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फाइन आर्ट
Updated Tue, 13 Mar 2018 02:40 AM IST
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बगैर मंजूरी के एनसीटीई का पाठ्यक्रम लागू करने का मामला
एचटेट परीक्षा पाठ्यक्रम में बदलाव के फैसले को उम्मीदवारों ने अदालत में दी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक
एचटेट परीक्षा 2017 के पाठ्यक्रम में किए गए बदलाव को लेकर उम्मीदवार अदालत पहुंच गए हैं। प्रदेश सरकार व एनसीटीई के खिलाफ याचिका अदालत ने स्वीकार करते हुए अदालत ने 26 मार्च को सुनवाई दिन रखा है। यहां प्रदेश सरकार व एनसीटीई को कोर्ट में पेश होकर अपना जवाब पेश करना है।
अदालत में बबीता दिग्विजय जाखड़ की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि एक तरफ हरियाणा सरकार एनसीटीई की गाइडलाइंस अपनाने का दावा कर रही है। जबकि दूसरी ओर बगैर मंजूरी एनसीटीई के पाठ्यक्रम लागू कर दिया गया है। यह नियमों के खिलाफ है। ऐसे में उम्मीदवारों को यह एचटेट परीक्षा रद्द होने की आशंका है। उम्मीदवारों को एचटेट 2017 की परीक्षा दोबारा कराए जाने की भी उम्मीद है।
भिवानी की बबीता, रोहतक के दिग्विजय जाखड़, करनाल की रुचिका व अन्य का कहना है कि सरकार एचटेट परीक्षा के आयोजन को सफल बता रही है, लेकिन यह सवालों में घिरी है। उन्होंने वर्ष 2017 की एचटेट परीक्षा को लेकर आपत्ती जताई थी। इसे अनसुना कर दिया गया। उच्च न्यायालय में एनसीटीई व हरियाणा सरकार के विरुद्ध केस भी किया। इसमें उच्च न्यायालय ने 19 दिसंबर को अपने फैसले में उम्मीदवारों को एनसीटीई के समक्ष अपनी प्रेजेंटेशन देने की बात कही। एचटेट परीक्षा के आयोजन से पहले ही अपनी प्रेजेंटेशन एनसीटीई के समक्ष रखी गई। इस बारे में 15 जनवरी को रिमाइंडर भी दिया गया। इसके बावजूद कोई संज्ञान नहीं लिया गया। अधिवक्ता तेजपाल ढुल ने कानूनी नोटिस भेजा। एनसीटीई ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके चलते उम्मीदवारों ने दोबारा उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। इसके चलते उम्मीदवारों ने अदालत से न्याय की आस जगी है।
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एचटेट परीक्षा पाठ्यक्रम में बदलाव के फैसले को उम्मीदवारों ने अदालत में दी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक
एचटेट परीक्षा 2017 के पाठ्यक्रम में किए गए बदलाव को लेकर उम्मीदवार अदालत पहुंच गए हैं। प्रदेश सरकार व एनसीटीई के खिलाफ याचिका अदालत ने स्वीकार करते हुए अदालत ने 26 मार्च को सुनवाई दिन रखा है। यहां प्रदेश सरकार व एनसीटीई को कोर्ट में पेश होकर अपना जवाब पेश करना है।
अदालत में बबीता दिग्विजय जाखड़ की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि एक तरफ हरियाणा सरकार एनसीटीई की गाइडलाइंस अपनाने का दावा कर रही है। जबकि दूसरी ओर बगैर मंजूरी एनसीटीई के पाठ्यक्रम लागू कर दिया गया है। यह नियमों के खिलाफ है। ऐसे में उम्मीदवारों को यह एचटेट परीक्षा रद्द होने की आशंका है। उम्मीदवारों को एचटेट 2017 की परीक्षा दोबारा कराए जाने की भी उम्मीद है।
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भिवानी की बबीता, रोहतक के दिग्विजय जाखड़, करनाल की रुचिका व अन्य का कहना है कि सरकार एचटेट परीक्षा के आयोजन को सफल बता रही है, लेकिन यह सवालों में घिरी है। उन्होंने वर्ष 2017 की एचटेट परीक्षा को लेकर आपत्ती जताई थी। इसे अनसुना कर दिया गया। उच्च न्यायालय में एनसीटीई व हरियाणा सरकार के विरुद्ध केस भी किया। इसमें उच्च न्यायालय ने 19 दिसंबर को अपने फैसले में उम्मीदवारों को एनसीटीई के समक्ष अपनी प्रेजेंटेशन देने की बात कही। एचटेट परीक्षा के आयोजन से पहले ही अपनी प्रेजेंटेशन एनसीटीई के समक्ष रखी गई। इस बारे में 15 जनवरी को रिमाइंडर भी दिया गया। इसके बावजूद कोई संज्ञान नहीं लिया गया। अधिवक्ता तेजपाल ढुल ने कानूनी नोटिस भेजा। एनसीटीई ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके चलते उम्मीदवारों ने दोबारा उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। इसके चलते उम्मीदवारों ने अदालत से न्याय की आस जगी है।
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