन का बहिष्कार करके पार्षदों ने निष्पक्ष जांच करके दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए तीन दिन तक निगम परिसर में धरना दिया था। पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, भाजपा जिलाध्यक्ष अजय बंसल, मेयर मनमोहन गोयल के आश्वासन पर धरना खत्म हुआ। इसके बाद आरोपों की जांच सीटीपी (सीनियर टाउन प्लानर) केके वार्ष्णेय को सौंपी गई। आरोपों की जांच रिपोर्ट में सीटीपी ने प्रॉपर्टी टैक्स शाखा में लंबे समय से जेडटीओ के पद पर तैनात रहे जगदीश चंद्र शर्मा को गड़बड़ियों का दोषी ठहराया। रिपोर्ट आने के बाद नगर आयुक्त ने जगदीश चंद्र शर्मा को तत्काल जेडटीओ पद से हटाकर मूल पद सीपीओ (सिटी प्लानिंग ऑफिसर) पर भेज दिया। इसके अलावा नवनियुक्त चार लिपिक विशाल, देवेंद्र, दिनेश व कमल और बेलदार सचिन व अमित को गड़बड़ी का दोषी बताया। साथ ही नगर आयुक्त ने जेडटीओ के खिलाफ कार्रवाई की शासन से संस्तुति कर दी। हालांकि इस जांच रिपोर्ट के आने के बाद पार्षद संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी लंबे समय से रोहतक निगम में बिल्डिंग ब्रांच में तैनात रहे हैं, इसलिए अपने चहेतों को बचाया गया है। बिल्डिंग ब्रांच को बचाते हुए उन्होंने सिर्फ प्रॉपर्टी टैक्स शाखा पर निशाना बनाया है। पार्षदों के तल्ख तेवर को देख मेयर मनमोहन गोयल ने प्रदेश सरकार से निष्पक्ष जांच कराने के लिए कहा। इस पर बुधवार को शासन ने एडीसी महेंद्रपाल को आरोपों की निष्पक्ष जांच करने के आदेश दिए हैं। शासन से एडीसी को जांच अधिकारी नियुक्त किए जाने से निगम में बुधवार को हड़कंप की स्थिति बनी रही।
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शासन ने पार्षदों के आरोपों की जांच एडीसी महेंद्रपाल से कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। जल्द ही पार्षदों के आरोपों के साथ-साथ संबंधित दस्तावेज जांच अधिकारी को सौंप दिए जाएंगे।
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अब सीटीपी की जांच रिपोर्ट में हकीकत आएगी सामने
एडीसी को शासन स्तर से जांच सौंपने के मामले में पार्षदों ने संतुष्टि जाहिर की है। पार्षद सुनील समेत कई अन्य का कहना है कि अब जांच होने पर हकीकत सामने आएगी। यह भी साफ हो जाएगा कि सीटीपी ने अपने चहेतों को बचाया या नहीं।