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ट्रॉमा सेंटर की व्यवस् था संभालेंगे तीन प्रशासनिक अधिकारी

Fri, 05 Jan 2018 02:45 AM IST
Updated Fri, 05 Jan 2018 02:45 AM IST
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ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्
था संभालेंगे तीन प्रशासनिक अधिकारी
ट्रॉमा की हालत में सुधार : संस्थान के तीन शीर्ष अधिकारी विभागों में ताममेल और मरीजों की समस्या का करेंगे समाधान
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फोटो सहित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय का धनवंतरी अपैक्स ट्रॉमा सेंटर शुभारंभ के चौथे दिन कुछ व्यवस्थित नजर आया। यहां की जिम्मेदारी तीन प्रशासनिक अधिकारियों को दी गई है। इसमें न्यूरो सर्जन डॉ. ईश्वर(प्रोफेसर इंचार्ज) ट्रॉमा सेंटर, डीएमएस(ट्रॉमा) डॉ. संदीप, डॉ. महेश माल्हा(सीएमओ) ट्रॉमा को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये तीनों अधिकारी संस्थान के शीर्ष अधिकारियों के साथ मिलकर और ट्रॉमा में कार्य करने वाले विभागों से तालमेल बना कर यहां आने वाले मरीजों की समस्याओं का समाधान करेंगे।
ट्रॉमा सेंटर के चौधर की जंग वीरवार को कुछ शांत नजर आई। यहां सर्जरी और ऑर्थों विभाग सामान्य रूप से कार्य करते नजर आए। वहीं ट्रॉमा सेंटर की समस्याओं को लेकर वीरवार को भी एमएस कार्यालय पर बैठक जारी रही। यहां तैनात जूनियर व सीनियर हाउस सर्जन की नियुक्ति के लिए अधिकारियों ने कार्रवाई पूरी की। नव नियुक्ति जूनियर हाउस सर्जन ने बताया कि उन्हें 50 हजार 200 रुपये के हिसाब से अब मासिक वेतन मिलेगा। यह वेतन पहले 46 हजार रुपये थे, जिसे घटा कर बताया गया कि उन्हें 38 हजार रुपये के करीब प्रति माह वेतन मिलेगा। जब इसका विरोध हुआ तो स्थिति को सही किया गया। हाउस सर्जनों ने बताया कि जिनको नियुक्ति पत्र मिल गया है, उन्होंने तो ड्यूटी ज्वाइन कर ली है। जल्द ही सभी हाउस सर्जन अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर लेंगे। हाउस सर्जन के ड्यूटी ज्वाइन करते ही ट्रॉमा सेंटर में काफी हद तक समस्याओं का समाधान हो गया है, क्योंकि इनकी संख्या 40 से अधिक है। इनमें से कुछ डॉक्टरों को जरनल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर के स्थान पर बतौर सीएमओ रखा गया है।
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बगैर नियुक्ति पत्र कराया विभाग में ज्वाइन
सूत्रों की मानें तो संस्थान में कुछ दबंग डॉक्टर कहे जाने वाले विभागों में हाउस सर्जनों को बगैर नियुक्ति पत्र ही ज्वाइनिंग करवा दी गई है। ऐसी स्थिति में हाउस सर्जनों के लिए मुसीबत हो गई कि उनके विभाग तो अलाट हो गए हैं, लेकिन नियुक्ति पत्र नहीं मिला है। यदि वह अपने विभागाध्यक्ष की नहीं मानते तो उन्हें छह माह के कार्यकाल में अधिकारी का कोप भाजन बनना पडे़गा। गौरतलब है कि हाउस सर्जन की नियुक्ति संस्थान में एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों के लिए छह माह के लिए होती है। फ्रेशर डॉक्टर को जूनियर हाउस सर्जन की जिम्मेदारी मिलती है और बाद में वह सीनियर के वर्ग में आ जाता है। दोनों ही पदों के लिए हर छह माह बाद पुनर्नियुक्ति होती है।
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सर्जरी विभाग की अनदेखी करना बन गया मुसीबत
ट्रॉमा सेंटर को चलाने में अधिकारियों के लिए सर्जरी विभाग चैलेंज बन गया था। इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है कि प्रशासन ने इस प्रोजेक्ट में सर्जरी विभाग की अनदेखी की। यही अनदेखी ट्रॉमा सेंटर के लिए मुसीबत बन गई। सूत्रों की मानें तो ट्रॉमा सेंटर का सबसे अहम विभाग सर्जरी होता है, यहां से उपचार मिलने के बाद ही मरीज को अन्य विभागों को शिफ्ट किया जाता है। ऐसे में सर्जरी जैसे अहम विभाग की अनदेखी किया जाना मुसीबत को न्यौता देने से कम नहीं था। संस्थान में चल रही राजनीति के विशेषज्ञों का मानना है कि अभी भी ट्रॉमा सेंटर के तीन अहम पदों में सर्जरी विभाग के अधिकारी को नहीं रखा गया है।

ट्रॉमा के बाद आपात विभाग में जंग जारी
प्रकाशित समाचार की पीडीएफ फाइल
ट्रॉमा सेंटर में चल रही जंग वीरवार को कुछ शांत हुई तो अब आपात विभाग में जंग तेज हो गई है। यहां चेस्ट एंड टीबी, मेडिसन, बाल रोग और पीसीसीएम विभाग में खींचतान शुरू हो गई है। ये सभी विभाग अपने एरिया को बड़ा करने और अपनी इच्छानुसार जगह लेने के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।

आपात विभाग से सर्जरी और ऑर्थों विभाग के ट्रॉमा सेंटर में शिफ्ट किए गए विभागों की जगह खाली होते ही अन्य विभाग अलर्ट हो गए हैं। पहले मेडिसन और चेस्ट एंड टीबी विभाग एक साथ कार्य करते थे और सर्जरी और ऑर्थों विभाग अलग कमरों में काम करते थे। अब पीसीसीएम विभाग की मांग है कि उन्हें पूरा एरिया दिया जाए और मेडिसन तथा चेस्ट एंड टीबी को शिफ्ट किया जाए। वहीं मेडिसन विभाग की डिमांड है कि चेस्ट एंड टीबी को शिफ्ट करके उन्हें पूरा एरिया दिया जाए। जगह की कमी झेल रहे बाल रोग विभाग ने भी अपने लिए जगह की मांग तेज कर दी है कि वह पहले ही जगह की कमी की मार झेल रहे हैं। उन्हें यहां आने वाले मरीजों की संख्या को देखते हुए नई जगह अलाट होनी चाहिए। ऐसी स्थिति में प्रशासन के लिए सभी विभागों की जरूरतों को पूरा करना किसी चैलेंज से कम नहीं होगा। क्योंकि जरूरतों से अधिक यहां विभागाध्यक्षों की सम्मान की भी लड़ाई रहेगी।
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