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हहह
Updated Fri, 21 Jul 2017 01:03 AM IST
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125 गांवों के भूजल में फ्लोराइड ज्यादा
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल।
जिले का भूमिगत जल लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। नहरी पानी की बजाय भूमिगत जल का इस्तेमाल पीने के पानी के रूप में करने से लोग फ्लोरोसिस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांवों के भूमिगत जल के सैंपल की जांच के बाद यह खुलासा किया है। विभाग ने करीब 125 से अधिक गांवों के पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे थे। इसमें फ्लोराइड की मात्रा अधिक पायी गई है। विभाग के अनुसार इससे अनेक प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं। जिले में बढ़ती फ्लोरोसिस की समस्या के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग जागरुकता कार्यक्रम भी चला रहा है। इसके तहत सभी गांवों से भूमिगत जल के नमूने लेकर उनमें फ्लोराइड की मात्रा जांची जा रही है। पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग की फ्लोरोसिस टीम ने दोहान पच्चीसी और नांगल चौधरी खंड के करीब 125 गांवों से पानी के नमूनों की जांच कराई। इसमें करीब 70 प्रतिशत नमूनों में फ्लोराइड की मात्रा मानक से अधिक पायी गई।
सर्वे के दौरान टीम ने पाया कि क्षेत्र के गांवों में नहरी पानी लहरोदा से आपूर्ति की जा रही है। लोग इस पानी को पीने के रूप में इस्तेमाल नहीं करते बल्कि नहाने और कपड़े धोने के काम में लाते हैं। लोग सोचते हैं कि यह पानी साफ और पीने लायक नहीं होता जबकि नहरी पानी ट्रीटमेंट के बाद पूरी तरह सुरक्षित होता है। दूसरी तरफ कुएं का पानी साफ दिखाई देता है, लेकिन उसमें फ्लोराइड, लेड और आर्सेनिक जैसे घातक रासायनिक पदार्थ घुले होते हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते हैं। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लोगों को पोस्टर, पंपलेट से जागरूक भी किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा सरकारी स्कूलों के बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। जांच दौरान पता चला कि बच्चों में काफी मात्रा में दंत फ्लोरोसिस की समस्या हैं जो कि फ्लोराइड की अधिकता के कारण हो रही है।
कुएं के साफ दिखने वाले पानी में होता है अधिक फ्लोराइड
फ्लोराइड एक रासायनिक पदार्थ है जो रंगहीन और स्वादहीन होता है। साफ दिखाई देने वाले कुएं के पानी में भी फ्लोराइड की मात्रा मानक से अधिक हो सकती है। इस कारण लोगों में फ्लोरोसिस नामक बीमारी हो रही है। भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार पानी में इसकी सुरक्षित मात्रा 1 पीपीएम बताई गई है। इससे अधिक और कम दोनों ही स्थिति में यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रही है। इसको दो धारी तलवार भी कहा जाता है।
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दांत व हड्डियां हो रहीं कमजोर
जिले के भूमिगत जल में फ्लोराइड की मात्रा में लगातार इजाफा हो रहा है। इससे दांतों और हड्डियों से संबंधित बीमारियां हो रही हैं। दांतों का पीलापन, हड्डियों और जोड़ो में दर्द, अकड़न, गर्भवती महिलाओं में खून की कमी, पुरुषों में नपुंसकता, शरीर में थकान का होना, अपच जैसी अनेक बीमारियां फ्लोराइड की वजह से होती हैं। पानी के अलावा काला नमक, तंबाकू, सुपारी, बिना दूध की चाय और अधिक फ्लोराइड युक्त दंत मंजन के सेवन से भी फ्लोरोसिस बीमारी होती है।
फ्लोरोसिस से बचाव
आरओ का पानी, नहरी पानी, बरसाती पानी, दूध, दही, हरी सब्जी का सेवन, खट्टे फलों का सेवन और विटामिन डी युक्त भोजन के सेवन से फ्लोराइड का प्रभाव को कम किया जा सकता है।
स्थानीय सिविल सर्जन लेबोरेट्री कार्यालय में कोई भी आम आदमी आपूर्ति हो रहे पेयजल में फ्लोराइड की जांच निशुल्क करवा सकता है। इस समस्या से निपटने के लिए लोगों को विभाग की तरफ से जागरूक किया जा रहा है। - धर्मेश सैनी, नोडल अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग नारनौल
लोगों को फ्लोरोसिस बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए विभाग ने पानी के नमूने लिए हैं। इससे पता चला कि क्षेत्र का भूमिगत जल पीने योग्य नहीं है। इसमें फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। - डीएन बागड़ी, सिविल सर्जन, नारनौल
