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जाट आरक्षण दंगों के सलारा पुलिस चौक फूंकने का मामला
Updated Wed, 14 Feb 2018 03:00 AM IST
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जाट आरक्षण दंगों के दौरान सलारा पुलिस चौकी में आगजनी व तोड़फोड़ का मामला
195 कदम दूरी पर पुलिस चौकी, डेढ़ साल साल मीट बेचता रहा भगोड़ा
- अब अचानक पुलिस पहुंची घर, बोली चौकी फूंकने के मामले में कर रहे थे कब से तलाश
- जिस युवक ने पूछताछ में नाम लिया था, वह हो चुका है कोर्ट से बरी
- आरोपी की मां ने उठाए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल, सेशन कोर्ट में दायर करेगी जमानत याचिका
- थाना प्रभारी बोले, फाइल देकर ही बता पाऊंगा क्यों नहीं हुई पहले गिरफ्तारी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
डेढ़ साल तक शहर की सलारा मोहल्ला पुलिस चौकी से मात्र 195 कदम दूरी पर भगोड़ा करार एक युवक मीट बेचता रहा, लेकिन पुलिस की नींद नहीं टूटी। अब अचानक पुलिस युवक के घर पहुंची और युवक शामू को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। घर पर अब विधवा मां, नवजात बच्ची और पत्नी है। जबकि बहन की 18 फरवरी को शादी है।
एएसआई नरेंद्र सिंह ने 21 फरवरी 2016 को पुरानी सब्जी मंडी थाने में केस दर्ज कराया था कि 20 फरवरी की शाम करीब साढ़े 9 बजे सैकड़ों लोग पुलिस चौकी के बाहर एकत्रित थे। भीड़ ने अचानक न केवल पुलिस चौकी के सामान में आग लगा दी, बल्कि जमकर तोड़फोड़ की। सामान भी निकाल कर ले गए। पुलिस ने 28 फरवरी 2016 को सलारा मोहल्ला निवासी राहुल व सुनील को गिरफ्तार किया था। जबकि एक दिन बाद दीपक को काबू किया। पुलिस की तरफ से जब अदालत में चालान पेश किया गया, उसमें बताया गया कि एक आरोपी ने खुलासा किया है कि पाड़ा मोहल्ला निवासी शामू बता सकता है कि कौन-कौन और व्यक्ति चौकी के बाहर खड़े थे। 25 मई 2016 को अदालत ने शामू को पीओ घोषित कर दिया।
नोटिस तक नहीं दिया, डेढ़ साल बाद उठाकर ले गई पुलिस
शामू की मां संतोष का आरोप है कि उसके घर से पास (195 कदम दूर) ही सलारा पुलिस चौकी है, जबकि दूसरी तरफ पास (295 कदम) में ही पुराना गोहाना अड्डा पुलिस चौकी है। कभी न तो पुलिस उनके घर आई और न ही किसी तरह का अदालत का नोटिस दिया। अब 17 जनवरी को पुलिस आई और उसके लड़के को उठाकर ले गई। जब वे पुलिस चौकी गए तो बताया कि दंगों के दौरान जली पुलिस चौकी के मामले में शामू का नाम आया था, वह डेढ़ साल से पीओ चल रहा है। उसके खिलाफ नया केस दर्ज कर अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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पुलिस चौकी फूंकने के आरोपी में मिली जमानत, पीओ के केस में खारिज
शामू के वकील एडवोकेट दीपक भारद्वाज ने बताया कि पुलिस रिकार्ड के मुताबिक जिस युवक ने शामू का नाम लिया था उसे अदालत निर्दोष मानकर बरी कर चुकी है। शामू को एडीजे कोर्ट से पुलिस चौकी में तोड़फोड़ व फूंकने के आरोप में जमानत मिल गई, लेकिन पीओ के मामले में दूसरी अदालत में याचिका खारिज हो गई। अब वे सेशन कोर्ट में जमानत याचिका लगाएंगे।
फाइल देकर बताऊंगा, कैसे हुई इतनी देरी से गिरफ्तारी
पुलिस चौकी से इतनी नजदीक होने के बावजूद पीओ करार युवक की गिरफ्तारी इतने लंबे समय तक क्यों नहीं हुई। यह तो वे फाइल देकर ही बता पाएंगे। हो सकता पुलिस आरोपी के घर गई हो, वह नहीं मिला हो। लिखित में नोटिस दिया या नहीं, इसके बारे में पता करके बता पाएंगे।
राजेश कुमार, एसएचओ पुरानी सब्जी मंडी
पिता नहीं रहे, बहन की 18 को शादी
शामू की मां संतोष ने बताया कि उसका बेटा किसी तरह के मामले में शामिल नहीं रहा है। उसके पिता का देहांत हो चुका है। दो बेटियों के पिता शामू को अहसास तक नहीं था कि उसके खिलाफ कोई केस दर्ज है। अब अचानक मुसीबत का पहाड़ उसके परिवार पर टूट पड़ा। 18 फरवरी को शामू की बहन की शादी है, लेकिन वह सलाखों के पीछे है।
