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अव्यवस् थाएं दूर करने की तैयारी में पीजीआईएमएस
Updated Wed, 06 Dec 2017 03:14 AM IST
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अव्यवस्थाएं दूर करने की तैयारी में पीजीआईएमएस
डॉक्टरों और स्टाफ पर कसा शिकंजा
- कागज कार्रवाई समय पर पूरी करें नहीं तो रहें खामियाजा भुगतने को तैयार
- आपात कालीन विभाग में बगैर पहचान पत्र के नहीं आएगा कोई भी डॉक्टर
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में पसरी अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए प्रशासन ने आखिरकार कमर कस ही ली है। यहां डॉक्टरों और स्टाफ पर शिकंजा कसते हुए अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अब कोई बगैर पहचान पत्र के दिखाई न दे। इसके अलावा डॉक्टर भी बगैर एप्रेन और पहचान पत्र के कार्य न करें। इसके अलावा सभी विभागाध्यक्षों और डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वह सारा रिकार्ड हर हाल में एक सप्ताह के अंदर एमएस कार्यालय में जमा कराएं। यदि ऐसा नहीं होता तो उन्हें लंबी प्रक्रिया के लिए तैयार रहना होगा।
आपातकालीन विभाग के प्रोफेसर इंचार्ज एवं पीसीसीएम विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी ने निजी अस्पतालों की पैठ खत्म करने के लिए डॉक्टरों और स्टाफ को नियमों से बांधना शुरू कर दिया है। इसके लिए डॉ. ध्रुव ने सभी विभागाध्यक्षों को पत्र जारी किया है और कहा है कि उनके जो भी डॉक्टर आपातकालीन विभाग में कार्य करते हैं, वह बगैर एप्रेन और पहचान पत्र के अपना कार्य न करें। इसके साथ ही मरीज के ओपीडी कार्ड पर वह जो भी उपचार करें, उसको समयबद्ध सही तरीके से लिखे और अंत में अपना पद व नाम भी जरूर लिखे।
इससे मरीजों और परिजनों को उपचार करने वाले सरकारी डॉक्टर की और अन्य स्टाफ की पहचान रहेगी। इससे कोई बाहरी व्यक्ति मरीज को सरकारी डॉक्टर और स्टाफ की आड़ में धोखा नहीं दे सकेगा। इसके अलावा उन्होंने पत्र में स्पष्ट कहा है कि आपात विभाग में जिस कंस्लटेंट का राउंड होगा वह समय पर राउंड ले और मरीज के उपचार के लिए वार्ड में शिफ्ट करें या उसकी छुट्टी करने पर फैसला ले। इससे आपात विभाग से मरीजों का लोड कम होगा। गौरतलब है कि संस्थान के आपात विभाग से निजी अस्पतालों में मरीजों को दलालों के माध्यम से रेफर किया जाता है। इसके लिए बाकायदा डॉक्टर से लेकर अन्य स्टाफ का कमीशन तय होता है। अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से उठाया, इस पर अधिकारी ने कार्रवाई की और अब सभी विभागाध्यक्षों को यह निर्देश जारी किए हैं।
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सप्ताह के अंदर जमा कराए रिकार्ड, नहीं तो होगी मुश्किल
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नित्यानंद शर्मा ने आपात विभाग के अलावा विभिन्न विभागों के अध्यक्षों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट कहा है कि वह अपने यहां का रिकार्ड एक सप्ताह के अंदर एमएस कार्यालय में भिजवा दें। यदि ऐसा नहीं होता तो वह फिर लंबी प्रक्रिया के लिए तैयार रहें। लेट लतीफ रिकार्ड को जमा कराने के लिए डॉक्टर को अपना एफिडेविट, आधार कार्ड की कापी और अपने विभागाध्यक्ष से इसकी अप्रूवल जमा करानी होगी। वहीं आपात विभाग के लिए निर्देश जारी हुए हैं कि एमएलसी, पीआई, डैथ फाइल को डॉक्टर समय पर जमा नहीं करते। इससे कई प्रकार की समस्याएं होती हैं। सबसे अधिक समस्या जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र लेने वाले लोगों को होती है।
डॉ. वशिष्ठ को बनाया कैशलेस स्कीम का नोडल अधिकारी
संस्थान ने डॉ. बीएम वशिष्ठ को स्टोर और डिस्पेंसरी का चार्ज देने के साथ ही कैशलेस स्कीम का नोडल अधिकारी बनाया है। इस स्कीम का शुभारंभ 30 नवंबर को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने किया था। इसके तहत सरकारी कर्मचारियों को पांच लाख रुपये तक के उपचार में होने वाले खर्च की सुविधा मिलेगी।
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डॉक्टरों और स्टाफ पर कसा शिकंजा
- कागज कार्रवाई समय पर पूरी करें नहीं तो रहें खामियाजा भुगतने को तैयार
- आपात कालीन विभाग में बगैर पहचान पत्र के नहीं आएगा कोई भी डॉक्टर
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में पसरी अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए प्रशासन ने आखिरकार कमर कस ही ली है। यहां डॉक्टरों और स्टाफ पर शिकंजा कसते हुए अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अब कोई बगैर पहचान पत्र के दिखाई न दे। इसके अलावा डॉक्टर भी बगैर एप्रेन और पहचान पत्र के कार्य न करें। इसके अलावा सभी विभागाध्यक्षों और डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वह सारा रिकार्ड हर हाल में एक सप्ताह के अंदर एमएस कार्यालय में जमा कराएं। यदि ऐसा नहीं होता तो उन्हें लंबी प्रक्रिया के लिए तैयार रहना होगा।
आपातकालीन विभाग के प्रोफेसर इंचार्ज एवं पीसीसीएम विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी ने निजी अस्पतालों की पैठ खत्म करने के लिए डॉक्टरों और स्टाफ को नियमों से बांधना शुरू कर दिया है। इसके लिए डॉ. ध्रुव ने सभी विभागाध्यक्षों को पत्र जारी किया है और कहा है कि उनके जो भी डॉक्टर आपातकालीन विभाग में कार्य करते हैं, वह बगैर एप्रेन और पहचान पत्र के अपना कार्य न करें। इसके साथ ही मरीज के ओपीडी कार्ड पर वह जो भी उपचार करें, उसको समयबद्ध सही तरीके से लिखे और अंत में अपना पद व नाम भी जरूर लिखे।
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इससे मरीजों और परिजनों को उपचार करने वाले सरकारी डॉक्टर की और अन्य स्टाफ की पहचान रहेगी। इससे कोई बाहरी व्यक्ति मरीज को सरकारी डॉक्टर और स्टाफ की आड़ में धोखा नहीं दे सकेगा। इसके अलावा उन्होंने पत्र में स्पष्ट कहा है कि आपात विभाग में जिस कंस्लटेंट का राउंड होगा वह समय पर राउंड ले और मरीज के उपचार के लिए वार्ड में शिफ्ट करें या उसकी छुट्टी करने पर फैसला ले। इससे आपात विभाग से मरीजों का लोड कम होगा। गौरतलब है कि संस्थान के आपात विभाग से निजी अस्पतालों में मरीजों को दलालों के माध्यम से रेफर किया जाता है। इसके लिए बाकायदा डॉक्टर से लेकर अन्य स्टाफ का कमीशन तय होता है। अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से उठाया, इस पर अधिकारी ने कार्रवाई की और अब सभी विभागाध्यक्षों को यह निर्देश जारी किए हैं।
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सप्ताह के अंदर जमा कराए रिकार्ड, नहीं तो होगी मुश्किल
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नित्यानंद शर्मा ने आपात विभाग के अलावा विभिन्न विभागों के अध्यक्षों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट कहा है कि वह अपने यहां का रिकार्ड एक सप्ताह के अंदर एमएस कार्यालय में भिजवा दें। यदि ऐसा नहीं होता तो वह फिर लंबी प्रक्रिया के लिए तैयार रहें। लेट लतीफ रिकार्ड को जमा कराने के लिए डॉक्टर को अपना एफिडेविट, आधार कार्ड की कापी और अपने विभागाध्यक्ष से इसकी अप्रूवल जमा करानी होगी। वहीं आपात विभाग के लिए निर्देश जारी हुए हैं कि एमएलसी, पीआई, डैथ फाइल को डॉक्टर समय पर जमा नहीं करते। इससे कई प्रकार की समस्याएं होती हैं। सबसे अधिक समस्या जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र लेने वाले लोगों को होती है।
डॉ. वशिष्ठ को बनाया कैशलेस स्कीम का नोडल अधिकारी
संस्थान ने डॉ. बीएम वशिष्ठ को स्टोर और डिस्पेंसरी का चार्ज देने के साथ ही कैशलेस स्कीम का नोडल अधिकारी बनाया है। इस स्कीम का शुभारंभ 30 नवंबर को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने किया था। इसके तहत सरकारी कर्मचारियों को पांच लाख रुपये तक के उपचार में होने वाले खर्च की सुविधा मिलेगी।