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तहसीलदार को प्रमाण पत्र भेजने के बाद नहीं होगी समस्या
Updated Sat, 10 Mar 2018 03:32 AM IST
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पेंशन धारकों को जीवित होने का प्रमाण पत्र जमा कराने के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं
- तहसीलदार का प्रमाण पत्र भेजने के बाद नहीं होगी कोई समस्या
फोटो सहित
संजय कुमार
रोहतक।
पेंशन धारकों को स्वयं के जीवित होने का प्रमाण पत्र ट्रेजरी में जमा कराने के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। यदि कोई लाभार्थी राज्य से बाहर रहता है या प्रदेश में ही किसी अन्य जिले में रहता है तो वह वहां के तहसीलदार से वह अपने जीवत होने का प्रमाण पत्र बनवा कर अपने जिले के ट्रेजरी अधिकारी को भेज सकता है। यदि किसी वजह से यह भी संभव नहीं हो पाता तो पेंशन धारक 11 माह तक अपने जिले के ट्रेेजरी अधिकारी से मिल सकता है, कागजात जमा होने के बाद उसकी पिछली पेंशन भी मिल जाएगी।
मार्च से अप्रैल माह तक ट्रेजरी कार्यालय में पेंशन धारकों की चहल कदमी बढ़ जाती है। इसी बीच अफवाहों के चलते पेंशन धारक परेशान होते रहते हैं और ट्रेजरी के चक्कर काटने पर मजबूर होते हैं। हाल ही में प्रदेश के कुछ जिलों में ट्रेजरी कार्यालयों में अधिकारियों ने पेंशन धारकों से उनके जीवित होने के प्रमाण पत्र लेने शुरू कर दिए हैं। विभाग के सूत्रों की मानें तो बायोमैट्रिक पर पेंशन धारकों के अंगुठे और उंगलियों के निशान के अलावा आंखों की पुतली का मिलान किया जाता है। इसमें कुछ बुजुर्गों का मिलान न होने पर समस्या बढ़ जाती है। गिनती की एक दो मशीन होने और पेंशन धारकों की संख्या अधिक होने के चलते हर साल ट्रेजरी कार्यालय में विवाद होता रहता है। जानकारी के अभाव में पेंशन धारक परेशान होते रहते हैं। ट्रेेजरी अधिकारी रोहतक आरएस साहू ने बताया कि अप्रैल माह तक पेंशन धारकों को स्वयं के जीवित होने का प्रमाण देने के लिए अपने जिले के ट्रेजरी कार्यालय में आना होता है। यदि कोई दूसरे जिले में या अन्य किसी राज्य में है तो उसे चिंता करने की जरूरत नहीं है। वह वहां के तहसीलदार के पास जा कर स्वयं के कागजात दिखा कर स्वयं का जीवित होने का प्रमाण पत्र बनवा सकता है। इसके बाद इस कागज को वह अपने जिला के ट्रेजरी कार्यालय में भिजवा सकता है। इससे उसकी पेंशन नहीं रुकेगी। यदि किसी वजह से देरी भी हो जाती है तो किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। 11 माह तक कागज लेने का अधिकार हर जिला ट्रेजरी अधिकारी के पास होता है, इसके बाद पेंशन को दुबारा चालू करने का अधिकारी पंचकुला एजीएम के पास होता है। जितनी पेंशन रुकी होती है वह पेंशन चालू होने पर एक साथ लाभार्थी के खाते में आ जाती है। गौरतलब है कि रोहतक जिला में 8081 पेंशन धारक हैं। इन्हें हर साल अप्रैल माह के अंत तक स्वयं के जीवित होने का प्रमाण पत्र देना होता है। यह प्रक्रिया अप्रैल में ही शुरू होती है, लेकिन विभाग कुछ जिलों में भीड़ से बचने के लिए इसे मार्च से ही शुरू कर देता है।
- तहसीलदार का प्रमाण पत्र भेजने के बाद नहीं होगी कोई समस्या
फोटो सहित
संजय कुमार
रोहतक।
पेंशन धारकों को स्वयं के जीवित होने का प्रमाण पत्र ट्रेजरी में जमा कराने के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। यदि कोई लाभार्थी राज्य से बाहर रहता है या प्रदेश में ही किसी अन्य जिले में रहता है तो वह वहां के तहसीलदार से वह अपने जीवत होने का प्रमाण पत्र बनवा कर अपने जिले के ट्रेजरी अधिकारी को भेज सकता है। यदि किसी वजह से यह भी संभव नहीं हो पाता तो पेंशन धारक 11 माह तक अपने जिले के ट्रेेजरी अधिकारी से मिल सकता है, कागजात जमा होने के बाद उसकी पिछली पेंशन भी मिल जाएगी।
मार्च से अप्रैल माह तक ट्रेजरी कार्यालय में पेंशन धारकों की चहल कदमी बढ़ जाती है। इसी बीच अफवाहों के चलते पेंशन धारक परेशान होते रहते हैं और ट्रेजरी के चक्कर काटने पर मजबूर होते हैं। हाल ही में प्रदेश के कुछ जिलों में ट्रेजरी कार्यालयों में अधिकारियों ने पेंशन धारकों से उनके जीवित होने के प्रमाण पत्र लेने शुरू कर दिए हैं। विभाग के सूत्रों की मानें तो बायोमैट्रिक पर पेंशन धारकों के अंगुठे और उंगलियों के निशान के अलावा आंखों की पुतली का मिलान किया जाता है। इसमें कुछ बुजुर्गों का मिलान न होने पर समस्या बढ़ जाती है। गिनती की एक दो मशीन होने और पेंशन धारकों की संख्या अधिक होने के चलते हर साल ट्रेजरी कार्यालय में विवाद होता रहता है। जानकारी के अभाव में पेंशन धारक परेशान होते रहते हैं। ट्रेेजरी अधिकारी रोहतक आरएस साहू ने बताया कि अप्रैल माह तक पेंशन धारकों को स्वयं के जीवित होने का प्रमाण देने के लिए अपने जिले के ट्रेजरी कार्यालय में आना होता है। यदि कोई दूसरे जिले में या अन्य किसी राज्य में है तो उसे चिंता करने की जरूरत नहीं है। वह वहां के तहसीलदार के पास जा कर स्वयं के कागजात दिखा कर स्वयं का जीवित होने का प्रमाण पत्र बनवा सकता है। इसके बाद इस कागज को वह अपने जिला के ट्रेजरी कार्यालय में भिजवा सकता है। इससे उसकी पेंशन नहीं रुकेगी। यदि किसी वजह से देरी भी हो जाती है तो किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। 11 माह तक कागज लेने का अधिकार हर जिला ट्रेजरी अधिकारी के पास होता है, इसके बाद पेंशन को दुबारा चालू करने का अधिकारी पंचकुला एजीएम के पास होता है। जितनी पेंशन रुकी होती है वह पेंशन चालू होने पर एक साथ लाभार्थी के खाते में आ जाती है। गौरतलब है कि रोहतक जिला में 8081 पेंशन धारक हैं। इन्हें हर साल अप्रैल माह के अंत तक स्वयं के जीवित होने का प्रमाण पत्र देना होता है। यह प्रक्रिया अप्रैल में ही शुरू होती है, लेकिन विभाग कुछ जिलों में भीड़ से बचने के लिए इसे मार्च से ही शुरू कर देता है।
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