{"_id":"594ad0e64f1c1be3658b480d","slug":"71498075366-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिहि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिहि
Updated Thu, 22 Jun 2017 03:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रासायनिक पदार्थ जहरीला बना रहे भूजल
अमित विश्वकर्मा
रेवाड़ी।
जिले के भूजल में निर्धारित मात्र से अधिक रासायनिक पदार्थ मिलने के कारण यहां का पानी जहरीला होता जा रहा है। कुछ स्थानों का पानी पीना तो दूर पशुओं और फसलों के लिए भी उपयुक्त नहीं है। बड़ी बात यह है कि 1582 वर्ग किमी. में फैले जिले के पांचों ब्लॉकों का भूजल गिरा है। प्रशासन एवं अन्य एजेंसी की तरफ से भूजल विकास की तरफ कोई कदम नहीं उठाया गया है। इससे ब्लॉक जाटूसाना सेमी क्रिटिकल एवं खोल नोटिफाइड कंडीशन में पहुंच चुका है। इसका सीधा अर्थ है कि इन दोनों ब्लॉकों में भूजल दोहन पर रोक जरूरी है। यह रिपोर्ट सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की है। पीने योग्य पानी में फ्लोराइड (एफ), आर्सेनिक (एएस) एवं आयरन सहित अन्य खनिज तत्व पाए जाते हैं। यदि ये खनिज निर्धारित मात्र से कम हैं या ज्यादा हैं तो धीरे-धीरे पानी शरीर पर विपरीत प्रभाव डालाना शुरू कर देता है। इसके असर से किडनी फेल होने सहित अन्य गंभीर बीमारियों हो जाती हैं।
---------------------------
न्यूट्रल की बजाय क्षारीय है जिले का पानी
सीजीडब्ल्यूबी की रिपोर्ट में जिले का पानी क्षारीय पाया गया है। अर्थात भूजल पीने लायक नहीं है। पेयजल प्रकृति में न्यूट्रल होना चाहिए। यदि वह अम्लीय या क्षारीय है तो पानी लायक नहीं है। अम्ल या क्षारीय होने पर पेयजल में इलेक्ट्रानिक चालकता बढ़ जाती है। इस के चलते जिले के गांव गंगायचा जाट की ईसी 3650, बालावास की 5740 गुडियानी गांव की 3040 माइक्रोस है। उल्लेखनीय है कि शुद्ध पेयजल की ईसी अर्थात इलेक्ट्रॉनिक कंडेक्टिविटी 560 होनी चाहिए।
-------------
कोसली के पानी में सबसे ज्यादा फ्लोराइड
रिपोर्ट के अनुसार बावल कस्बे का पानी नाइट्रेटिड है। शुद्ध पेयजल मेें नाइट्रेट की मात्रा 45 एमजी-ली. होनी चाहिए। बावल में इसकी मात्रा 172 एमजी-लीटर है। गंगायचा में 62एमजी/ली., बालावास में 52एमजी/ली. है। इसी के साथ कोसली के भूजल में सर्वाधिक 2.23एमजी/ली., गांव बहु में 2.26, गंगायचा जाट में 1.60, करनावास में 1.99 और मसानी में प्लोराइड की मात्रा 2.18 एमजी/ली. है। सही मात्रा 1.5एमजी/ली. होनी चाहिए।
विज्ञापन
--------------------
जिले की स्थिति
जिले के कुल 1582 वर्ग किमी. क्षेत्रफल में से 1330 वर्ग किमी. क्षेत्रफल कृषि के लिए है। वहीं 14 वर्ग किमी. पर जंगल, जिले में भूजल स्तर 13.29-24.मीटर है। जिले में अधिकतर भूजल की गहराई 203.85 मीटर है। भूजल स्तर प्रत्येक वर्ष 0.25 -1.50 मीटर प्रति वर्ष गिरता जा रहा है। इसी के साथ जिले का वार्षिक बरसात होने की दर 560 एमएम है। डिस्चार्ज की दर 358-2911 लीटर/प्रति मिनट है।
------------------------------
जागरूकता एवं प्रशिक्षण पर नहीं हुआ काम
रिपोर्ट के आधार पर तमाम चिंताओं की बावजूद जिले में भूजल स्तर को सुधारने एवं गुणवत्ता को बेहतर करने पर कभी काम नहीं हुआ। वहीं वॉटर
हार्वेस्टिंग एवं रिचार्ज प्रोजेक्टर भी कहीं दूर-दूर तक नहीं बनाए गए। उल्लेखनीय है कि मरकरी, प्लास्टिक, पालीथिन एवं अन्य प्रकार के जहरीले कूड़े का रीसाइकल नहीं होने के कारण यह पदार्थ जमीन के अंदर जाकर भूजल को जहरीला बना रहे हैं। शहर में कूड़ा निस्तारण संयंत्र ही नहीं होने से स्थिति ज्यादा बिगड़ी हुई है।
------------------------------
डॉक्टर बोले, भूजल के साथ ऑरओ का पानी भी नहीं पीने लायक
नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जेके सैनी ने बताया कि भूजल खराब होने से आए दिन अस्पताल में पानी खराब होने से होने वाली बीमारी और हड्डी कमजोर होने के केस बढ़ रहे हैं। शुद्ध पानी में खनिज लवणों का होना जरूरी है। यदि कम या ज्यादा मात्रा में है तो दोनो ही स्थितियां किडनी सहित अन्य बीमारियों को बढ़ा देते हैं। भूजल में जहां फ्लोराइड, नाइट्रेट सहित अन्य तत्वों की मात्रा बढ़ रही है। वहीं ऑरओ के पानी में मात्रा कम होने के कारण शरीर के लिए नुकसानदेह बन रहा है।
