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ऐशियन गेम साइड स्टोरी
Updated Sun, 02 Sep 2018 03:00 AM IST
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हार ने दिया सबक, मेडल ने दी खुशी
-ऑस्ट्रेलिया में कॉमनवेल्थ के गोल्ड और जर्मनी में मिनी वर्ल्ड कप के फाइनल में मिली हार से बढ़ा मनोबल
विकास सैनी/हरीश पौड़िया
रोहतक। हार से सबक ही नहीं खुशी भी मिली। एशियन गेम्स में अमित का गोल्ड मेडल इसी की देन है। ऑस्ट्रेलिया में हुए कॉमनवेल्थ में गोल्ड की जगह सिल्वर मिला। जर्मनी में मिनी वर्ल्ड कप के फाइनल में हार के कारण ब्रांज मिला। इन्हीं से जीत की ललक बढ़ी। ऐसा नहीं होता तो इस जीत के लिए अमित की भूख कम हो जाती। उसने अपने कोच की रणनीति के हिसाब से गेम खेला और जीत हासिल की।
एपेंडिक्स ने छुड़ाई अजय की बॉक्ंिसग
सेना में बतौर नायक तैनात मायना निवासी 26 वर्षीय अजय बॉक्सिंग में करियर बनाना चाहता था। इसके लिए शिमली निवासी कोच अनिल की एकेडमी में खूब पसीना बहाया। घर की माली हालत और वर्ष 2015 में एपेंडिक्स के ऑपरेशन ने उसे बॉक्सिंग और देश को मेडल दिलाने के सपने से उसे दूर कर दिया। इस ऑपरेशन के बाद उसे खेल बंद करना पड़ा। परिवार को आर्थिक रूप से मदद करने व छोटे भाई को बॉक्सर बनाने के लिए वह सेना में भर्ती हो गया।
बड़े भाई को बॉक्सिंग करते देख रिंग में उतरा अमित
बॉक्सर अमित अपने बड़े भाई अजय को देखकर ही बॉक्सिंग रिंग में उतरा। वह शुरू में भाई की साइकिल पर बैठकर साथ जाता था। यहां भाई को दौड़ धूप करते देख उसकी नकल करता था। यहीं से उसमें बॉक्सर बनने का जज्बा पैदा हुआ और उसने नियमित अभ्यास शुरू कर दिया।
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भूखे पेट रह कर करना पड़ा अभ्यास
अजय ने बताया कि उसके छोटे भाई 23 वर्षीय नायब सूबेदार अमित का मेडल तक का सफर संघर्ष पूर्ण रहा है। शुरुआती दौर ज्यादा मुश्किल भरा रहा। हालात ऐसे थे कि दोनों भाइयों को मैदान पर कड़ी मेहनत के बाद भर पेट डाइट नहीं मिलती थी। कई बार तो भूखे पेट रह कर भी अभ्यास करना पड़ता था। अजय के सेना में भर्ती होने के बाद अमित की डाइट सुधरी। जब वह खुद सेना में भर्ती हुआ तो डाइट और बेहतर हो गई। इसी के साथ खेल में भी निखार आने लगा।
40 से ज्यादा राष्ट्रीय व करीब 10 अंतरराष्ट्रीय मेडल जीते
अमित ने बॉक्सिंग खेलते हुए घर में मेडलों का ढेर लगा दिया। अपने छोटे भाई के मेडल हाथों में लेकर दिखाते हुए अजय ने बताया कि ये उसकी पिछले एक दशक की मेहनत है। अमित अब तक करीब दस अंतरराष्ट्रीय व 40 से ज्यादा राष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों में मेडल जीत चुका है। इसमें ज्यादातर गोल्ड व सिल्वर मेडल हैं। वह रोजाना आठ घंटे पसीना बहाता है। इस मेडल के लिए पंजाब में लगाए गए नेशनल कैंप में लंबे समय अभ्यास किया।
छुट्टी लेकर पहुंचा भाई का हौसला बढ़ाने
सेना में नायक अजय अपने छोटे भाई अमित की फाइट देखने और उसका हौसला बढ़ाने के लिए छुट्टी लेकर आता है। इसके लिए पहले ही खेल मुकाबलों के हिसाब से अपनी छुट्टी प्लान करता है। एशियन गेम के लिए भी उसने पहले से प्लान तैयार किया था। इस बार वह 22 अगस्त को एक महीने की छुट्टी लेकर आया है।