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल।
जिले का भूमिगत जल लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। नहरी पानी की बजाय भूमिगत जल का इस्तेमाल पीने के पानी के रूप में करने से लोग फ्लोरोसिस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांवों के भूमिगत जल के सैंपल की जांच के बाद यह खुलासा किया है। विभाग ने करीब 125 से अधिक गांवों के पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे थे। इसमें फ्लोराइड की मात्रा अधिक पायी गई है। विभाग के अनुसार इससे अनेक प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं। जिले में बढ़ती फ्लोरोसिस की समस्या के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग जागरुकता कार्यक्रम भी चला रहा है। इसके तहत सभी गांवों से भूमिगत जल के नमूने लेकर उनमें फ्लोराइड की मात्रा जांची जा रही है। पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग की फ्लोरोसिस टीम ने दोहान पच्चीसी और नांगल चौधरी खंड के करीब 125 गांवों से पानी के नमूनों की जांच कराई। इसमें करीब 70 प्रतिशत नमूनों में फ्लोराइड की मात्रा मानक से अधिक पायी गई।
सर्वे के दौरान टीम ने पाया कि क्षेत्र के गांवों में नहरी पानी लहरोदा से आपूर्ति की जा रही है। लोग इस पानी को पीने के रूप में इस्तेमाल नहीं करते बल्कि नहाने और कपड़े धोने के काम में लाते हैं। लोग सोचते हैं कि यह पानी साफ और पीने लायक नहीं होता जबकि नहरी पानी ट्रीटमेंट के बाद पूरी तरह सुरक्षित होता है। दूसरी तरफ कुएं का पानी साफ दिखाई देता है, लेकिन उसमें फ्लोराइड, लेड और आर्सेनिक जैसे घातक रासायनिक पदार्थ घुले होते हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते हैं। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लोगों को पोस्टर, पंपलेट से जागरूक भी किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा सरकारी स्कूलों के बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। जांच दौरान पता चला कि बच्चों में काफी मात्रा में दंत फ्लोरोसिस की समस्या हैं जो कि फ्लोराइड की अधिकता के कारण हो रही है।
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कुएं के साफ दिखने वाले पानी में होता है अधिक फ्लोराइड
फ्लोराइड एक रासायनिक पदार्थ है जो रंगहीन और स्वादहीन होता है। साफ दिखाई देने वाले कुएं के पानी में भी फ्लोराइड की मात्रा मानक से अधिक हो सकती है। इस कारण लोगों में फ्लोरोसिस नामक बीमारी हो रही है। भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार पानी में इसकी सुरक्षित मात्रा 1 पीपीएम बताई गई है। इससे अधिक और कम दोनों ही स्थिति में यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रही है। इसको दो धारी तलवार भी कहा जाता है।
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दांत व हड्डियां हो रहीं कमजोर
जिले के भूमिगत जल में फ्लोराइड की मात्रा में लगातार इजाफा हो रहा है। इससे दांतों और हड्डियों से संबंधित बीमारियां हो रही हैं। दांतों का पीलापन, हड्डियों और जोड़ो में दर्द, अकड़न, गर्भवती महिलाओं में खून की कमी, पुरुषों में नपुंसकता, शरीर में थकान का होना, अपच जैसी अनेक बीमारियां फ्लोराइड की वजह से होती हैं। पानी के अलावा काला नमक, तंबाकू, सुपारी, बिना दूध की चाय और अधिक फ्लोराइड युक्त दंत मंजन के सेवन से भी फ्लोरोसिस बीमारी होती है।
फ्लोरोसिस से बचाव
आरओ का पानी, नहरी पानी, बरसाती पानी, दूध, दही, हरी सब्जी का सेवन, खट्टे फलों का सेवन और विटामिन डी युक्त भोजन के सेवन से फ्लोराइड का प्रभाव को कम किया जा सकता है।
स्थानीय सिविल सर्जन लेबोरेट्री कार्यालय में कोई भी आम आदमी आपूर्ति हो रहे पेयजल में फ्लोराइड की जांच निशुल्क करवा सकता है। इस समस्या से निपटने के लिए लोगों को विभाग की तरफ से जागरूक किया जा रहा है। - धर्मेश सैनी, नोडल अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग नारनौल
लोगों को फ्लोरोसिस बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए विभाग ने पानी के नमूने लिए हैं। इससे पता चला कि क्षेत्र का भूमिगत जल पीने योग्य नहीं है। इसमें फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। - डीएन बागड़ी, सिविल सर्जन, नारनौल