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195 कदम दूरी पर पुलिस चौकी, डेढ़ साल साल मीट बेचता रहा भगोड़ा
- अब अचानक पुलिस पहुंची घर, बोली चौकी फूंकने के मामले में कर रहे थे कब से तलाश
- जिस युवक ने पूछताछ में नाम लिया था, वह हो चुका है कोर्ट से बरी
- आरोपी की मां ने उठाए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल, सेशन कोर्ट में दायर करेगी जमानत याचिका
- थाना प्रभारी बोले, फाइल देकर ही बता पाऊंगा क्यों नहीं हुई पहले गिरफ्तारी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
डेढ़ साल तक शहर की सलारा मोहल्ला पुलिस चौकी से मात्र 195 कदम दूरी पर भगोड़ा करार एक युवक मीट बेचता रहा, लेकिन पुलिस की नींद नहीं टूटी। अब अचानक पुलिस युवक के घर पहुंची और युवक शामू को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। घर पर अब विधवा मां, नवजात बच्ची और पत्नी है। जबकि बहन की 18 फरवरी को शादी है।
एएसआई नरेंद्र सिंह ने 21 फरवरी 2016 को पुरानी सब्जी मंडी थाने में केस दर्ज कराया था कि 20 फरवरी की शाम करीब साढ़े 9 बजे सैकड़ों लोग पुलिस चौकी के बाहर एकत्रित थे। भीड़ ने अचानक न केवल पुलिस चौकी के सामान में आग लगा दी, बल्कि जमकर तोड़फोड़ की। सामान भी निकाल कर ले गए। पुलिस ने 28 फरवरी 2016 को सलारा मोहल्ला निवासी राहुल व सुनील को गिरफ्तार किया था। जबकि एक दिन बाद दीपक को काबू किया। पुलिस की तरफ से जब अदालत में चालान पेश किया गया, उसमें बताया गया कि एक आरोपी ने खुलासा किया है कि पाड़ा मोहल्ला निवासी शामू बता सकता है कि कौन-कौन और व्यक्ति चौकी के बाहर खड़े थे। 25 मई 2016 को अदालत ने शामू को पीओ घोषित कर दिया।
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नोटिस तक नहीं दिया, डेढ़ साल बाद उठाकर ले गई पुलिस
शामू की मां संतोष का आरोप है कि उसके घर से पास (195 कदम दूर) ही सलारा पुलिस चौकी है, जबकि दूसरी तरफ पास (295 कदम) में ही पुराना गोहाना अड्डा पुलिस चौकी है। कभी न तो पुलिस उनके घर आई और न ही किसी तरह का अदालत का नोटिस दिया। अब 17 जनवरी को पुलिस आई और उसके लड़के को उठाकर ले गई। जब वे पुलिस चौकी गए तो बताया कि दंगों के दौरान जली पुलिस चौकी के मामले में शामू का नाम आया था, वह डेढ़ साल से पीओ चल रहा है। उसके खिलाफ नया केस दर्ज कर अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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पुलिस चौकी फूंकने के आरोपी में मिली जमानत, पीओ के केस में खारिज
शामू के वकील एडवोकेट दीपक भारद्वाज ने बताया कि पुलिस रिकार्ड के मुताबिक जिस युवक ने शामू का नाम लिया था उसे अदालत निर्दोष मानकर बरी कर चुकी है। शामू को एडीजे कोर्ट से पुलिस चौकी में तोड़फोड़ व फूंकने के आरोप में जमानत मिल गई, लेकिन पीओ के मामले में दूसरी अदालत में याचिका खारिज हो गई। अब वे सेशन कोर्ट में जमानत याचिका लगाएंगे।
फाइल देकर बताऊंगा, कैसे हुई इतनी देरी से गिरफ्तारी
पुलिस चौकी से इतनी नजदीक होने के बावजूद पीओ करार युवक की गिरफ्तारी इतने लंबे समय तक क्यों नहीं हुई। यह तो वे फाइल देकर ही बता पाएंगे। हो सकता पुलिस आरोपी के घर गई हो, वह नहीं मिला हो। लिखित में नोटिस दिया या नहीं, इसके बारे में पता करके बता पाएंगे।
राजेश कुमार, एसएचओ पुरानी सब्जी मंडी
पिता नहीं रहे, बहन की 18 को शादी
शामू की मां संतोष ने बताया कि उसका बेटा किसी तरह के मामले में शामिल नहीं रहा है। उसके पिता का देहांत हो चुका है। दो बेटियों के पिता शामू को अहसास तक नहीं था कि उसके खिलाफ कोई केस दर्ज है। अब अचानक मुसीबत का पहाड़ उसके परिवार पर टूट पड़ा। 18 फरवरी को शामू की बहन की शादी है, लेकिन वह सलाखों के पीछे है।