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जेल में रातभर बैठकर रोती रहीं बलजीत कौर, छलका दर्द

Mon, 02 Oct 2017 02:03 AM IST
Updated Mon, 02 Oct 2017 02:03 AM IST
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जेल में रातभर बैठकर रोती रहीं बलजीत कौर, छलका दर्द
अमर उजाला ब्यूरो
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रोहतक।
‘या तो भगवान नहीं है, यदि है तो यह दिन क्यों दिखा रहा है। पीजीआई से बच्चा चोरी हुआ, इसकी लापरवाही के मामले में बगैर किसी गलती के मैं और मेरा परिवार मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हो रहे हैं। मुझे जेल भेजा गया और मेरा डेढ़ साल का बेटा तथा पति सड़क पर आ गए। जेल से बाहर आने के बाद पीजीआई की स्टाफ नर्स बलजीत कौर का दर्द फूट पड़ा।

बलजीत कौर ने बताया दस सितंबर को बच्चा चोरी की घटना हुई और 14 सितंबर को सिरसा में 64 वर्षीय पिता को हार्ट अटैक आ गया। इसकी जानकारी उसको नहीं दी गई। क्योंकि वह पहले से ही परेशान चल रही थी। शनिवार को सुबह नौ बजे पुलिस ने रूटीन की तरह थाने बुलाया था और कहा था कि दशहरा है वह जल्दी आ जाए उन्हें जल्दी छोड़ दिया जाएगा। अन्य दिन की भांति वह अपने पति गुरचरण के साथ थाने में चली गई। जब वह थाने में गई तो उसे बताया गया कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। यहां से पुलिस उन्हें कोर्ट ले गई और सायं तीन-चार बजे के आसपास जेल भेज दिया। इसके बाद न तो उससे कुछ खाया गया और न ही पिया गया। रात भर वह जेल में बैठकर रोती रही कि उसे आखिर किस अपराध की सजा मिल रही है। उसने कभी जेल में ऐसे रात गुजारने की सोची भी नहीं थी कि बाहर उसका डेढ़ साल का बेटा और पति भी बगैर किसी गलती की सजा भुगत रहे होंगे। जब सुबह वह जेल से तकरीबन आठ बजे बाहर आई तो वह अपने पति से मिली। बलजीत कौर ने बताया कि जेल में बंद अन्य महिलाओं ने रात को उसको लेटने की जगह तो दी, लेकिन उसकी नींद तो उसके ही मन में चल रहे सवालों ने उड़ा दी थी। वहीं बलजीत कौर के पति गुरचरण सिंह ने बताया कि पहले मेरी पत्नी बच्चा गुम होने मामले में उलझ गई फिर पिता को हार्ट अटैक आ गया। मैं निजी कंपनी में बतौर फार्मासिस्ट कार्य करता हूं। पिता के दिल में स्टेंट डलना है। बलजीत कौर को चार माह पहले नौकरी मिली थी, सोचा कि घर का आर्थिक बोझ कम होगा, लेकिन यहां एक बार भी वेतन तो मिला नहीं, परेशानी और आ गई। उनका पूरा परिवार टूट चुका है। दिन में जब पहली बार बलजीत की जमानत याचिका खारिज हुई तो वह घबरा गए थे। लेकिन जब वह अधिवक्ता डॉ. दीपक भारद्वाज से मिले तो उन्हें उम्मीद जगी। रात को ही उन्होंने जमानत करवाई और जेल गए, लेकिन जेल नियमों के चलते उनकी पत्नी रात को बाहर नहीं आ सकी। सुबह जब उनकी पत्नी बाहर आई है तो उन्होंने कुछ राहत की सांस ली है।
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