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Rohtak News: दांतों की फिलिंग के लिए एक माह में 625 लोग पहुंचे
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रोहतक। खानपान की बदलती शैली दांतों को बीमार बना रही है। सामान्य अस्पताल में पाइरिया, रूट कैनाल ट्रीटमेंट, सर्जिकल ऑपरेशन, डेंटल फिलिंग (क्षतिग्रस्त दांतों को मजबूत बनाने) समग्र दंत स्वास्थ्य के लिए बीते माह 1862 मरीज पहुंचे। इसमें से 1607 मरीजों का इलाज किया गया।
ज्यादातर मरीज दांत निकलवाने ओर क्षतिग्रस्त दांतों की फिलिंग के लिए आते हैं। लोगों में जागरूकता की कमी के कारण पायरिया और कैविटी की समस्या आती है। कई मामलों में, लोगों को कैविटी की शुरुआत में कोई लक्षण अनुभव नहीं होता है। जैसे-जैसे क्षय बड़ा होता जाता है या दांत की तंत्रिका के करीब होता जाता है, लक्षणों की संभावना बढ़ जाती है। दांत का दर्द कैविटी के कारण महसूस हो सकता है, जो अनियमित रूप से आता और जाता है या लगातार दर्द बना रह सकता है। कुछ मरीजों में कैविटी का दर्द केवल खाने या काटने पर ही महसूस होता है। गर्मी, ठंड या मिठास के प्रति संवेदनशीलता सांसों की दुर्गंध या मुंह का खराब स्वाद जो ब्रश करने या फ्लॉसिंग से दूर नहीं होता है ऐसे में दातों में पायरिया और सड़न की शुरुआत हो जाती है। नमक युक्त जल पीने से भी फ्लोरोसिस (दांतों में चकते) पड़ सकते हैं।
इन आंकड़ों से समझें स्थिति :
1607 बीमार दांतों का हुआ इलाज
449 मरीजों के निकाले गए दांत
625 क्षतिग्रस्त दांतों की हुई फिलिंग
335 पायरिया लगे दांतों की सफाई
78 सर्जिकल ऑपरेशन हुए
120 रूट कैनाल ट्रीटमेंट
दांत की बीमारी ज्यादातर कैविटी से शुरू होती है। पायरिया व मुंह में बदबू आने की समस्या प्रारंभिक है। ज्यादातर जागरूकता की कमी से यह दिक्कतें शुरू होती हैं। ऐसे में खुद से इलाज नहीं करना चाहिए। बालू या मिट्टी से दांतों को साफ नहीं करना चाहिए। दांतों को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन सी युक्त सब्जियां व फल खाने चाहिए। दांतों को स्वस्थ और सुंदर रखने के लिए रोज दो बार ब्रश करना चाहिए। मीठे और चिपकने खाद्य पदार्थ खाने के बाद दांतों की अच्छे से सफाई करनी चाहिए।
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-डॉ. अतुल शर्मा, सीनियर डेंटल सर्जन, नागरिक अस्पताल
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ज्यादातर मरीज दांत निकलवाने ओर क्षतिग्रस्त दांतों की फिलिंग के लिए आते हैं। लोगों में जागरूकता की कमी के कारण पायरिया और कैविटी की समस्या आती है। कई मामलों में, लोगों को कैविटी की शुरुआत में कोई लक्षण अनुभव नहीं होता है। जैसे-जैसे क्षय बड़ा होता जाता है या दांत की तंत्रिका के करीब होता जाता है, लक्षणों की संभावना बढ़ जाती है। दांत का दर्द कैविटी के कारण महसूस हो सकता है, जो अनियमित रूप से आता और जाता है या लगातार दर्द बना रह सकता है। कुछ मरीजों में कैविटी का दर्द केवल खाने या काटने पर ही महसूस होता है। गर्मी, ठंड या मिठास के प्रति संवेदनशीलता सांसों की दुर्गंध या मुंह का खराब स्वाद जो ब्रश करने या फ्लॉसिंग से दूर नहीं होता है ऐसे में दातों में पायरिया और सड़न की शुरुआत हो जाती है। नमक युक्त जल पीने से भी फ्लोरोसिस (दांतों में चकते) पड़ सकते हैं।
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इन आंकड़ों से समझें स्थिति :
1607 बीमार दांतों का हुआ इलाज
449 मरीजों के निकाले गए दांत
625 क्षतिग्रस्त दांतों की हुई फिलिंग
335 पायरिया लगे दांतों की सफाई
78 सर्जिकल ऑपरेशन हुए
120 रूट कैनाल ट्रीटमेंट
दांत की बीमारी ज्यादातर कैविटी से शुरू होती है। पायरिया व मुंह में बदबू आने की समस्या प्रारंभिक है। ज्यादातर जागरूकता की कमी से यह दिक्कतें शुरू होती हैं। ऐसे में खुद से इलाज नहीं करना चाहिए। बालू या मिट्टी से दांतों को साफ नहीं करना चाहिए। दांतों को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन सी युक्त सब्जियां व फल खाने चाहिए। दांतों को स्वस्थ और सुंदर रखने के लिए रोज दो बार ब्रश करना चाहिए। मीठे और चिपकने खाद्य पदार्थ खाने के बाद दांतों की अच्छे से सफाई करनी चाहिए।
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-डॉ. अतुल शर्मा, सीनियर डेंटल सर्जन, नागरिक अस्पताल