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Rohtak News: दांत, जबड़े और चेहरे की हड्डियों की जांच के लिए लगेगी सीबीसीटी मशीन
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अभिषेक कीरत
रोहतक। पीजीआई में मरीजों को जल्द दांत, जबड़े और चेहरे की हड्डियों की थ्री-डी जांच की अत्याधुनिक सुविधा दोबारा मिलने वाली है। मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा की अध्यक्षता वाली हाई पावर परचेज कमेटी ने 68 लाख रुपये की नई सीबीसीटी मशीन की खरीद को मंजूरी दी है। यह मशीन नवंबर में लगाई जाएगी। इससे कैंसर की शुरुआती पहचान, इम्प्लांट और जटिल सर्जरी में सटीकता बढ़ेगी। शोध की गुणवत्ता में भी बड़ा सुधार होगा।
ओरल मेडिसिन विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अंबिका ने बताया कि सीबीसीटी सामान्य एक्स-रे से अलग है। सामान्य एक्स-रे में दांतों की 2-डी तस्वीर आती है, जबकि सीबीसीटी की कोन आकार की बीम कुछ ही सेकंड में सिर के चारों ओर घूमकर सैकड़ों तस्वीरें लेती है। कंप्यूटर इन तस्वीरों को जोड़कर मुंह का पूरा थ्री-डी मॉडल तैयार करता है। इससे जबड़े की हड्डी की मोटाई, नसों का सटीक रास्ता और दांत की जड़ों की असली बनावट साफ दिख जाती है।
पुरानी मशीन 10 साल सेवा के बाद हुई खराब, नई में एडवांस फीचर
यूएचएसआर के जनसंपर्क विभाग के सीनियर प्रोफेसर इंचार्ज मंजूनाथ बीसी ने बताया कि पीजीआईडीएस की पुरानी सीबीसीटी मशीन वर्ष 2015 में लगाई गई थी। इस मशीन ने दस साल में पंद्रह हजार से अधिक मरीजों की सेवा की। नई मशीन में ऑटो पोजिशनिंग, बेहतर रिजोल्यूशन जैसे फीचर शामिल हैं।
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वर्जन
पीजीआई में मरीजों की देखभाल व दंत चिकित्सा शिक्षा में लगातार प्रगति कर रहा है। ओरल मेडिसिन विभाग में ओरल कैंसर और प्री-कैंसर के लिए उत्कृष्टता केंद्र हरियाणा सरकार के सहयोग से संचालित है।
प्रो. डॉ. एचके अग्रवाल, कुलपति, स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक।
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रोहतक। पीजीआई में मरीजों को जल्द दांत, जबड़े और चेहरे की हड्डियों की थ्री-डी जांच की अत्याधुनिक सुविधा दोबारा मिलने वाली है। मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा की अध्यक्षता वाली हाई पावर परचेज कमेटी ने 68 लाख रुपये की नई सीबीसीटी मशीन की खरीद को मंजूरी दी है। यह मशीन नवंबर में लगाई जाएगी। इससे कैंसर की शुरुआती पहचान, इम्प्लांट और जटिल सर्जरी में सटीकता बढ़ेगी। शोध की गुणवत्ता में भी बड़ा सुधार होगा।
ओरल मेडिसिन विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अंबिका ने बताया कि सीबीसीटी सामान्य एक्स-रे से अलग है। सामान्य एक्स-रे में दांतों की 2-डी तस्वीर आती है, जबकि सीबीसीटी की कोन आकार की बीम कुछ ही सेकंड में सिर के चारों ओर घूमकर सैकड़ों तस्वीरें लेती है। कंप्यूटर इन तस्वीरों को जोड़कर मुंह का पूरा थ्री-डी मॉडल तैयार करता है। इससे जबड़े की हड्डी की मोटाई, नसों का सटीक रास्ता और दांत की जड़ों की असली बनावट साफ दिख जाती है।
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पुरानी मशीन 10 साल सेवा के बाद हुई खराब, नई में एडवांस फीचर
यूएचएसआर के जनसंपर्क विभाग के सीनियर प्रोफेसर इंचार्ज मंजूनाथ बीसी ने बताया कि पीजीआईडीएस की पुरानी सीबीसीटी मशीन वर्ष 2015 में लगाई गई थी। इस मशीन ने दस साल में पंद्रह हजार से अधिक मरीजों की सेवा की। नई मशीन में ऑटो पोजिशनिंग, बेहतर रिजोल्यूशन जैसे फीचर शामिल हैं।
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पीजीआई में मरीजों की देखभाल व दंत चिकित्सा शिक्षा में लगातार प्रगति कर रहा है। ओरल मेडिसिन विभाग में ओरल कैंसर और प्री-कैंसर के लिए उत्कृष्टता केंद्र हरियाणा सरकार के सहयोग से संचालित है।
प्रो. डॉ. एचके अग्रवाल, कुलपति, स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक।