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नई ट्रांसफर पॉलिसी बनाकर शीघ्र शुरू की जाए तबादला प्रक्रिया : अशोक शर्मा
Sat, 30 May 2026 02:05 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sat, 30 May 2026 02:05 AM IST
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30-अशोक शर्मा, राज्य प्रधान स्कूल कैडर लेक्चरर एसोसिएशन हरियाणा
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। स्कूल कैडर लेक्चरर एसोसिएशन हरियाणा (सलाह) के राज्य प्रधान अशोक शर्मा ने बयान जारी कर प्रदेश सरकार से मांग की है कि न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नई, पारदर्शी एवं व्यावहारिक ट्रांसफर पॉलिसी बनाकर शीघ्र तबादला प्रक्रिया शुरू की जाए ताकि ग्रीष्मकालीन अवकाश से पूर्व विद्यालयों में शिक्षकों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित हो सके व विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
अशोक शर्मा ने कहा कि लंबे समय से नियमित तबादला प्रक्रिया नहीं होने के कारण विद्यालयों में शिक्षकों का संतुलन बिगड़ गया है। कई विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ अध्यापकों की कमी है। कुछ विद्यालयों में आवश्यकता से अधिक स्टाफ कार्यरत है। इस स्थिति का प्रतिकूल प्रभाव विद्यार्थियों की शिक्षा एवं परीक्षा परिणामों पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में लागू ऑनलाइन ट्रांसफर नीति ने शिक्षा विभाग में पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं जवाबदेही को बढ़ावा दिया था और शिक्षकों ने इसका स्वागत किया था। वर्तमान परिस्थितियों में भी ऐसी ही पारदर्शी व्यवस्था की आवश्यकता है जिससे योग्य एवं जरूरतमंद शिक्षकों को न्यायसंगत अवसर मिल सके।
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रोहतक। स्कूल कैडर लेक्चरर एसोसिएशन हरियाणा (सलाह) के राज्य प्रधान अशोक शर्मा ने बयान जारी कर प्रदेश सरकार से मांग की है कि न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नई, पारदर्शी एवं व्यावहारिक ट्रांसफर पॉलिसी बनाकर शीघ्र तबादला प्रक्रिया शुरू की जाए ताकि ग्रीष्मकालीन अवकाश से पूर्व विद्यालयों में शिक्षकों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित हो सके व विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
अशोक शर्मा ने कहा कि लंबे समय से नियमित तबादला प्रक्रिया नहीं होने के कारण विद्यालयों में शिक्षकों का संतुलन बिगड़ गया है। कई विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ अध्यापकों की कमी है। कुछ विद्यालयों में आवश्यकता से अधिक स्टाफ कार्यरत है। इस स्थिति का प्रतिकूल प्रभाव विद्यार्थियों की शिक्षा एवं परीक्षा परिणामों पर पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में लागू ऑनलाइन ट्रांसफर नीति ने शिक्षा विभाग में पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं जवाबदेही को बढ़ावा दिया था और शिक्षकों ने इसका स्वागत किया था। वर्तमान परिस्थितियों में भी ऐसी ही पारदर्शी व्यवस्था की आवश्यकता है जिससे योग्य एवं जरूरतमंद शिक्षकों को न्यायसंगत अवसर मिल सके।
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