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हार ने दिया सबक, मेडल ने दी खुशी
-ऑस्ट्रेलिया में कॉमनवेल्थ के गोल्ड और जर्मनी में मिनी वर्ल्ड कप के फाइनल में मिली हार से बढ़ा मनोबल
विकास सैनी/हरीश पौड़िया
रोहतक। हार से सबक ही नहीं खुशी भी मिली। एशियन गेम्स में अमित का गोल्ड मेडल इसी की देन है। ऑस्ट्रेलिया में हुए कॉमनवेल्थ में गोल्ड की जगह सिल्वर मिला। जर्मनी में मिनी वर्ल्ड कप के फाइनल में हार के कारण ब्रांज मिला। इन्हीं से जीत की ललक बढ़ी। ऐसा नहीं होता तो इस जीत के लिए अमित की भूख कम हो जाती। उसने अपने कोच की रणनीति के हिसाब से गेम खेला और जीत हासिल की।
एपेंडिक्स ने छुड़ाई अजय की बॉक्ंिसग
सेना में बतौर नायक तैनात मायना निवासी 26 वर्षीय अजय बॉक्सिंग में करियर बनाना चाहता था। इसके लिए शिमली निवासी कोच अनिल की एकेडमी में खूब पसीना बहाया। घर की माली हालत और वर्ष 2015 में एपेंडिक्स के ऑपरेशन ने उसे बॉक्सिंग और देश को मेडल दिलाने के सपने से उसे दूर कर दिया। इस ऑपरेशन के बाद उसे खेल बंद करना पड़ा। परिवार को आर्थिक रूप से मदद करने व छोटे भाई को बॉक्सर बनाने के लिए वह सेना में भर्ती हो गया।
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बड़े भाई को बॉक्सिंग करते देख रिंग में उतरा अमित
बॉक्सर अमित अपने बड़े भाई अजय को देखकर ही बॉक्सिंग रिंग में उतरा। वह शुरू में भाई की साइकिल पर बैठकर साथ जाता था। यहां भाई को दौड़ धूप करते देख उसकी नकल करता था। यहीं से उसमें बॉक्सर बनने का जज्बा पैदा हुआ और उसने नियमित अभ्यास शुरू कर दिया।
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भूखे पेट रह कर करना पड़ा अभ्यास
अजय ने बताया कि उसके छोटे भाई 23 वर्षीय नायब सूबेदार अमित का मेडल तक का सफर संघर्ष पूर्ण रहा है। शुरुआती दौर ज्यादा मुश्किल भरा रहा। हालात ऐसे थे कि दोनों भाइयों को मैदान पर कड़ी मेहनत के बाद भर पेट डाइट नहीं मिलती थी। कई बार तो भूखे पेट रह कर भी अभ्यास करना पड़ता था। अजय के सेना में भर्ती होने के बाद अमित की डाइट सुधरी। जब वह खुद सेना में भर्ती हुआ तो डाइट और बेहतर हो गई। इसी के साथ खेल में भी निखार आने लगा।
40 से ज्यादा राष्ट्रीय व करीब 10 अंतरराष्ट्रीय मेडल जीते
अमित ने बॉक्सिंग खेलते हुए घर में मेडलों का ढेर लगा दिया। अपने छोटे भाई के मेडल हाथों में लेकर दिखाते हुए अजय ने बताया कि ये उसकी पिछले एक दशक की मेहनत है। अमित अब तक करीब दस अंतरराष्ट्रीय व 40 से ज्यादा राष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों में मेडल जीत चुका है। इसमें ज्यादातर गोल्ड व सिल्वर मेडल हैं। वह रोजाना आठ घंटे पसीना बहाता है। इस मेडल के लिए पंजाब में लगाए गए नेशनल कैंप में लंबे समय अभ्यास किया।
छुट्टी लेकर पहुंचा भाई का हौसला बढ़ाने
सेना में नायक अजय अपने छोटे भाई अमित की फाइट देखने और उसका हौसला बढ़ाने के लिए छुट्टी लेकर आता है। इसके लिए पहले ही खेल मुकाबलों के हिसाब से अपनी छुट्टी प्लान करता है। एशियन गेम के लिए भी उसने पहले से प्लान तैयार किया था। इस बार वह 22 अगस्त को एक महीने की छुट्टी लेकर आया है।