{"_id":"5c672c36bdec22738244799c","slug":"71550265398-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वैक्सीनेशन से जिले में बच्ची की मौत का मामला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वैक्सीनेशन से जिले में बच्ची की मौत का मामला
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वैक्सीनेशन से जिले में बच्ची की मौत का मामला
-तीन इंजेक्शन लगाने के बाद पिलाई थी दवा
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। स्वास्थ्य विभाग का टीकाकरण काहनौर निवासी मनोज के घर अंधेरा कर गया। पीड़ित की बेटी ने इंजेक्शन लगने के अगले दिन दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य विभाग ने इस मौत की जांच तो शुरू कर दी है, लेकिन एक सप्ताह बीतने के बाद भी वह पीड़ित के घर तक नहीं पहुंची है। अधिकारी बैठक कर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने में व्यस्त हैं।
मृतक के पिता मनोज ने बताया कि उन्होंने गांव के ही अस्पताल में अपनी बेटी को टीके लगवाए थे। बेटी को तीन टीके लगाए गए थे और उसे दवा भी पिलाई गई थी। टीका लगाने के बाद अस्पताल में एक गोली के चार हिस्से करके दिए गए और कहा गया था वह उसे दे दें। घर जाने के बाद बेटी को बुखार हुआ और उन्होंने दवा दी, लेकिन रात को बुखार 105 डिग्री तक हो गया। बेटी के शरीर पर भी निशान हो गए थे। वह सुबह अस्पताल गए और स्टाफ को कहा कि उन्होंने कैसा इंजेक् शन लगा दिया। इसके बाद स्थिति बिगड़ने पर वह कलानौर अस्पताल ले गए, आराम न होने पर वह एक निजी अस्पताल में ले गए। यहां भी डॉक्टरों ने जब जवाब दिया तो वह बेटी को लेकर रोहतक पीजीआईएमएस आ रहे थे और पुराने बस स्टैंड के पास पहुंचते-पहुंचते लड़की ने दम तोड़ दिया। मनोज ने बताया कि वह पेशे से मजदूरी करता है और उसकी पहली बेटी थी। लेकिन टीके ने उसकी जान ले ली, अब उसे कोई यह बताने को तैयार नहीं है कि टीका लगने के बाद बच्ची की मौत कैसे हुई। हालत यह है कि उनसे स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकारी यह तक पूछने नहीं आया कि वह कैसे हैं। हालांकि, इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में बच्चे की मौत हुई है, ऐसे में वह उसके घर कैसे जाए। वह इस केस की जांच के लिए पीड़ित से मिलेंगे, लेकिन वह चाहते हैं कि पहले घरवाले कुछ शांत हो जाएं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लड़की की मौत पर खेद जताते हुए अपना पक्ष रखा है कि वह इस मौत की जांच कर रहे हैं। हालांकि टीकाकरण में किसी भी समस्या पर उन्होंने इंकार किया है।
विज्ञापन
-तीन इंजेक्शन लगाने के बाद पिलाई थी दवा
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। स्वास्थ्य विभाग का टीकाकरण काहनौर निवासी मनोज के घर अंधेरा कर गया। पीड़ित की बेटी ने इंजेक्शन लगने के अगले दिन दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य विभाग ने इस मौत की जांच तो शुरू कर दी है, लेकिन एक सप्ताह बीतने के बाद भी वह पीड़ित के घर तक नहीं पहुंची है। अधिकारी बैठक कर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने में व्यस्त हैं।
मृतक के पिता मनोज ने बताया कि उन्होंने गांव के ही अस्पताल में अपनी बेटी को टीके लगवाए थे। बेटी को तीन टीके लगाए गए थे और उसे दवा भी पिलाई गई थी। टीका लगाने के बाद अस्पताल में एक गोली के चार हिस्से करके दिए गए और कहा गया था वह उसे दे दें। घर जाने के बाद बेटी को बुखार हुआ और उन्होंने दवा दी, लेकिन रात को बुखार 105 डिग्री तक हो गया। बेटी के शरीर पर भी निशान हो गए थे। वह सुबह अस्पताल गए और स्टाफ को कहा कि उन्होंने कैसा इंजेक् शन लगा दिया। इसके बाद स्थिति बिगड़ने पर वह कलानौर अस्पताल ले गए, आराम न होने पर वह एक निजी अस्पताल में ले गए। यहां भी डॉक्टरों ने जब जवाब दिया तो वह बेटी को लेकर रोहतक पीजीआईएमएस आ रहे थे और पुराने बस स्टैंड के पास पहुंचते-पहुंचते लड़की ने दम तोड़ दिया। मनोज ने बताया कि वह पेशे से मजदूरी करता है और उसकी पहली बेटी थी। लेकिन टीके ने उसकी जान ले ली, अब उसे कोई यह बताने को तैयार नहीं है कि टीका लगने के बाद बच्ची की मौत कैसे हुई। हालत यह है कि उनसे स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकारी यह तक पूछने नहीं आया कि वह कैसे हैं। हालांकि, इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में बच्चे की मौत हुई है, ऐसे में वह उसके घर कैसे जाए। वह इस केस की जांच के लिए पीड़ित से मिलेंगे, लेकिन वह चाहते हैं कि पहले घरवाले कुछ शांत हो जाएं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लड़की की मौत पर खेद जताते हुए अपना पक्ष रखा है कि वह इस मौत की जांच कर रहे हैं। हालांकि टीकाकरण में किसी भी समस्या पर उन्होंने इंकार किया है।
विज्ञापन