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माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराएगा मल्लापुर गांव का बेटा रोहताश
Updated Wed, 28 Mar 2018 01:17 AM IST
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हिसार।
गांव मल्लापुर जिला हिसार का 21 वर्षीय रोहताश खिलेरी पांच अप्रैल को नेपाल के काठमांडू से दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के लिए चढ़ाई शुरू करेगा।
रोहताश खिलेरी और उसके माता-पिता ने बताया कि वह 2014 में नेपाल में खेलने गया था, वहां पर ऊंची पहाड़ियों को देखकर मन में इच्छा हुई कि इन पहाड़ियों को छूना है। रोहताश ने पढ़ाई के साथ मेहनत करते हुए 29 अप्रैल 2017 को पहल गांव श्रीनगर में इसका बेसिक कोर्स प्रारंभ किया। इसके उपरांत सितंबर 2017 में कोचिंग के लिए दार्जिलिंग गया, जहां उसने कोर्स के दौरान 6000 मीटर की चढ़ाई पार की। उसे नेपाल की सात शिमटी एजेंसी ने माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई की अनुमति प्रदान की। बेटे के इस लक्ष्य व सपने को पूरा करने के लिए माता बंसी देवी और पिता सुभाष चंद्र को होने वाले खर्च, जो लगभग 25 से 30 लाख का है, की चिंता सताने लगी। पिता ने अपनी जमीन गिरवी रखकर इसके लिए धन जुटाया। रोहताश बीए द्वितीय वर्ष में पढ़ाई कर रहा है।
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गांव मल्लापुर जिला हिसार का 21 वर्षीय रोहताश खिलेरी पांच अप्रैल को नेपाल के काठमांडू से दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के लिए चढ़ाई शुरू करेगा।
रोहताश खिलेरी और उसके माता-पिता ने बताया कि वह 2014 में नेपाल में खेलने गया था, वहां पर ऊंची पहाड़ियों को देखकर मन में इच्छा हुई कि इन पहाड़ियों को छूना है। रोहताश ने पढ़ाई के साथ मेहनत करते हुए 29 अप्रैल 2017 को पहल गांव श्रीनगर में इसका बेसिक कोर्स प्रारंभ किया। इसके उपरांत सितंबर 2017 में कोचिंग के लिए दार्जिलिंग गया, जहां उसने कोर्स के दौरान 6000 मीटर की चढ़ाई पार की। उसे नेपाल की सात शिमटी एजेंसी ने माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई की अनुमति प्रदान की। बेटे के इस लक्ष्य व सपने को पूरा करने के लिए माता बंसी देवी और पिता सुभाष चंद्र को होने वाले खर्च, जो लगभग 25 से 30 लाख का है, की चिंता सताने लगी। पिता ने अपनी जमीन गिरवी रखकर इसके लिए धन जुटाया। रोहताश बीए द्वितीय वर्ष में पढ़ाई कर रहा है।
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