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Rohtak: PGI के PCCM विभाग में तीन माह में सर्प दंश के आए 61 मरीज, 60 की बचाई जान

Thu, 06 Oct 2022 08:01 AM IST
भूपेंद्र सिंह विकास सैनी, अमर उजाला ब्यूराे, रोहतक (हरियाणा)
विकास सैनी, अमर उजाला ब्यूराे, रोहतक (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Thu, 06 Oct 2022 08:01 AM IST
सार

एक मरीज की जान उपचार के लिए देर से पहुंचने के कारण गई थी। पीजीआई के पीसीसीएम विभाग ने संभाले मरीज, गंभीर हालत में आए मरीजों को दी कृत्रिम सांसें। 

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61 patients of snake bite arrived in PCCM department of PGI in three months, 60 lives were saved
पीजीआई राेहतक - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

कोबरा, करैत, रसल वाइपर और पिट वाइपर सर्प इन दिनों लोगों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। घर, खेत, खेल का मैदान, सड़क व अन्य जगहों पर ये जहरीले जीव लोगों की जान पर बन आए हैं, मगर पीजीआई रोहतक का पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसन (पीसीसीएम) विभाग इनको काल के गाल से बचाने का काम कर रहा है। विभाग के डॉक्टर तीन माह में 61 में से 60 मरीजों की जान बचा चुके हैं।

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सर्प दंश से दम तोड़ने वाला एकमात्र व्यक्ति भी झाड़फूंक की वजह से देरी से उपचार के लिए पहुंचा, जिसकी वजह से जान नहीं बचाई जा सकी। अमर उजाला से विशेष बातचीत में पीसीसीएम विभाग के अध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी ने सर्प दंश व क्रिटिकल केयर के बेहतर उपचार के बारे में जानकारी दी। 
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चार तरह के सर्प दंश खतरनाक 
स्वास्थ्य या विज्ञान की दृष्टि से सर्प दंश को चार वर्गों में बांटा गया है। इसे चिकित्सीय भाषा में बिग-4 कहते हैं। इनमें जीवन के लिए खतरनाक जहरीले सांपों को रखा गया है। सर्प दंश के उपचार से पहले काटने वाले सांप की पहचान की जाती है। इसमें से पहला है कोबरा, दूसरा करैत, तीसरा वाइपर। इसमें रसल वाइपर व सो स्केल वाइपर शामिल हैं। चौथा मुख्यत: दक्षिण भारत में पाया जानो वाला पिट वाइपर है। यही चार तरह के सर्प जीवन के लिए खतरनाक होते हैं। इनमें से पहले दो तरह के सर्प का जहर मनुष्य के न्यूरो सिस्टम को डैमेज करता है। जबकि वाइपर का जहर खून में मिलकर उसके रिसाव व गुर्दा फेल होने का कारण बनता है। 
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गर्मी व बरसात में बढ़ जाता है खतरा 
सर्प दंश के केस आमतौर पर गर्मी या बरसात के दिनों में बढ़ जाते हैं। इन दिनों में फसल में पानी देने के बाद या अन्य कारणों से केस आते हैं। किसान, मजदूर, जरूरतमंद परिवार खासकर बरसात के दिनों में जमीन पर सोने वाले, खेतों में रहने वाले, हरियाली भरे इलाके में सांप के लिए भोजन की उपलब्धता वाले इलाके में सर्प दंश के केस सामने आते हैं। करैत आमतौर पर घर में भी घुस जाता है। यह सर्प लोगों की अनदेखी करता है। 

ये हैं मुख्य लक्षण 
नाग या करैत के कटाने पर न्यूरोलॉजिकल लक्षण नजर आते हैं। इसमें डिप्लोफिया, डिस्फेसिया व ड्रलिंग मुख्य हैं। मरीज को चीजें दो दिखाई देना, पलकें न उठना, पानी या थूक न निगल पाना व लार गिरना सर्प दंश के मुख्य लक्षण हैं। 

स्थिर पड़ जाता है शरीर 
सर्प दंश के मरीज का शरीर स्थिर पड़ जाता है। इस स्थिति को पैरालाइज या लकवा ग्रस्त कहा जाता है। मरीज के सिर व गर्दन से शुरू होकर पूरे शरीर में यह फैल जाता है। इससे मरीज हाथ-पैर तक नहीं हिला पाता है। सांस लेना तक मुश्किल होता है। इससे मरीज की मौत हो जाती है। साथ ही इसका दिल पर भी असर पड़ता है। कोबरा के काटने पर काटी गई जगह पर सूजन आ जाती है। यदि कोई ठीक से सोया है और सुबह नहीं उठ पा रहा है, पेट में दर्द है या अन्य लक्षण नजर आते हैं तो यह सर्प दंश का मामला हो सकता है। 

वाइपर के काटने पर खून का रिसाव व गुर्दा फेल (काम नहीं करना) हो जाता है। शरीर में सूजन आ जाती है।  खून का रिसाव शरीर में या बाहर दोनों ओर होता है। सर्प दंश एक आपात स्थिति है। ऐसे मरीज को प्राथमिक इलाज के दौरान सांस व ब्लड प्रेशर पर जोर दिया जाता है। सर्प दंश का इलाज एंटीवेनम (प्रतिविष) है। यह हर अस्पताल में सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई है। 


सर्प दंश एक आपात स्थिति है। आईसीयू सही मायने में ऐसे ही मरीजों के लिए हैं। यहां इन्हें इलाज के साथ कृत्रिम सांस देना होता है। सर्प दंश के मामलों में झाड़फूंक के चक्कर में पड़कर देरी नहीं करनी चाहिए। लक्षण पर ध्यान देना चाहिए। काटने वाले सांप की पहचान जरूरी है। समय पर सही इलाज मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है। इस सीजन में विभाग 60 लोगों की जान बचा चुका है। ये सभी आईसीयू में पहुंचने वाले केस हैं।  -डॉ. ध्रुव चौधरी, अध्यक्ष, पीसीसीएम, पीजीआई।

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