विज्ञापन
अमित विश्वकर्मा
रेवाड़ी।
जिले के भूजल में निर्धारित मात्र से अधिक रासायनिक पदार्थ मिलने के कारण यहां का पानी जहरीला होता जा रहा है। कुछ स्थानों का पानी पीना तो दूर पशुओं और फसलों के लिए भी उपयुक्त नहीं है। बड़ी बात यह है कि 1582 वर्ग किमी. में फैले जिले के पांचों ब्लॉकों का भूजल गिरा है। प्रशासन एवं अन्य एजेंसी की तरफ से भूजल विकास की तरफ कोई कदम नहीं उठाया गया है। इससे ब्लॉक जाटूसाना सेमी क्रिटिकल एवं खोल नोटिफाइड कंडीशन में पहुंच चुका है। इसका सीधा अर्थ है कि इन दोनों ब्लॉकों में भूजल दोहन पर रोक जरूरी है। यह रिपोर्ट सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की है। पीने योग्य पानी में फ्लोराइड (एफ), आर्सेनिक (एएस) एवं आयरन सहित अन्य खनिज तत्व पाए जाते हैं। यदि ये खनिज निर्धारित मात्र से कम हैं या ज्यादा हैं तो धीरे-धीरे पानी शरीर पर विपरीत प्रभाव डालाना शुरू कर देता है। इसके असर से किडनी फेल होने सहित अन्य गंभीर बीमारियों हो जाती हैं।
---------------------------
न्यूट्रल की बजाय क्षारीय है जिले का पानी
सीजीडब्ल्यूबी की रिपोर्ट में जिले का पानी क्षारीय पाया गया है। अर्थात भूजल पीने लायक नहीं है। पेयजल प्रकृति में न्यूट्रल होना चाहिए। यदि वह अम्लीय या क्षारीय है तो पानी लायक नहीं है। अम्ल या क्षारीय होने पर पेयजल में इलेक्ट्रानिक चालकता बढ़ जाती है। इस के चलते जिले के गांव गंगायचा जाट की ईसी 3650, बालावास की 5740 गुडियानी गांव की 3040 माइक्रोस है। उल्लेखनीय है कि शुद्ध पेयजल की ईसी अर्थात इलेक्ट्रॉनिक कंडेक्टिविटी 560 होनी चाहिए।
विज्ञापन
-------------
कोसली के पानी में सबसे ज्यादा फ्लोराइड
रिपोर्ट के अनुसार बावल कस्बे का पानी नाइट्रेटिड है। शुद्ध पेयजल मेें नाइट्रेट की मात्रा 45 एमजी-ली. होनी चाहिए। बावल में इसकी मात्रा 172 एमजी-लीटर है। गंगायचा में 62एमजी/ली., बालावास में 52एमजी/ली. है। इसी के साथ कोसली के भूजल में सर्वाधिक 2.23एमजी/ली., गांव बहु में 2.26, गंगायचा जाट में 1.60, करनावास में 1.99 और मसानी में प्लोराइड की मात्रा 2.18 एमजी/ली. है। सही मात्रा 1.5एमजी/ली. होनी चाहिए।
विज्ञापन
--------------------
जिले की स्थिति
जिले के कुल 1582 वर्ग किमी. क्षेत्रफल में से 1330 वर्ग किमी. क्षेत्रफल कृषि के लिए है। वहीं 14 वर्ग किमी. पर जंगल, जिले में भूजल स्तर 13.29-24.मीटर है। जिले में अधिकतर भूजल की गहराई 203.85 मीटर है। भूजल स्तर प्रत्येक वर्ष 0.25 -1.50 मीटर प्रति वर्ष गिरता जा रहा है। इसी के साथ जिले का वार्षिक बरसात होने की दर 560 एमएम है। डिस्चार्ज की दर 358-2911 लीटर/प्रति मिनट है।
------------------------------
जागरूकता एवं प्रशिक्षण पर नहीं हुआ काम
रिपोर्ट के आधार पर तमाम चिंताओं की बावजूद जिले में भूजल स्तर को सुधारने एवं गुणवत्ता को बेहतर करने पर कभी काम नहीं हुआ। वहीं वॉटर
हार्वेस्टिंग एवं रिचार्ज प्रोजेक्टर भी कहीं दूर-दूर तक नहीं बनाए गए। उल्लेखनीय है कि मरकरी, प्लास्टिक, पालीथिन एवं अन्य प्रकार के जहरीले कूड़े का रीसाइकल नहीं होने के कारण यह पदार्थ जमीन के अंदर जाकर भूजल को जहरीला बना रहे हैं। शहर में कूड़ा निस्तारण संयंत्र ही नहीं होने से स्थिति ज्यादा बिगड़ी हुई है।
------------------------------
डॉक्टर बोले, भूजल के साथ ऑरओ का पानी भी नहीं पीने लायक
नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जेके सैनी ने बताया कि भूजल खराब होने से आए दिन अस्पताल में पानी खराब होने से होने वाली बीमारी और हड्डी कमजोर होने के केस बढ़ रहे हैं। शुद्ध पानी में खनिज लवणों का होना जरूरी है। यदि कम या ज्यादा मात्रा में है तो दोनो ही स्थितियां किडनी सहित अन्य बीमारियों को बढ़ा देते हैं। भूजल में जहां फ्लोराइड, नाइट्रेट सहित अन्य तत्वों की मात्रा बढ़ रही है। वहीं ऑरओ के पानी में मात्रा कम होने के कारण शरीर के लिए नुकसानदेह बन रहा है।