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Rohtak News: 550 रुपये का बटुआ एक साल में फटा, कंपनी दे 6000 रुपये हर्जाना
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माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। जिला उपभोक्ता आयोग ने फैसला दिया है कि पांच साल की गारंटी के बावजूद एक साल में बटुआ फटने पर जयपुर की कंपनी 6 हजार रुपये हर्जाना व कानूनी खर्च दे। साथ ही लागत राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित लौटानी होगी।
प्रेम नगर चौक निवासी अनिल ने 2023 में आयोग में दायर याचिका में बताया कि वे मूलरूप से गोहाना के गांधी नगर के रहने वाले हैं। उन्होंने जयपुर की कंपनी सांगानेर आर्ट बाजार एंड जेम्स फैक्टरी का अगस्त 2019 में 550 रुपये का एक वॉलेट (बटुआ) खरीदा।
कंपनी ने कार्ड जारी करके पांच साल की गारंटी दी थी। इसके बावजूद एक साल में ही बटुआ क्षतिग्रस्त हो गया। उसमें से धागे निकलने लगे हैं। उन्होंने कंपनी को ई-मेल, फोन और गूगल चैट के माध्यम से कई बार बटुआ बदलने का अनुरोध किया लेकिन कोई जवाब नहीं आया।
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नोटिस के बावजूद बटुआ नहीं बदला गया तो अनिल ने आयोग में अर्जी दायर की। आयोग के नोटिस में कंपनी ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास पर्स खरीदने का कोई बिल या दस्तावेज नहीं है। कंपनी का बटुआ बनाने या उत्पादन करने का कोई कारोबार नहीं है।
ऐसे में बटुए पर गारंटी या वारंटी देने का कोई सवाल ही नहीं उठता। साथ ही यह भी कहा कि अगर शिकायतकर्ता कोई रसीद दिखाता है तो बटुआ बदल दिया जाएगा। याचिकाकर्ता ने आयोग के सामने गारंटी कार्ड रखा।
कार्ड के पीछे की तरफ गहनों, धातु के बर्तनों और कपड़े के उत्पाद की गारंटी का जिक्र किया गया था। कंपनी ने 550 रुपये गुगल पे से देने की पेशकश की लेकिन याचिकाकर्ता ने अर्जी उठाने से इन्कार कर दिया। आयोग ने निर्णय देते हुए कहा है कि बटुआ की लागत राशि 550 रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित लौटाई जाए। सेवा में कमी व कानूनी खर्च के तौर पर 6000 रुपये एक माह में दिए जाएं।
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रोहतक। जिला उपभोक्ता आयोग ने फैसला दिया है कि पांच साल की गारंटी के बावजूद एक साल में बटुआ फटने पर जयपुर की कंपनी 6 हजार रुपये हर्जाना व कानूनी खर्च दे। साथ ही लागत राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित लौटानी होगी।
प्रेम नगर चौक निवासी अनिल ने 2023 में आयोग में दायर याचिका में बताया कि वे मूलरूप से गोहाना के गांधी नगर के रहने वाले हैं। उन्होंने जयपुर की कंपनी सांगानेर आर्ट बाजार एंड जेम्स फैक्टरी का अगस्त 2019 में 550 रुपये का एक वॉलेट (बटुआ) खरीदा।
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कंपनी ने कार्ड जारी करके पांच साल की गारंटी दी थी। इसके बावजूद एक साल में ही बटुआ क्षतिग्रस्त हो गया। उसमें से धागे निकलने लगे हैं। उन्होंने कंपनी को ई-मेल, फोन और गूगल चैट के माध्यम से कई बार बटुआ बदलने का अनुरोध किया लेकिन कोई जवाब नहीं आया।
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नोटिस के बावजूद बटुआ नहीं बदला गया तो अनिल ने आयोग में अर्जी दायर की। आयोग के नोटिस में कंपनी ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास पर्स खरीदने का कोई बिल या दस्तावेज नहीं है। कंपनी का बटुआ बनाने या उत्पादन करने का कोई कारोबार नहीं है।
ऐसे में बटुए पर गारंटी या वारंटी देने का कोई सवाल ही नहीं उठता। साथ ही यह भी कहा कि अगर शिकायतकर्ता कोई रसीद दिखाता है तो बटुआ बदल दिया जाएगा। याचिकाकर्ता ने आयोग के सामने गारंटी कार्ड रखा।
कार्ड के पीछे की तरफ गहनों, धातु के बर्तनों और कपड़े के उत्पाद की गारंटी का जिक्र किया गया था। कंपनी ने 550 रुपये गुगल पे से देने की पेशकश की लेकिन याचिकाकर्ता ने अर्जी उठाने से इन्कार कर दिया। आयोग ने निर्णय देते हुए कहा है कि बटुआ की लागत राशि 550 रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित लौटाई जाए। सेवा में कमी व कानूनी खर्च के तौर पर 6000 रुपये एक माह में दिए जाएं।