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पूर्व महिला सरपंच ने बैरंग लौटाया ग्राम सचिव
Rohtak
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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बाढड़ा (भिवानी)। गांव डालावास में ग्राम पंचायत का रिकार्ड लेने गए ग्राम सचिव को पूर्व महिला सरपंच ने बैरंग लौटा दिया। ढाई वर्ष में रिकार्ड न मिलने के चलते नए सरपंच को ग्राम विकास के लिए धनराशि नहीं मिल पा रही और वह गांव में कोई कार्य नहीं कर पा रहे।
प्रदेश सरकार द्वारा 6 जून 2010 को पंच-सरपंच एवं पंचायत प्रतिनिधियों का आम चुनाव कराए गए थे। इसमें मंदीप श्योराण को डालावास का सरपंच निर्वाचित घोषित किया गया। आज तक उन्हें रिकार्ड व चार्ज नहीं मिल पाया है। इस मामले में एसडीएम पूर्व सरपंच के लिए सर्च वारंट भी जारी कर चुके हैं। विकास एवं पंचायत विभाग ने पूर्व व मौजूदा सरपंच को नोटिस भेज कर 22 नवंबर तक समस्त रिकार्ड ग्राम सचिव को सौंपने का आदेश दिया था। कार्यालय में किसी पक्ष द्वारा न पहुंचने पर आखिरकार बीडीपीओ भूपसिंह श्योराण ने ग्राम सचिव धर्मबीर सिंह को पूर्व सरपंच सुमन देवी के आवास पर भेजा लेकिन उसने ग्राम सचिव को रिकार्ड देने से साफ इंकार कर दिया। इससे ग्राम सचिव को बैरंग लौटना पड़ा।
ग्राम पंचायत का रिकार्ड न मिलने से अब मौजूदा सरपंच किसी प्रकार की विकास योजनाओं में भागीदारी नहीं कर सकता जिससे समस्त गांव में विकास कार्य ठप पड़े हुए हैं। अब विकास एवं पंचायत के सामने विकट हालात पैदा हो गए हैं। इस मामले में रोचक पहलू यह है कि ग्राम पंचायत के रिकार्ड देने व लेने के लिए भूतपूर्व महिला सरपंच व मौजूदा सरपंच में से कोई पक्ष ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहा है जबकि इस मामले का भंडाफोड़ भी गांव के आनंद पुत्र दलबीर सिंह की आरटीआई से हुआ। ग्राम पंचायत के खाते में लगभग बीस लाख की धनराशि बताई जा रही है लेकिन इसे ग्रामीण विकास पर खर्च कौन करेगा, इसे लेकर सवाल खड़ा हो गया है।
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पूर्व महिला सरपंच ने किया कानून का उल्लंघन : बीडीपीओ
इस संबंध में बीडीपीओ भूपसिंह श्योराण ने बताया कि ग्राम सचिव को रिकार्ड न देकर पूर्व महिला सरपंच ने कानून का उल्लंघन किया है। इस मामले में जल्द ही पंचायती राज अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
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प्रदेश सरकार द्वारा 6 जून 2010 को पंच-सरपंच एवं पंचायत प्रतिनिधियों का आम चुनाव कराए गए थे। इसमें मंदीप श्योराण को डालावास का सरपंच निर्वाचित घोषित किया गया। आज तक उन्हें रिकार्ड व चार्ज नहीं मिल पाया है। इस मामले में एसडीएम पूर्व सरपंच के लिए सर्च वारंट भी जारी कर चुके हैं। विकास एवं पंचायत विभाग ने पूर्व व मौजूदा सरपंच को नोटिस भेज कर 22 नवंबर तक समस्त रिकार्ड ग्राम सचिव को सौंपने का आदेश दिया था। कार्यालय में किसी पक्ष द्वारा न पहुंचने पर आखिरकार बीडीपीओ भूपसिंह श्योराण ने ग्राम सचिव धर्मबीर सिंह को पूर्व सरपंच सुमन देवी के आवास पर भेजा लेकिन उसने ग्राम सचिव को रिकार्ड देने से साफ इंकार कर दिया। इससे ग्राम सचिव को बैरंग लौटना पड़ा।
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ग्राम पंचायत का रिकार्ड न मिलने से अब मौजूदा सरपंच किसी प्रकार की विकास योजनाओं में भागीदारी नहीं कर सकता जिससे समस्त गांव में विकास कार्य ठप पड़े हुए हैं। अब विकास एवं पंचायत के सामने विकट हालात पैदा हो गए हैं। इस मामले में रोचक पहलू यह है कि ग्राम पंचायत के रिकार्ड देने व लेने के लिए भूतपूर्व महिला सरपंच व मौजूदा सरपंच में से कोई पक्ष ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहा है जबकि इस मामले का भंडाफोड़ भी गांव के आनंद पुत्र दलबीर सिंह की आरटीआई से हुआ। ग्राम पंचायत के खाते में लगभग बीस लाख की धनराशि बताई जा रही है लेकिन इसे ग्रामीण विकास पर खर्च कौन करेगा, इसे लेकर सवाल खड़ा हो गया है।
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पूर्व महिला सरपंच ने किया कानून का उल्लंघन : बीडीपीओ
इस संबंध में बीडीपीओ भूपसिंह श्योराण ने बताया कि ग्राम सचिव को रिकार्ड न देकर पूर्व महिला सरपंच ने कानून का उल्लंघन किया है। इस मामले में जल्द ही पंचायती राज अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।